अज़-ज़ुमर · 33/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
وَالَّذِي جَاءَ بِالصِّدْقِ وَصَدَّقَ بِهِ ۙ أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُتَّقُونَ ۝٣٣
Wallazee jaaa`a bissidqi wa saddaqa biheee ulaaa`ika humul muttaqoon
📖 हिंदी अर्थ
(ज़रूर है) और याद रखो कि जो शख्स (रसूल) सच्ची बात लेकर आया वह और जिसने उसकी तसदीक़ की यही लोग तो परहेज़गार हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَاءَ بِالصِّدْقِ: सत्य लेकर आया — अर्थात अपने कथन और कर्म में सत्य।
  • صَدَّقَ بِهِ: उस पर ईमान लाया और उसे सत्य माना।
  • الْمُتَّقُونَ: परहेज़गार, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस पवित्र आयत में उन लोगों की प्रशंसा कर रहा है जो सत्य लेकर आए और जिन्होंने उस सत्य की पुष्टि की। यहाँ "सत्य" से मतलब है — तौहीद (अल्लाह की एकता), रिसालत (पैग़म्बरों की सच्चाई) और आख़िरत (प्रलय के दिन) का संदेश। इस सत्य को लेकर आने वालों में सबसे पहले और सबसे अफ़ज़ल हमारे नबी मुहम्मद ﷺ हैं, जिन्होंने अपने कथन, अपने कर्म, अपने चरित्र और अपने पूरे जीवन से इस सत्य को प्रस्तुत किया। उनके बाद सभी नबी और रसूल भी इसी सत्य को लेकर आए।

फिर अल्लाह ने उन लोगों का ज़िक्र किया जिन्होंने इस सत्य को सुना, समझा और उस पर ईमान लाया — यानी उन्होंने न केवल ज़बान से पुष्टि की, बल्कि अपने दिल से उसे सच माना और अपने अमल (कर्मों) से उस पर चले। यही लोग हैं जो सच्चे मुत्तक़ी (परहेज़गार) हैं।

इस आयत में अल्लाह ने बताया कि असली तक़वा (परहेज़गारी) सिर्फ़ नाम या दावे से नहीं होती, बल्कि उसका आधार है — सत्य को पहचानना, उसे मानना और उस पर अमल करना। जो लोग इस राह पर चलते हैं, वही अल्लाह की नज़र में इज़्ज़त वाले हैं, चाहे दुनिया में उनकी सामाजिक हैसियत कुछ भी हो।

इस आयत की रोशनी में हमें यह सीख मिलती है कि हमें सत्य को अपनाना चाहिए, सत्य बोलना चाहिए, सत्य पर चलना चाहिए और सत्य का साथ देना चाहिए। जो लोग ऐसा करते हैं, अल्लाह उन्हें अपने करीब लेता है और उन्हें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी देता है।

आज हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को इस सत्य के अनुसार ढालें — क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह हमें सच्चे मुत्तक़ी बनने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 31-35 — अज़-ज़ुमर

31ثُمَّ إِنَّكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عِندَ رَبِّكُمْ تَخْتَصِمُونَ
और ये लोग भी यक़ीनन मरने वाले हैं फिर तुम लोग क़यामत के दिन अपने परवरदिगार की बारगाह में बाहम झगड़ोगे
32۞ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن كَذَبَ عَلَى اللَّهِ وَكَذَّبَ بِالصِّدْقِ إِذْ جَاءَهُ ۚ أَلَيْسَ فِي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِّلْكَافِرِينَ
तो इससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो ख़ुदा पर झूठ (तूफान) बाँधे और जब उसके पास सच्ची बात आए तो उसको झुठला दे क्या जहन्नुम में कााफिरों का ठिकाना नहीं है
33وَالَّذِي جَاءَ بِالصِّدْقِ وَصَدَّقَ بِهِ ۙ أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُتَّقُونَ
(ज़रूर है) और याद रखो कि जो शख्स (रसूल) सच्ची बात लेकर आया वह और जिसने उसकी तसदीक़ की यही लोग तो परहेज़गार हैं
34لَهُم مَّا يَشَاءُونَ عِندَ رَبِّهِمْ ۚ ذَٰلِكَ جَزَاءُ الْمُحْسِنِينَ
ये लोग जो चाहेंगे उनके लिए परवर दिगार के पास (मौजूद) है, ये नेकी करने वालों की जज़ाए ख़ैर है
35لِيُكَفِّرَ اللَّهُ عَنْهُمْ أَسْوَأَ الَّذِي عَمِلُوا وَيَجْزِيَهُمْ أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ الَّذِي كَانُوا يَعْمَلُونَ
ताकि ख़ुदा उन लोगों की बुराइयों को जो उन्होने की हैं दूर कर दे और उनके अच्छे कामों के एवज़ जो वह कर चुके थे उसका अज्र (सवाब) अता फरमाए
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
33आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 33

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Tuesday, August 18, 2026

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