Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ضِغْثًا: सूखी घास या टहनियों का गुच्छा, जिसमें कई छड़ें या शाखाएँ एक साथ हों।
- فَاضْرِب بِّهِ: उस गुच्छे से मारो।
- وَلَا تَحْنَثْ: अपनी क़सम न तोड़ो, यानी क़सम को पूरा करो।
- أَوَّابٌ: बार-बार अल्लाह की ओर रुजू करने वाला, बहुत अधिक तौबा करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) के उस क़िस्से से संबंधित है जब वे सख्त बीमारी में مبتلا थे। उनकी पत्नी एक नेक और वफादार औरत थीं, जो उनकी सेवा करती रहीं। एक बार किसी मामूली बात पर हज़रत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) को उनसे गुस्सा आ गया और उन्होंने क़सम खाई कि अगर अल्लाह ने उन्हें शिफा दी तो वे उन्हें सौ कोड़े मारेंगे। जब अल्लाह ने उन्हें पूरी तरह स्वस्थ कर दिया, तो अल्लाह ने उन्हें एक आसान रास्ता दिखाया—उनसे कहा गया कि अपने हाथ में सूखी घास या पतली टहनियों का एक गुच्छा लो (जिसमें सौ से अधिक छड़ें हों) और उससे उन्हें एक ही बार में मार दो। इस तरह उनकी क़सम पूरी हो जाएगी और उन्हें क़सम तोड़ने का गुनाह भी नहीं होगा। यह अल्लाह की ओर से एक रहमत और आसानी थी, क्योंकि उनकी पत्नी सच्ची और नेक थीं, और अल्लाह उन दोनों पर मेहरबान था।
अल्लाह ने इस घटना के बाद हज़रत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) की तारीफ़ करते हुए फ़रमाया कि हमने उन्हें सब्र करने वाला पाया। उन्होंने अपनी बीमारी और मुसीबतों पर कभी शिकायत नहीं की, बल्कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखा। उनका यह कहना कि "मुझे शैतान ने छू लिया है" कोई बेसब्री या शिकायत नहीं थी, बल्कि यह अल्लाह से अपनी दुखती रग की दरख्वास्त थी। अल्लाह ने उन्हें "निअ्मल अब्द" (कितना अच्छा बंदा है) कहकर सराहा, क्योंकि वे बार-बार अल्लाह की ओर रुजू करने वाले, तौबा करने वाले और हर हाल में अल्लाह के शुक्रगुज़ार थे।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें कई सबक मिलते हैं। पहला यह कि अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है और हर मुश्किल में निकलने का रास्ता निकालता है। दूसरा यह कि सब्र और अल्लाह पर भरोसा करने का इनाम अल्लाह देता है। तीसरा यह कि क़सम को पूरा करना ज़रूरी है, लेकिन अल्लाह ने जहाँ आसानी दी है, उसे क़बूल करना चाहिए। हज़रत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) की तरह हमें भी हर हाल में अल्लाह की तरफ रुजू करना चाहिए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो सब्र करते हैं और उसकी तरफ लौटते रहते हैं। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और हिकमत पर भरोसा रखें, क्योंकि वह हर मुसीबत का हल निकालता है।
📜 आयत 42-46 — सूरा साद
अनुवाद — साद 44
सूरा साद आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अक्लमंदों के लिए इबरत व नसीहत (क़रार दी) और…सूरा आयत 44/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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