साद · 23/88
अनुवाद उच्चारण — साद
إِنَّ هَٰذَا أَخِي لَهُ تِسْعٌ وَتِسْعُونَ نَعْجَةً وَلِيَ نَعْجَةٌ وَاحِدَةٌ فَقَالَ أَكْفِلْنِيهَا وَعَزَّنِي فِي الْخِطَابِ ۝٢٣
Inna haazaaa akhee lahoo tis`unw wa tis`oona na`jatanw wa liya na`jatunw waahidah; faqaala akfilneeha wa `azzanee filkhitaab
📖 हिंदी अर्थ
(मुराद ये हैं कि) ये (शख्स) मेरा भाई है और उसके पास निनान्नवे दुम्बियाँ हैं और मेरे पास सिर्फ एक दुम्बी है उस पर भी ये मुझसे कहता है कि ये दुम्बी भी मुझी को दे दें और बातचीत में मुझ पर सख्ती करता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नअजह (नाअजा): भेड़, यहाँ इससे मुराद स्त्री भी ली जा सकती है, क्योंकि अरब में अक्सर औरत को भेड़ से सम्बोधित किया जाता था।
  • अक्फिल्नीहा: उसे मेरे हवाले कर दे, उसे मुझे सौंप दे।
  • अज़्ज़नी: उसने मुझ पर ग़ालिब आ गया, मुझे हरा दिया।
  • ख़िताब: बातचीत, कहने में।

तफ़सीर:

यह वह मुक़द्दमा है जो दो भाइयों ने हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के पास पेश किया था। उनमें से एक ने कहा: "यह मेरा भाई है — दीन में भाई हो या ख़ून में — इसके पास निन्यानवे भेड़ें हैं, जबकि मेरे पास सिर्फ़ एक ही भेड़ है। इसके बावजूद इसने मुझसे कहा कि यह एक भेड़ भी मुझे दे दे, उसे अपनी भेड़ों में मिला ले। और बातचीत में उसने मुझ पर ग़ालिब आकर मुझे दबा लिया — यानी उसकी दलीलें मज़बूत थीं, ज़बान तेज़ थी, और मैं कमज़ोर पड़ गया।"

यह एक ज़ाहिरी तौर पर छोटा सा मामला था — एक भेड़ का — लेकिन इसके पीछे एक बड़ी हक़ीक़त छिपी थी। अल्लाह तआला ने यह मंज़र हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को दिखाने का ज़रिया बनाया ताकि वह ख़ुद अपने एक फ़ैसले पर ग़ौर करें। दरअसल यह एक इम्तिहान था — अल्लाह की तरफ़ से एक परीक्षा — जिसमें हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को यह सबक़ मिला कि इंसाफ़ में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, और हर फ़ैसले से पहले दोनों पक्षों की बात ध्यान से सुननी चाहिए।

इस क़िस्से में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है: कितने लोग दुनिया में बहुत कुछ रखते हैं, फिर भी दूसरों के थोड़े पर नज़र रखते हैं। यह लालच और हवस की बुराई है। इसके उलट, एक सच्चा मुसलमान वह है जो अपने हिस्से पर संतुष्ट रहे, दूसरों के हक़ का एहतिराम करे, और कभी किसी की चीज़ को ज़बरदस्ती या चालाकी से हड़पने की कोशिश न करे।

और यह भी याद रखें — अल्लाह तआला अपने नबी को भी इम्तिहान में डालता है तो उन्हें और ऊँचा उठाता है। हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने इस मामले में तौबा की, अल्लाह से माफ़ी माँगी, और अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया और उन्हें और भी बड़ा मर्तबा अता किया। यह हमारे लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है — जब तक हम सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ़ पलटें, अल्लाह हमें माफ़ करने वाला और रहमतों से नवाज़ने वाला है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने अंदर की लालच, हवस और दूसरों पर ज़ुल्म करने की आदतों को छोड़ें, और इंसाफ़, सब्र और क़नाअत (संतोष) को अपनी ज़िंदगी का शिआर बनाएँ।



