साद · 14/88
अनुवाद उच्चारण — साद
إِن كُلٌّ إِلَّا كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ عِقَابِ ۝١٤
In kullun illaa kazzabar Rusula fahaqqa `iqaab
📖 हिंदी अर्थ
(जो शिकस्त खा चुके) सब ही ने तो पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा अज़ाब ठीक आ नाज़िल हुआ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِن كُلٌّ إِلَّا: "कोई भी नहीं, सिवाय..." अर्थात हर एक ने।
  • كَذَّبَ الرُّسُلَ: रसूलों को झुठलाया।
  • فَحَقَّ عِقَابِ: तो उन पर मेरी सज़ा वाजिब हो गई।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये आयत उन गिरोहों (जुंदों) का ज़िक्र कर रही है जो अल्लाह के रसूलों को झुठलाने में एकजुट हो गए थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इनमें से हर एक ने रसूलों को झुठलाया, और जब उन्होंने अपने नबी को झुठलाया तो गोया उन्होंने सभी रसूलों को झुठला दिया, क्योंकि सभी रसूलों का दीन और पैग़ाम एक ही था। जो एक रसूल को नहीं मानता, वह असल में सारे रसूलों की दावत को नकारता है।

इससे पहले की आयात में अल्लाह ने उन गिरोहों का हाल बयान किया जो अपने नबियों के खिलाफ इकट्ठे हुए — नूह की क़ौम, आद, फ़िरऔन जो बड़ी ताक़त रखता था, समूद, लूत की क़ौम, और "अल-ऐकह" (बाग़ों वाले) यानी शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम। ये सब अपने-अपने नबियों को झुठलाने में एक जैसे थे, इसलिए अल्लाह का अज़ाब उन पर नाज़िल हुआ और उनकी सज़ा वाजिब हो गई।

इस आयत में एक बड़ी सीख है — अल्लाह की सज़ा कभी जल्दी नहीं आती, लेकिन ज़रूर आती है। जो लोग हक़ को नकारते हैं और नबियों की दावत को ठुकराते हैं, वे अल्लाह के अज़ाब से बच नहीं सकते, चाहे उन्हें कितनी भी मोहलत मिल जाए। ये इतिहास के सबक हैं जो हमें बताते हैं कि अल्लाह का क़ानून बदलता नहीं — सत्य का इनकार करने वालों का अंजाम हमेशा बुरा होता है।

प्यारे भाइयो और बहनो! ये आयत हमें चेतावनी देती है कि हम अपने नबी ﷺ की लाई हुई हिदायत को कभी न ठुकराएँ। जो लोग पहले गुज़रे, उन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और तबाह हो गए। आज हमारे पास आख़िरी रसूल ﷺ का पैग़ाम है — कुरआन और सुन्नत। अगर हम इसे अपनाएँगे तो दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होंगे, और अगर इसे छोड़ेंगे तो अल्लाह की पकड़ से कोई नहीं बचा सकता। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — साद

12كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَفِرْعَوْنُ ذُو الْأَوْتَادِ
उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और फिरऔन मेंख़ों वाला
13وَثَمُودُ وَقَوْمُ لُوطٍ وَأَصْحَابُ الْأَيْكَةِ ۚ أُولَٰئِكَ الْأَحْزَابُ
और समूद और लूत की क़ौम और जंगल के रहने वाले (क़ौम शुऐब ये सब पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं यही वह गिरोह है
14إِن كُلٌّ إِلَّا كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ عِقَابِ
(जो शिकस्त खा चुके) सब ही ने तो पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा अज़ाब ठीक आ नाज़िल हुआ
15وَمَا يَنظُرُ هَٰؤُلَاءِ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً مَّا لَهَا مِن فَوَاقٍ
और ये (काफिर) लोग बस एक चिंघाड़ (सूर के मुन्तज़िर हैं जो फिर उन्हें) चश्में ज़दन की मोहलत न देगी
16وَقَالُوا رَبَّنَا عَجِّل لَّنَا قِطَّنَا قَبْلَ يَوْمِ الْحِسَابِ
और ये लोग (मज़ाक से) कहते हैं कि परवरदिगार हिसाब के दिन (क़यामत के) क़ब्ल ही (जो) हमारी क़िस्मत को लिखा (हो) हमें जल्दी दे दे
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अनुवाद — साद 14

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Tuesday, August 18, 2026

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