Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الصَّافِنَاتُ: वे घोड़े जो तीन पैरों पर खड़े हों और चौथे पैर (अगले पैर) को मोड़कर रखें — यह उत्तम और तेज़ नस्ल के घोड़ों की विशेषता है।
- الْجِيَادُ: "जियाद" (جواد) का बहुवचन — उत्तम, तेज़ और चुने हुए घोड़े, जो रुकने पर स्थिर रहें और दौड़ने में सबसे आगे हों।
- بِالْعَشِيِّ: दोपहर के बाद का समय (अस्र का वक्त)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यहाँ अल्लाह तआला हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम के उस दृश्य का ज़िक्र कर रहे हैं, जब उनके सामने शाम के समय (अस्र के बाद) उत्तम नस्ल के तेज़ रफ़्तार घोड़े पेश किए गए। ये घोड़े अपनी खूबियों में इस कदर मशहूर थे कि तीन पैरों पर खड़े होकर चौथा पैर उठा लेते थे — यह उनकी चुस्ती, ताक़त और नज़ाकत की निशानी थी। हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने जिहाद के इरादे से इन घोड़ों को देखने का आदेश दिया था, और यह सिलसिला इतना लंबा चला कि सूरज डूब गया।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाते हैं कि दुनिया की चीज़ें — चाहे वो कितनी भी कीमती और शानदार हों — उनका असली मक़सद अल्लाह की राह में इस्तेमाल होना चाहिए। हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम के पास जो घोड़े थे, वे सिर्फ़ दिखावे या शौक़ के लिए नहीं थे, बल्कि अल्लाह की राह में जिहाद के लिए थे। यह हमारे लिए एक बड़ा सबक़ है कि हम अपनी नेअमतों (अल्लाह की दी हुई चीज़ों) को अल्लाह की राह में लगाएँ, न कि सिर्फ़ दुनियावी मज़े और शौक़ के लिए।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के नबी भी दुनिया की अच्छी चीज़ों से लाभ उठा सकते हैं, लेकिन उनका दिल हमेशा अल्लाह की याद और उसकी राह में होता है। जब हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने घोड़ों को देखा और सूरज डूब गया, तो उन्हें अल्लाह की याद आई — यह दिखाता है कि एक सच्चे मोमिन का दिल हर हाल में अल्लाह से जुड़ा रहता है, चाहे वह किसी भी काम में मशग़ूल हो।
इस क़िस्से से हमें यह सीख मिलती है कि हम अपनी ज़िंदगी की हर नेअमत — चाहे वह दौलत हो, औलाद हो, या कोई और चीज़ — को अल्लाह की राह में इस्तेमाल करें। अगर हम अपनी चीज़ों को अल्लाह की राह में लगाएँगे, तो अल्लाह हमें और बरकत देगा। और जो चीज़ें हमें अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल करें, उनसे हमें बचना चाहिए, क्योंकि असली कामयाबी अल्लाह की याद और उसकी राह में है।
📜 आयत 29-33 — सूरा साद
अनुवाद — साद 31
सूरा साद आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक वह हमारी तरफ रूजू करने वाले थे इत्तोफाक़न एक…सूरा आयत 31/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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