Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَحْبَبْتُ حُبَّ الْخَيْرِ: मैंने माल (धन-दौलत) के प्रेम को प्राथमिकता दी।
- عَن ذِكْرِ رَبِّي: अपने रब की याद (नमाज़) से हटकर।
- تَوَارَتْ بِالْحِجَابِ: (सूर्य) पर्दे (अंधेरे) में छिप गया, यानी डूब गया।
विस्तृत व्याख्या:
यह आयत हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के उस प्रसिद्ध प्रसंग से संबंधित है जब उनके सामने शुद्ध नस्ल के बेहतरीन घोड़े पेश किए गए। वे घोड़ों को देखने में इस कदर मशगूल हो गए कि उन्हें अस्र (शाम) की नमाज़ का ध्यान ही नहीं रहा। जब सूरज डूब गया और उन्हें अपनी इस कसूर का एहसास हुआ, तो उन्होंने अफ़सोस और पश्चाताप के साथ कहा: "मैंने अपने रब की याद (नमाज़) की बजाय इस माल (घोड़ों) के प्रेम को प्राथमिकता दे दी, यहाँ तक कि सूरज पर्दे में छिप गया।"
इसके बाद उन्होंने तुरंत तौबा करते हुए उन घोड़ों को वापस लाने का आदेश दिया और अपनी गलती की भरपाई के लिए उनकी टांगों और गर्दनों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया — यानी उन्होंने उन्हें अल्लाह की राह में क़ुर्बान कर दिया। यह एक बहुत बड़ा सबक है कि जब इंसान से कोई भूल हो जाए, तो उसे तुरंत अल्लाह की ओर रुजू करना चाहिए और अपनी गलती का एहसास करके सुधार करना चाहिए।
दीनी और दावती पहलू:
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि दुनिया की चीज़ें — चाहे वो दौलत हो, घोड़े हों, या कोई और चीज़ — कभी भी हमें अल्लाह की इबादत और उसकी याद से ग़ाफ़िल नहीं करनी चाहिए। हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) जैसे नबी को जब इस बात का एहसास हुआ, तो उन्होंने फौरन तौबा की और अल्लाह से माफ़ी मांगी। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि हम अपनी नमाज़ों को समय पर अदा करें और किसी भी दुनियावी मशगले को अपनी इबादत पर हावी न होने दें। अल्लाह तआला अपने बंदों से मुहब्बत करता है और जब वे अपनी गलती पर पश्चाताप करते हैं, तो अल्लाह उन्हें माफ़ कर देता है और उनके दर्जे बुलंद करता है। याद रखें, दुनिया की हर चीज़ फ़ानी है, लेकिन अल्लाह की याद और उसकी इबादत ही असली कामयाबी का ज़रिया है।
📜 आयत 30-34 — सूरा साद
अनुवाद — साद 32
सूरा साद आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो देखने में उलझे के नवाफिल में देर हो गयी…सूरा आयत 32/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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