साद · 13/88
अनुवाद उच्चारण — साद
وَثَمُودُ وَقَوْمُ لُوطٍ وَأَصْحَابُ الْأَيْكَةِ ۚ أُولَٰئِكَ الْأَحْزَابُ ۝١٣
Wa Samoodu wa qawmu Lootinw wa Ashaabul `Aykah; ulaaa`ikal Ahzaab
📖 हिंदी अर्थ
और समूद और लूत की क़ौम और जंगल के रहने वाले (क़ौम शुऐब ये सब पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं यही वह गिरोह है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ثَمُودُ (समूद): यह नबी सालिह अलैहिस्सलाम की क़ौम थी।
  • قَوْمُ لُوطٍ (क़ौमे लूत): यह नबी लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम थी।
  • أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ (अस्हाबुल ऐकह): यानी "झाड़ियों वाले", यह नबी शुएब अलैहिस्सलाम की क़ौम थी, जो घने पेड़ों और बागों के बीच रहती थी।
  • الأَحْزَابُ (अहज़ाब): यानी "गिरोह" या "दल", जो नबियों के विरोध में एकजुट हुए।

तफ़सीर:

इन आयतों में अल्लाह तआला ने उन क़ौमों का ज़िक्र किया है जिन्होंने अपने-अपने नबियों को झुठलाया और उनके ख़िलाफ़ एकजुट हो गए। समूद की क़ौम ने नबी सालिह को झुठलाया, क़ौमे लूत ने नबी लूत को, और अस्हाबुल ऐकह (यानी क़ौमे शुएब) ने नबी शुएब को। ये सभी "अहज़ाब" यानी गिरोह थे, जिन्होंने हक़ के ख़िलाफ़ इकट्ठा होकर झूठ पर डटे रहे।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये सारे गिरोह आख़िरकार हार गए और अल्लाह का अज़ाब उन पर नाज़िल हुआ। जिस तरह इनसे पहले नूह की क़ौम, आद और फ़िरऔन (जो बड़ी ताक़तवर था) को भी उनके कुफ़्र की वजह से तबाह कर दिया गया। यह एक सबक़ है कि अल्लाह की ताक़त के आगे कोई ताक़त नहीं चलती।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सच्चाई पर क़ायम रहना चाहिए, चाहे कितने ही लोग उसके ख़िलाफ़ क्यों न इकट्ठा हों। अल्लाह का दीन हमेशा बुलंद रहता है, और जो लोग उसके नबियों का विरोध करते हैं, वे आख़िरकार रुसवा होते हैं। यह हमारे लिए इत्मीनान की बात है कि अगर हम हक़ पर हैं तो अल्लाह हमारी मदद करेगा, चाहे दुनिया भर के लोग हमारे ख़िलाफ़ क्यों न हों।

आज भी जब हम देखते हैं कि कुछ लोग इस्लाम के ख़िलाफ़ गिरोह बनाते हैं, तो हमें यक़ीन रखना चाहिए कि ये लोग उन्हीं पुराने अहज़ाब की तरह हैं, जिनका अंजाम बर्बादी के सिवा कुछ नहीं। अल्लाह अपने नबी और उनके सच्चे अनुयायियों की हमेशा मदद करता है। हमें चाहिए कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है।



📜 आयत 11-15 — साद

11جُندٌ مَّا هُنَالِكَ مَهْزُومٌ مِّنَ الْأَحْزَابِ
(ऐ रसूल उन पैग़म्बरों के साथ झगड़ने वाले) गिरोहों में से यहाँ तुम्हारे मुक़ाबले में भी एक लशकर है जो शिकस्त खाएगा
12كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَفِرْعَوْنُ ذُو الْأَوْتَادِ
उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और फिरऔन मेंख़ों वाला
13وَثَمُودُ وَقَوْمُ لُوطٍ وَأَصْحَابُ الْأَيْكَةِ ۚ أُولَٰئِكَ الْأَحْزَابُ
और समूद और लूत की क़ौम और जंगल के रहने वाले (क़ौम शुऐब ये सब पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं यही वह गिरोह है
14إِن كُلٌّ إِلَّا كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ عِقَابِ
(जो शिकस्त खा चुके) सब ही ने तो पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा अज़ाब ठीक आ नाज़िल हुआ
15وَمَا يَنظُرُ هَٰؤُلَاءِ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً مَّا لَهَا مِن فَوَاقٍ
और ये (काफिर) लोग बस एक चिंघाड़ (सूर के मुन्तज़िर हैं जो फिर उन्हें) चश्में ज़दन की मोहलत न देगी
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अनुवाद — साद 13

सूरा साद आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और समूद और लूत की क़ौम और जंगल के रहने…

सूरा आयत 13/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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