Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नअजह (नाअजा): भेड़, यहाँ इससे मुराद स्त्री भी ली जा सकती है, क्योंकि अरब में अक्सर औरत को भेड़ से सम्बोधित किया जाता था।
- अक्फिल्नीहा: उसे मेरे हवाले कर दे, उसे मुझे सौंप दे।
- अज़्ज़नी: उसने मुझ पर ग़ालिब आ गया, मुझे हरा दिया।
- ख़िताब: बातचीत, कहने में।
तफ़सीर:
यह वह मुक़द्दमा है जो दो भाइयों ने हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के पास पेश किया था। उनमें से एक ने कहा: "यह मेरा भाई है — दीन में भाई हो या ख़ून में — इसके पास निन्यानवे भेड़ें हैं, जबकि मेरे पास सिर्फ़ एक ही भेड़ है। इसके बावजूद इसने मुझसे कहा कि यह एक भेड़ भी मुझे दे दे, उसे अपनी भेड़ों में मिला ले। और बातचीत में उसने मुझ पर ग़ालिब आकर मुझे दबा लिया — यानी उसकी दलीलें मज़बूत थीं, ज़बान तेज़ थी, और मैं कमज़ोर पड़ गया।"
यह एक ज़ाहिरी तौर पर छोटा सा मामला था — एक भेड़ का — लेकिन इसके पीछे एक बड़ी हक़ीक़त छिपी थी। अल्लाह तआला ने यह मंज़र हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को दिखाने का ज़रिया बनाया ताकि वह ख़ुद अपने एक फ़ैसले पर ग़ौर करें। दरअसल यह एक इम्तिहान था — अल्लाह की तरफ़ से एक परीक्षा — जिसमें हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को यह सबक़ मिला कि इंसाफ़ में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, और हर फ़ैसले से पहले दोनों पक्षों की बात ध्यान से सुननी चाहिए।
इस क़िस्से में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है: कितने लोग दुनिया में बहुत कुछ रखते हैं, फिर भी दूसरों के थोड़े पर नज़र रखते हैं। यह लालच और हवस की बुराई है। इसके उलट, एक सच्चा मुसलमान वह है जो अपने हिस्से पर संतुष्ट रहे, दूसरों के हक़ का एहतिराम करे, और कभी किसी की चीज़ को ज़बरदस्ती या चालाकी से हड़पने की कोशिश न करे।
और यह भी याद रखें — अल्लाह तआला अपने नबी को भी इम्तिहान में डालता है तो उन्हें और ऊँचा उठाता है। हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने इस मामले में तौबा की, अल्लाह से माफ़ी माँगी, और अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया और उन्हें और भी बड़ा मर्तबा अता किया। यह हमारे लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है — जब तक हम सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ़ पलटें, अल्लाह हमें माफ़ करने वाला और रहमतों से नवाज़ने वाला है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने अंदर की लालच, हवस और दूसरों पर ज़ुल्म करने की आदतों को छोड़ें, और इंसाफ़, सब्र और क़नाअत (संतोष) को अपनी ज़िंदगी का शिआर बनाएँ।
📜 आयत 21-25 — सूरा साद
अनुवाद — साद 23
सूरा साद आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुराद ये हैं कि) ये (शख्स) मेरा भाई है और…सूरा आयत 23/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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