साद · 22/88
अनुवाद उच्चारण — साद
إِذْ دَخَلُوا عَلَىٰ دَاوُودَ فَفَزِعَ مِنْهُمْ ۖ قَالُوا لَا تَخَفْ ۖ خَصْمَانِ بَغَىٰ بَعْضُنَا عَلَىٰ بَعْضٍ فَاحْكُم بَيْنَنَا بِالْحَقِّ وَلَا تُشْطِطْ وَاهْدِنَا إِلَىٰ سَوَاءِ الصِّرَاطِ ۝٢٢
Iz dakhaloo `alaa Daawooda fafazi`a minhum qaaloo la takhaf khasmaani baghaa ba`dunaa `alaa ba`din fahkum bainanaaa bilhaqqi wa laa tushtit wahdinaaa ilaa Sawaaa`is Siraat
📖 हिंदी अर्थ
(और) जब दाऊद के पास आ खड़े हुए तो वह उनसे डर गए उन लोगों ने कहा कि आप डरें नहीं (हम दोनों) एक मुक़द्दमें के फ़रीकैन हैं कि हम में से एक ने दूसरे पर ज्यादती की है तो आप हमारे दरमियान ठीक-ठीक फैसला कर दीजिए और इन्साफ से ने गुज़रिये और हमें सीधी राह दिखा दीजिए
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَصْمَانِ (ख़स्मान): दो झगड़ने वाले पक्ष, दो विरोधी।
  • بَغَى (बग़ा): अत्याचार किया, ज़ुल्म किया, सीमा से आगे बढ़ गया।
  • لَا تُشْطِطْ (ला तुश्तित): फैसले में ज़ुल्म मत करना, इंसाफ़ के रास्ते से न भटकना।
  • سَوَاءِ الصِّرَاطِ (सवाउस सिरात): सीधा और सही रास्ता, न्याय का मार्ग।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की एक अद्भुत घटना से अवगत कराती है। जब वे इबादत के लिए अपने विशेष स्थान (मिहराब) में थे, तो अचानक दो व्यक्ति दीवार फांदकर उनके पास आ पहुँचे। यह आना इतना अप्रत्याशित और असामान्य था कि हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) घबरा गए और उनके मन में ख़ौफ़ पैदा हुआ। यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी, क्योंकि कोई भी व्यक्ति अचानक इस तरह अपने निजी स्थान में घुस आए तो वह चौंक जाता है।

जब उन दोनों ने हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की घबराहट और ख़ौफ़ को महसूस किया, तो उन्होंने तुरंत उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा: "डरिए मत! हम दो झगड़ने वाले पक्ष हैं। हममें से एक ने दूसरे पर ज़ुल्म किया है। हम आपके पास इसलिए आए हैं कि आप हमारे बीच सच्चाई और न्याय के साथ फैसला करें। हम आपसे यह नहीं चाहते कि आप हमारे पक्ष में झुकें या किसी पर ज़ुल्म करें। हम तो बस यह चाहते हैं कि आप हमें सीधे और सही रास्ते की ओर मार्गदर्शन करें।"

यह घटना हमें कई महत्वपूर्ण सबक सिखाती है। पहला यह कि न्याय और इंसाफ़ इस्लाम का मूल सिद्धांत है। चाहे फैसला कितना भी कठिन क्यों न हो, हमें सच्चाई पर अडिग रहना चाहिए और किसी भी तरह के पक्षपात या ज़ुल्म से बचना चाहिए। दूसरा यह कि एक सच्चा इंसान वह है जो न्याय की माँग करे, न कि अपने पक्ष में फैसला कराने की। तीसरा यह कि हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) जैसे महान नबी भी इंसान थे और उनमें स्वाभाविक भावनाएँ थीं, लेकिन उन्होंने अपने ख़ौफ़ के बावजूद न्याय करने का संकल्प किया।

