साद · 43/88
अनुवाद उच्चारण — साद
وَوَهَبْنَا لَهُ أَهْلَهُ وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ رَحْمَةً مِّنَّا وَذِكْرَىٰ لِأُولِي الْأَلْبَابِ ۝٤٣
Wa wahabnaa lahoo ahlahoo wa mislahum ma`ahum rahmatam minna wa zikraa li ulil albaab
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उनको और उनके लड़के वाले और उनके साथ उतने ही और अपनी ख़ास मेहरबानी से अता किए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَوَهَبْنَا لَهُ أَهْلَهُ – और हमने उसे उसका परिवार (पुनः) प्रदान किया।
  • وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ – और उनके साथ उनके समान (और भी उतने ही)।
  • رَحْمَةً مِّنَّا – अपनी ओर से दया (और कृपा) के रूप में।
  • وَذِكْرَىٰ لِأُولِي الْأَلْبَابِ – और बुद्धिमान लोगों के लिए एक सीख (नसीहत) के तौर पर।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी अय्यूब (अलैहिस्सलाम) की दुआ क़बूल की और उन पर से वह भारी मुसीबत हटा दी जो उनके शरीर और माल पर आई थी। फिर अल्लाह ने उन्हें उनका परिवार लौटा दिया — यानी उनकी पत्नी और बच्चे — और उनके साथ उतने ही और (बच्चे और नाती-पोते) भी अता फ़रमाए। यह सब अल्लाह की ओर से उन पर विशेष दया और करम था, उनके सब्र और धैर्य का इनाम था। अल्लाह ने यह इसलिए किया ताकि यह घटना अक्लमंद लोगों के लिए एक सबक़ और नसीहत बने कि सब्र का अंजाम हमेशा खैर और आसानी होता है, और मुसीबत के बाद राहत ज़रूर आती है।

यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखाते हैं कि जब बंदा मुसीबत में सब्र करता है और अल्लाह से ही उम्मीद रखता है, तो अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता। अय्यूब (अलैहिस्सलाम) की यह दास्तान हमारे लिए रोशनी का ज़रिया है — चाहे हालात कितने भी खराब हों, अल्लाह की रहमत उस बंदे के साथ होती है जो सब्र करता है। यही वजह है कि अल्लाह ने इस घटना को "बुद्धिमानों के लिए याददिहानी" कहा, क्योंकि अक्लमंद वही है जो इससे सबक़ ले और अपने जीवन में सब्र और शुक्र को अपनाए।

यह प्यारा पैग़ाम हमें बताता है कि अल्लाह की रहमत उसके नेक बंदों के साथ हमेशा होती है, और मुसीबत के बाद की राहत उसकी ओर से एक तोहफ़ा है। हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि वही है जो दुख को सुख में बदलने की क़ुदरत रखता है। यह सीख हमारे दिलों को रोशन करती है और हमें अल्लाह की तरफ़ और करीब लाती है।



📜 आयत 41-45 — साद

41وَاذْكُرْ عَبْدَنَا أَيُّوبَ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الشَّيْطَانُ بِنُصْبٍ وَعَذَابٍ
और (ऐ रसूल) हमारे (ख़ास) बन्दे अय्यूब को याद करो जब उन्होंने अपने परवरगिार से फरियाद की कि मुझको शैतान ने बहुत अज़ीयत और तकलीफ पहुँचा रखी है
42ارْكُضْ بِرِجْلِكَ ۖ هَٰذَا مُغْتَسَلٌ بَارِدٌ وَشَرَابٌ
तो हमने कहा कि अपने पाँव से (ज़मीन को) ठुकरा दो और चश्मा निकाला तो हमने कहा (ऐ अय्यूब) तुम्हारे नहाने और पीने के वास्ते ये ठन्डा पानी (हाज़िर) है
43وَوَهَبْنَا لَهُ أَهْلَهُ وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ رَحْمَةً مِّنَّا وَذِكْرَىٰ لِأُولِي الْأَلْبَابِ
और हमने उनको और उनके लड़के वाले और उनके साथ उतने ही और अपनी ख़ास मेहरबानी से अता किए
44وَخُذْ بِيَدِكَ ضِغْثًا فَاضْرِب بِّهِ وَلَا تَحْنَثْ ۗ إِنَّا وَجَدْنَاهُ صَابِرًا ۚ نِّعْمَ الْعَبْدُ ۖ إِنَّهُ أَوَّابٌ
और अक्लमंदों के लिए इबरत व नसीहत (क़रार दी) और हमने कहा ऐ अय्यूब तुम अपने हाथ से सींको का मट्ठा लो (और उससे अपनी बीवी को) मारो अपनी क़सम में झूठे न बनो हमने कहा अय्यूब को यक़ीनन साबिर पाया वह क्या अच्छे बन्दे थे
45وَاذْكُرْ عِبَادَنَا إِبْرَاهِيمَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ أُولِي الْأَيْدِي وَالْأَبْصَارِ
बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े झुकने वाले थे और (ऐ रसूल) हमारे बन्दों में इब्राहीम और इसहाक़ और बेशक वह (हमारी बारगाह में) बड़े झुकने वाले थे और (ऐ रसूल) हमारे बन्दों में इबराहीम और इसहाक़ और याकूब को याद करो जो कुवत और बसीरत वाले थे
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अनुवाद — साद 43

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सूरा आयत 43/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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