अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُكَفَرُ بِهَا – अल्लाह की आयतों के साथ कुफ़्र किया जाए (उन्हें झुठलाया जाए या उनका अपमान किया जाए)।
- يُسْتَهْزَأُ بِهَا – उन आयतों का मज़ाक उड़ाया जाए।
- يَخُوضُوا – वे किसी और बातचीत में लग जाएँ (दूसरी बातें करने लगें)।
- مِثْلُهُمْ – उन्हीं के समान (गुनाह में उनके बराबर)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपनी इस आयत में ईमानवालों को एक बहुत ही अहम नसीहत दी है। वह फ़रमाता है कि ऐ ईमानवालो! अल्लाह ने तुम पर क़ुरआन में यह हुक्म उतारा है कि जब तुम किसी ऐसी महफ़िल (सभा) में बैठे हो जहाँ अल्लाह की आयतों के साथ कुफ़्र किया जा रहा हो – यानी उन्हें झुठलाया जा रहा हो, उनका मज़ाक उड़ाया जा रहा हो या उन्हें बुरा भला कहा जा रहा हो – तो तुम्हें वहाँ से उठ जाना चाहिए और उन लोगों के साथ नहीं बैठना चाहिए। यह हुक्म तब तक है जब तक वे लोग उस बातचीत को छोड़कर किसी और विषय में बात न करने लगें।
अगर तुम उनके साथ बैठे रहे और उनकी उस हरकत को सुनते रहे और उस पर कोई एतराज़ न किया, तो तुम भी उन्हीं के समान हो जाओगे। क्योंकि गुनाह को देखकर ख़ामोश रहना और उस पर राज़ी होना भी गुनाह है। जो शख्स किसी बुराई पर राज़ी होता है, वह उस बुराई को करने वाले के समान ही समझा जाता है। यही वजह है कि अल्लाह ने फ़रमाया: "अगर तुम उनके साथ बैठे रहे तो तुम भी उन्हीं जैसे हो।"
फिर अल्लाह तआला ने एक सख्त चेतावनी दी कि वह मुनाफ़िक़ों (जो दिल में कुफ़्र रखते हैं और ज़ुबान से ईमान का दावा करते हैं) और काफ़िरों को क़यामत के दिन जहन्नम में इकट्ठा करेगा। यानी जो लोग दिल से कुफ़्र पर हैं और जो ज़ाहिरी तौर पर कुफ़्र करते हैं, सबको एक ही जगह – जहन्नम की आग में – डाला जाएगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि एक मुसलमान को अपने ईमान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए और ऐसी जगहों से दूर रहना चाहिए जहाँ अल्लाह के दीन का मज़ाक उड़ाया जाता हो। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपने दोस्तों, साथियों और महफ़िलों का चुनाव सोच-समझकर करें। अगर किसी महफ़िल में दीन का मज़ाक उड़ाया जा रहा हो, तो हमें वहाँ से उठ जाना चाहिए – भले ही वे हमारे करीबी लोग ही क्यों न हों।
याद रखिए, अल्लाह तआला ने हमें इस आयत के ज़रिए एक ऐसी तालीम दी है जो हमारे ईमान की हिफ़ाज़त का ज़रिया है। अगर हम इस पर अमल करेंगे, तो हमारा ईमान सुरक्षित रहेगा और हम अल्लाह की रहमत के हक़दार बनेंगे। और अगर हमने इस हुक्म को नज़रअंदाज़ किया, तो हम खुद को उस आज़ाब के मुस्तहिक़ बना लेंगे जिसका ज़िक्र इस आयत में किया गया है। अल्लाह हम सबको इस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 138-142 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 140
सूरा अन-निसा आयत 140 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुसलमानों) हालॉकि ख़ुदा तुम पर अपनी किताब कुरान में ये…सूरा आयत 140/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 138–142. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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