साद · 33/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
رُدُّوهَا عَلَيَّ ۖ فَطَفِقَ مَسْحًا بِالسُّوقِ وَالْأَعْنَاقِ ۝٣٣
Ruddoohaa `alaiya fatafiqa masham bissooqi wal a`naaq
📖 हिंदी अर्थ
(तो बोले अच्छा) इन घोड़ों को मेरे पास वापस लाओ (जब आए) तो (देर के कफ्फ़ारा में) घोड़ों की टाँगों और गर्दनों पर हाथ फेर (काट) ने लगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رُدُّوهَا: उन्हें (घोड़ों को) मेरे पास वापस लाओ।
  • فَطَفِقَ: वह शुरू हो गए / लग गए।
  • مَسْحًا: यहाँ इसका अर्थ है काटना या ज़बह करना (तलवार से)।
  • بِالسُّوقِ وَالْأَعْنَاقِ: पिंडलियों (टांगों) और गर्दनों पर।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब सूरज डूब गया और घोड़ों की परेड समाप्त हुई, तो हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) को एहसास हुआ कि उन्होंने घोड़ों की सुंदरता और उनकी चमक-दमक में इतना समय बिता दिया कि उनका ध्यान अल्लाह की याद और उसकी इबादत से हट गया। यह कोई साधारण बात नहीं थी, बल्कि एक नबी के लिए यह एक गहरी आत्म-समीक्षा का क्षण था। उन्होंने तुरंत अपनी गलती को महसूस किया और उसे सुधारने का फैसला किया।

उन्होंने कहा: "इन घोड़ों को मेरे पास वापस लाओ!" जब घोड़ों को वापस लाया गया, तो उन्होंने अपनी तलवार से उनकी टांगों और गर्दनों को काटना शुरू कर दिया। यह एक बहुत बड़ी कुर्बानी थी, क्योंकि ये घोड़े बेशकीमती थे और उनकी सेना की ताकत का प्रतीक थे। लेकिन सुलेमान (अलैहिस्सलाम) ने यह दिखा दिया कि अल्लाह की याद और उसकी रज़ा से बढ़कर कोई चीज़ नहीं हो सकती। उन्होंने उन चीज़ों को ही खत्म कर दिया जो उन्हें अल्लाह की याद से गाफिल कर गई थीं।

यह घटना हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है। हमें भी अपनी ज़िंदगी में देखना चाहिए कि कौन सी चीज़ें हमें अल्लाह की याद से दूर कर रही हैं। चाहे वह दौलत हो, शोहरत हो, या कोई और दुनियावी चीज़—अगर वह हमें अल्लाह से दूर करती है, तो हमें उसे छोड़ने का हौसला करना चाहिए। यह कुर्बानी भले ही दर्दनाक हो, लेकिन अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रज़ा के आगे यह कुछ भी नहीं है।

याद रखिए, यह दुनिया की चीज़ें फ़ानी हैं, लेकिन अल्लाह की याद और उसकी इबादत ही असली सुकून और कामयाबी का ज़रिया है। जब हम अल्लाह की याद को अपनी ज़िंदगी का मरकज़ बनाते हैं, तो अल्लाह हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई देता है।



📜 आयत 31-35 — सूरा साद

31إِذْ عُرِضَ عَلَيْهِ بِالْعَشِيِّ الصَّافِنَاتُ الْجِيَادُ
बेशक वह हमारी तरफ रूजू करने वाले थे इत्तोफाक़न एक दफ़ा तीसरे पहर को ख़ासे के असील घोड़े उनके सामने पेश किए गए
32فَقَالَ إِنِّي أَحْبَبْتُ حُبَّ الْخَيْرِ عَن ذِكْرِ رَبِّي حَتَّىٰ تَوَارَتْ بِالْحِجَابِ
तो देखने में उलझे के नवाफिल में देर हो गयी जब याद आया तो बोले कि मैंने अपने परवरदिगार की याद पर माल की उलफ़त को तरजीह दी यहाँ तक कि आफ़ताब (मग़रिब के) पर्दे में छुप गया
33رُدُّوهَا عَلَيَّ ۖ فَطَفِقَ مَسْحًا بِالسُّوقِ وَالْأَعْنَاقِ
(तो बोले अच्छा) इन घोड़ों को मेरे पास वापस लाओ (जब आए) तो (देर के कफ्फ़ारा में) घोड़ों की टाँगों और गर्दनों पर हाथ फेर (काट) ने लगे
34وَلَقَدْ فَتَنَّا سُلَيْمَانَ وَأَلْقَيْنَا عَلَىٰ كُرْسِيِّهِ جَسَدًا ثُمَّ أَنَابَ
और हमने सुलेमान का इम्तेहान लिया और उनके तख्त पर एक बेजान धड़ लाकर गिरा दिया
35قَالَ رَبِّ اغْفِرْ لِي وَهَبْ لِي مُلْكًا لَّا يَنبَغِي لِأَحَدٍ مِّن بَعْدِي ۖ إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ
फिर (सुलेमान ने मेरी तरफ) रूजू की (और) कहा परवरदिगार मुझे बख्श दे और मुझे वह मुल्क अता फरमा जो मेरे बाद किसी के वास्ते शायाँह न हो इसमें तो शक नहीं कि तू बड़ा बख्शने वाला है
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
33आयत

अनुवाद — साद 33

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Thursday, October 1, 2026

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