आज के इस दौर में जब हर तरफ़ अत्याचार और नाइंसाफ़ी फैली हुई है, यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमें अपने जीवन के हर पहलू में न्याय को अपनाना चाहिए। चाहे वह पारिवारिक मामले हों, सामाजिक संबंध हों या व्यापारिक लेन-देन। न्याय ही वह चीज़ है जो समाज को शांति और समृद्धि की ओर ले जाती है। और सबसे बड़ी बात यह कि हमें हमेशा अल्लाह से यह दुआ करनी चाहिए कि वह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे, क्योंकि सीधा रास्ता ही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — साद

20وَشَدَدْنَا مُلْكَهُ وَآتَيْنَاهُ الْحِكْمَةَ وَفَصْلَ الْخِطَابِ
और हमने उनकी सल्तनत को मज़बूत कर दिया और हमने उनको हिकमत और बहस के फैसले की कूवत अता फरमायी थी
21۞ وَهَلْ أَتَاكَ نَبَأُ الْخَصْمِ إِذْ تَسَوَّرُوا الْمِحْرَابَ
(ऐ रसूल) क्या तुम तक उन दावेदारों की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह हुजरे (इबादत) की दीवार फाँद पडे
22إِذْ دَخَلُوا عَلَىٰ دَاوُودَ فَفَزِعَ مِنْهُمْ ۖ قَالُوا لَا تَخَفْ ۖ خَصْمَانِ بَغَىٰ بَعْضُنَا عَلَىٰ بَعْضٍ فَاحْكُم بَيْنَنَا بِالْحَقِّ وَلَا تُشْطِطْ وَاهْدِنَا إِلَىٰ سَوَاءِ الصِّرَاطِ
(और) जब दाऊद के पास आ खड़े हुए तो वह उनसे डर गए उन लोगों ने कहा कि आप डरें नहीं (हम दोनों) एक मुक़द्दमें के फ़रीकैन हैं कि हम में से एक ने दूसरे पर ज्यादती की है तो आप हमारे दरमियान ठीक-ठीक फैसला कर दीजिए और इन्साफ से ने गुज़रिये और हमें सीधी राह दिखा दीजिए
23إِنَّ هَٰذَا أَخِي لَهُ تِسْعٌ وَتِسْعُونَ نَعْجَةً وَلِيَ نَعْجَةٌ وَاحِدَةٌ فَقَالَ أَكْفِلْنِيهَا وَعَزَّنِي فِي الْخِطَابِ
(मुराद ये हैं कि) ये (शख्स) मेरा भाई है और उसके पास निनान्नवे दुम्बियाँ हैं और मेरे पास सिर्फ एक दुम्बी है उस पर भी ये मुझसे कहता है कि ये दुम्बी भी मुझी को दे दें और बातचीत में मुझ पर सख्ती करता है
24قَالَ لَقَدْ ظَلَمَكَ بِسُؤَالِ نَعْجَتِكَ إِلَىٰ نِعَاجِهِ ۖ وَإِنَّ كَثِيرًا مِّنَ الْخُلَطَاءِ لَيَبْغِي بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَقَلِيلٌ مَّا هُمْ ۗ وَظَنَّ دَاوُودُ أَنَّمَا فَتَنَّاهُ فَاسْتَغْفَرَ رَبَّهُ وَخَرَّ رَاكِعًا وَأَنَابَ ۩
दाऊद ने (बग़ैर इसके कि मुदा आलैह से कुछ पूछें) कह दिया कि ये जो तेरी दुम्बी माँग कर अपनी दुम्बियों में मिलाना चाहता है तो ये तुझ पर ज़ुल्म करता है और अक्सर शुरका (की) यकीनन (ये हालत है कि) एक दूसरे पर जुल्म किया करते हैं मगर जिन लोगों ने (सच्चे दिल से) ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए (वह ऐसा नहीं करते) और ऐसे लोग बहुत ही कम हैं (ये सुनकर दोनों चल दिए) और अब दाऊद ने समझा कि हमने उनका इमितेहान लिया (और वह ना कामयाब रहे) फिर तो अपने परवरदिगार से बख्शिश की दुआ माँगने लगे और सजदे में गिर पड़े और (मेरी) तरफ रूजू की (24) (सजदा)
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Tuesday, August 18, 2026

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