अज़-ज़ुमर · 32/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
۞ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن كَذَبَ عَلَى اللَّهِ وَكَذَّبَ بِالصِّدْقِ إِذْ جَاءَهُ ۚ أَلَيْسَ فِي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِّلْكَافِرِينَ ۝٣٢
Faman azlamu mimman kazaba `alal laahi wa kazzaba bissidqi iz jaaa`ah; alaisa fee Jahannama maswal lilkaafir
📖 हिंदी अर्थ
तो इससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो ख़ुदा पर झूठ (तूफान) बाँधे और जब उसके पास सच्ची बात आए तो उसको झुठला दे क्या जहन्नुम में कााफिरों का ठिकाना नहीं है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَبَ عَلَى اللَّهِ: अल्लाह पर झूठ बोलना, यानी उसके बारे में ऐसी बातें कहना जो उसके लिए उचित नहीं, जैसे उसका कोई साझीदार, पत्नी या संतान होना।
  • بِالصِّدْقِ: उस सत्य (कुरआन) को जो पैगंबर मुहम्मद ﷺ पर उतारा गया।
  • مَثْوًى: रहने की जगह, निवास स्थान।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला सबसे बड़े ज़ालिम (अत्याचारी) का वर्णन कर रहा है। फ़रमाता है: उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी और कौन हो सकता है जो अल्लाह पर झूठ बोले — यानी उसके बारे में ऐसी बातें गढ़े जो उसकी पवित्रता के खिलाफ हों, जैसे यह कहना कि अल्लाह का कोई संतान या साझीदार है, या यह दावा करना कि उसकी ओर से उसे वही (प्रकाशना) आई जबकि उसे कुछ भी नहीं आया। और उससे बढ़कर अत्याचारी वह है जो उस सत्य को झुठलाए जो उसके पास आ चुका है — यानी कुरआन और पैगंबर मुहम्मद ﷺ का संदेश — बिना किसी विचार और चिंतन के, केवल हठ और अहंकार के कारण।

फिर अल्लाह तआला पूछता है: क्या ऐसे काफिरों के लिए जहन्नम (नरक) में रहने की जगह नहीं है? यह एक ऐसा प्रश्न है जो स्वयं ही उत्तर देता है — हाँ, बेशक! जो लोग अल्लाह पर झूठ बोलते हैं और उसके सत्य को झुठलाते हैं, उनका ठिकाना जहन्नम है। यह उनके कुफ्र (इनकार) का स्वाभाविक और न्यायपूर्ण परिणाम है।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने जीवन में किस रास्ते पर चल रहे हैं। अल्लाह तआला ने हमें सत्य (कुरआन) भेजा है, और यह सत्य हमारे लिए रहनुमा (मार्गदर्शक) है। जो व्यक्ति इस सत्य को स्वीकार कर लेता है और उस पर अमल करता है, वह सफलता और जन्नत की ओर बढ़ता है। और जो इसे ठुकरा देता है या अल्लाह के बारे में झूठी बातें फैलाता है, वह अपने लिए जहन्नम का सामान करता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सचेत करती है कि हम अल्लाह के साथ अपने रिश्ते को शुद्ध रखें — उसे एक मानें, उसकी इबादत करें, और उसके भेजे हुए सत्य (कुरआन और सुन्नत) को अपनाएँ। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह तआला हमें सत्य को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 30-34 — अज़-ज़ुमर

30إِنَّكَ مَيِّتٌ وَإِنَّهُم مَّيِّتُونَ
(ऐ रसूल) बेशक तुम भी मरने वाले हो
31ثُمَّ إِنَّكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عِندَ رَبِّكُمْ تَخْتَصِمُونَ
और ये लोग भी यक़ीनन मरने वाले हैं फिर तुम लोग क़यामत के दिन अपने परवरदिगार की बारगाह में बाहम झगड़ोगे
32۞ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن كَذَبَ عَلَى اللَّهِ وَكَذَّبَ بِالصِّدْقِ إِذْ جَاءَهُ ۚ أَلَيْسَ فِي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِّلْكَافِرِينَ
तो इससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो ख़ुदा पर झूठ (तूफान) बाँधे और जब उसके पास सच्ची बात आए तो उसको झुठला दे क्या जहन्नुम में कााफिरों का ठिकाना नहीं है
33وَالَّذِي جَاءَ بِالصِّدْقِ وَصَدَّقَ بِهِ ۙ أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُتَّقُونَ
(ज़रूर है) और याद रखो कि जो शख्स (रसूल) सच्ची बात लेकर आया वह और जिसने उसकी तसदीक़ की यही लोग तो परहेज़गार हैं
34لَهُم مَّا يَشَاءُونَ عِندَ رَبِّهِمْ ۚ ذَٰلِكَ جَزَاءُ الْمُحْسِنِينَ
ये लोग जो चाहेंगे उनके लिए परवर दिगार के पास (मौजूद) है, ये नेकी करने वालों की जज़ाए ख़ैर है
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
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32आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 32

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Tuesday, August 18, 2026

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