📜 आयत 21-25 — साद

21۞ وَهَلْ أَتَاكَ نَبَأُ الْخَصْمِ إِذْ تَسَوَّرُوا الْمِحْرَابَ
(ऐ रसूल) क्या तुम तक उन दावेदारों की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह हुजरे (इबादत) की दीवार फाँद पडे
22إِذْ دَخَلُوا عَلَىٰ دَاوُودَ فَفَزِعَ مِنْهُمْ ۖ قَالُوا لَا تَخَفْ ۖ خَصْمَانِ بَغَىٰ بَعْضُنَا عَلَىٰ بَعْضٍ فَاحْكُم بَيْنَنَا بِالْحَقِّ وَلَا تُشْطِطْ وَاهْدِنَا إِلَىٰ سَوَاءِ الصِّرَاطِ
(और) जब दाऊद के पास आ खड़े हुए तो वह उनसे डर गए उन लोगों ने कहा कि आप डरें नहीं (हम दोनों) एक मुक़द्दमें के फ़रीकैन हैं कि हम में से एक ने दूसरे पर ज्यादती की है तो आप हमारे दरमियान ठीक-ठीक फैसला कर दीजिए और इन्साफ से ने गुज़रिये और हमें सीधी राह दिखा दीजिए
23إِنَّ هَٰذَا أَخِي لَهُ تِسْعٌ وَتِسْعُونَ نَعْجَةً وَلِيَ نَعْجَةٌ وَاحِدَةٌ فَقَالَ أَكْفِلْنِيهَا وَعَزَّنِي فِي الْخِطَابِ
(मुराद ये हैं कि) ये (शख्स) मेरा भाई है और उसके पास निनान्नवे दुम्बियाँ हैं और मेरे पास सिर्फ एक दुम्बी है उस पर भी ये मुझसे कहता है कि ये दुम्बी भी मुझी को दे दें और बातचीत में मुझ पर सख्ती करता है
24قَالَ لَقَدْ ظَلَمَكَ بِسُؤَالِ نَعْجَتِكَ إِلَىٰ نِعَاجِهِ ۖ وَإِنَّ كَثِيرًا مِّنَ الْخُلَطَاءِ لَيَبْغِي بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَقَلِيلٌ مَّا هُمْ ۗ وَظَنَّ دَاوُودُ أَنَّمَا فَتَنَّاهُ فَاسْتَغْفَرَ رَبَّهُ وَخَرَّ رَاكِعًا وَأَنَابَ ۩
दाऊद ने (बग़ैर इसके कि मुदा आलैह से कुछ पूछें) कह दिया कि ये जो तेरी दुम्बी माँग कर अपनी दुम्बियों में मिलाना चाहता है तो ये तुझ पर ज़ुल्म करता है और अक्सर शुरका (की) यकीनन (ये हालत है कि) एक दूसरे पर जुल्म किया करते हैं मगर जिन लोगों ने (सच्चे दिल से) ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए (वह ऐसा नहीं करते) और ऐसे लोग बहुत ही कम हैं (ये सुनकर दोनों चल दिए) और अब दाऊद ने समझा कि हमने उनका इमितेहान लिया (और वह ना कामयाब रहे) फिर तो अपने परवरदिगार से बख्शिश की दुआ माँगने लगे और सजदे में गिर पड़े और (मेरी) तरफ रूजू की (24) (सजदा)
25فَغَفَرْنَا لَهُ ذَٰلِكَ ۖ وَإِنَّ لَهُ عِندَنَا لَزُلْفَىٰ وَحُسْنَ مَآبٍ
तो हमने उनकी वह ग़लती माफ कर दी और इसमें शक नहीं कि हमारी बारगाह में उनका तक़र्रुब और अन्जाम अच्छा हुआ
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अनुवाद — साद 23

सूरा साद आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुराद ये हैं कि) ये (शख्स) मेरा भाई है और…

सूरा आयत 23/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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