साद · 32/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
فَقَالَ إِنِّي أَحْبَبْتُ حُبَّ الْخَيْرِ عَن ذِكْرِ رَبِّي حَتَّىٰ تَوَارَتْ بِالْحِجَابِ ۝٣٢
Faqaala inneee ahbabtu hubbal khairi `an zikri Rabbee hattaa tawaarat bilhijaab
📖 हिंदी अर्थ
तो देखने में उलझे के नवाफिल में देर हो गयी जब याद आया तो बोले कि मैंने अपने परवरदिगार की याद पर माल की उलफ़त को तरजीह दी यहाँ तक कि आफ़ताब (मग़रिब के) पर्दे में छुप गया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَحْبَبْتُ حُبَّ الْخَيْرِ: मैंने माल (धन-दौलत) के प्रेम को प्राथमिकता दी।
  • عَن ذِكْرِ رَبِّي: अपने रब की याद (नमाज़) से हटकर।
  • تَوَارَتْ بِالْحِجَابِ: (सूर्य) पर्दे (अंधेरे) में छिप गया, यानी डूब गया।

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के उस प्रसिद्ध प्रसंग से संबंधित है जब उनके सामने शुद्ध नस्ल के बेहतरीन घोड़े पेश किए गए। वे घोड़ों को देखने में इस कदर मशगूल हो गए कि उन्हें अस्र (शाम) की नमाज़ का ध्यान ही नहीं रहा। जब सूरज डूब गया और उन्हें अपनी इस कसूर का एहसास हुआ, तो उन्होंने अफ़सोस और पश्चाताप के साथ कहा: "मैंने अपने रब की याद (नमाज़) की बजाय इस माल (घोड़ों) के प्रेम को प्राथमिकता दे दी, यहाँ तक कि सूरज पर्दे में छिप गया।"

इसके बाद उन्होंने तुरंत तौबा करते हुए उन घोड़ों को वापस लाने का आदेश दिया और अपनी गलती की भरपाई के लिए उनकी टांगों और गर्दनों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया — यानी उन्होंने उन्हें अल्लाह की राह में क़ुर्बान कर दिया। यह एक बहुत बड़ा सबक है कि जब इंसान से कोई भूल हो जाए, तो उसे तुरंत अल्लाह की ओर रुजू करना चाहिए और अपनी गलती का एहसास करके सुधार करना चाहिए।

दीनी और दावती पहलू:

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि दुनिया की चीज़ें — चाहे वो दौलत हो, घोड़े हों, या कोई और चीज़ — कभी भी हमें अल्लाह की इबादत और उसकी याद से ग़ाफ़िल नहीं करनी चाहिए। हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) जैसे नबी को जब इस बात का एहसास हुआ, तो उन्होंने फौरन तौबा की और अल्लाह से माफ़ी मांगी। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है कि हम अपनी नमाज़ों को समय पर अदा करें और किसी भी दुनियावी मशगले को अपनी इबादत पर हावी न होने दें। अल्लाह तआला अपने बंदों से मुहब्बत करता है और जब वे अपनी गलती पर पश्चाताप करते हैं, तो अल्लाह उन्हें माफ़ कर देता है और उनके दर्जे बुलंद करता है। याद रखें, दुनिया की हर चीज़ फ़ानी है, लेकिन अल्लाह की याद और उसकी इबादत ही असली कामयाबी का ज़रिया है।



📜 आयत 30-34 — सूरा साद

30وَوَهَبْنَا لِدَاوُودَ سُلَيْمَانَ ۚ نِعْمَ الْعَبْدُ ۖ إِنَّهُ أَوَّابٌ
और हमने दाऊद को सुलेमान (सा बेटा) अता किया (सुलेमान भी) क्या अच्छे बन्दे थे
31إِذْ عُرِضَ عَلَيْهِ بِالْعَشِيِّ الصَّافِنَاتُ الْجِيَادُ
बेशक वह हमारी तरफ रूजू करने वाले थे इत्तोफाक़न एक दफ़ा तीसरे पहर को ख़ासे के असील घोड़े उनके सामने पेश किए गए
32فَقَالَ إِنِّي أَحْبَبْتُ حُبَّ الْخَيْرِ عَن ذِكْرِ رَبِّي حَتَّىٰ تَوَارَتْ بِالْحِجَابِ
तो देखने में उलझे के नवाफिल में देर हो गयी जब याद आया तो बोले कि मैंने अपने परवरदिगार की याद पर माल की उलफ़त को तरजीह दी यहाँ तक कि आफ़ताब (मग़रिब के) पर्दे में छुप गया
33رُدُّوهَا عَلَيَّ ۖ فَطَفِقَ مَسْحًا بِالسُّوقِ وَالْأَعْنَاقِ
(तो बोले अच्छा) इन घोड़ों को मेरे पास वापस लाओ (जब आए) तो (देर के कफ्फ़ारा में) घोड़ों की टाँगों और गर्दनों पर हाथ फेर (काट) ने लगे
34وَلَقَدْ فَتَنَّا سُلَيْمَانَ وَأَلْقَيْنَا عَلَىٰ كُرْسِيِّهِ جَسَدًا ثُمَّ أَنَابَ
और हमने सुलेमान का इम्तेहान लिया और उनके तख्त पर एक बेजान धड़ लाकर गिरा दिया
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
32आयत

अनुवाद — साद 32

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Friday, October 2, 2026

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