अन-निसा · 140/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَقَدْ نَزَّلَ عَلَيْكُمْ فِي الْكِتَابِ أَنْ إِذَا سَمِعْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ يُكْفَرُ بِهَا وَيُسْتَهْزَأُ بِهَا فَلَا تَقْعُدُوا مَعَهُمْ حَتَّىٰ يَخُوضُوا فِي حَدِيثٍ غَيْرِهِ ۚ إِنَّكُمْ إِذًا مِّثْلُهُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ جَامِعُ الْمُنَافِقِينَ وَالْكَافِرِينَ فِي جَهَنَّمَ جَمِيعًا ۝١٤٠
Wa qad nazzala `alaikum fil Kitaabi an izaa sami`tum Aayaatil laahi yukfaru bihaa wa yustahza u bihaa falaa taq`udoo ma`ahum hattaa yakhoodoo fee hadeesin ghairih; innakum izam misluhum; innal laaha jaami`ul munaafiqeena wal kaafireena fee jahannama jamee`aa
📖 हिंदी अर्थ
(मुसलमानों) हालॉकि ख़ुदा तुम पर अपनी किताब कुरान में ये हुक्म नाज़िल कर चुका है कि जब तुम सुन लो कि ख़ुदा की आयतों से ईन्कार किया जाता है और उससे मसख़रापन किया जाता है तो तुम उन (कुफ्फ़ार) के साथ मत बैठो यहॉ तक कि वह किसी दूसरी बात में ग़ौर करने लगें वरना तुम भी उस वक्त उनके बराबर हो जाओगे उसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा तमाम मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों को (एक न एक दिन) जहन्नुम में जमा ही करेगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُكَفَرُ بِهَا – अल्लाह की आयतों के साथ कुफ़्र किया जाए (उन्हें झुठलाया जाए या उनका अपमान किया जाए)।
  • يُسْتَهْزَأُ بِهَا – उन आयतों का मज़ाक उड़ाया जाए।
  • يَخُوضُوا – वे किसी और बातचीत में लग जाएँ (दूसरी बातें करने लगें)।
  • مِثْلُهُمْ – उन्हीं के समान (गुनाह में उनके बराबर)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपनी इस आयत में ईमानवालों को एक बहुत ही अहम नसीहत दी है। वह फ़रमाता है कि ऐ ईमानवालो! अल्लाह ने तुम पर क़ुरआन में यह हुक्म उतारा है कि जब तुम किसी ऐसी महफ़िल (सभा) में बैठे हो जहाँ अल्लाह की आयतों के साथ कुफ़्र किया जा रहा हो – यानी उन्हें झुठलाया जा रहा हो, उनका मज़ाक उड़ाया जा रहा हो या उन्हें बुरा भला कहा जा रहा हो – तो तुम्हें वहाँ से उठ जाना चाहिए और उन लोगों के साथ नहीं बैठना चाहिए। यह हुक्म तब तक है जब तक वे लोग उस बातचीत को छोड़कर किसी और विषय में बात न करने लगें।

अगर तुम उनके साथ बैठे रहे और उनकी उस हरकत को सुनते रहे और उस पर कोई एतराज़ न किया, तो तुम भी उन्हीं के समान हो जाओगे। क्योंकि गुनाह को देखकर ख़ामोश रहना और उस पर राज़ी होना भी गुनाह है। जो शख्स किसी बुराई पर राज़ी होता है, वह उस बुराई को करने वाले के समान ही समझा जाता है। यही वजह है कि अल्लाह ने फ़रमाया: "अगर तुम उनके साथ बैठे रहे तो तुम भी उन्हीं जैसे हो।"

फिर अल्लाह तआला ने एक सख्त चेतावनी दी कि वह मुनाफ़िक़ों (जो दिल में कुफ़्र रखते हैं और ज़ुबान से ईमान का दावा करते हैं) और काफ़िरों को क़यामत के दिन जहन्नम में इकट्ठा करेगा। यानी जो लोग दिल से कुफ़्र पर हैं और जो ज़ाहिरी तौर पर कुफ़्र करते हैं, सबको एक ही जगह – जहन्नम की आग में – डाला जाएगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक मुसलमान को अपने ईमान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए और ऐसी जगहों से दूर रहना चाहिए जहाँ अल्लाह के दीन का मज़ाक उड़ाया जाता हो। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपने दोस्तों, साथियों और महफ़िलों का चुनाव सोच-समझकर करें। अगर किसी महफ़िल में दीन का मज़ाक उड़ाया जा रहा हो, तो हमें वहाँ से उठ जाना चाहिए – भले ही वे हमारे करीबी लोग ही क्यों न हों।

याद रखिए, अल्लाह तआला ने हमें इस आयत के ज़रिए एक ऐसी तालीम दी है जो हमारे ईमान की हिफ़ाज़त का ज़रिया है। अगर हम इस पर अमल करेंगे, तो हमारा ईमान सुरक्षित रहेगा और हम अल्लाह की रहमत के हक़दार बनेंगे। और अगर हमने इस हुक्म को नज़रअंदाज़ किया, तो हम खुद को उस आज़ाब के मुस्तहिक़ बना लेंगे जिसका ज़िक्र इस आयत में किया गया है। अल्लाह हम सबको इस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 138-142 — अन-निसा

138بَشِّرِ الْمُنَافِقِينَ بِأَنَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا
(ऐ रसूल) मुनाफ़िक़ों को ख़ुशख़बरी दे दो कि उनके लिए ज़रूर दर्दनाक अज़ाब है
139الَّذِينَ يَتَّخِذُونَ الْكَافِرِينَ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِ الْمُؤْمِنِينَ ۚ أَيَبْتَغُونَ عِندَهُمُ الْعِزَّةَ فَإِنَّ الْعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًا
जो लोग मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को अपना सरपरस्त बनाते हैं क्या उनके पास इज्ज़त (व आबरू) की तलाश करते हैं इज्ज़त सारी बस ख़ुदा ही के लिए ख़ास है
140وَقَدْ نَزَّلَ عَلَيْكُمْ فِي الْكِتَابِ أَنْ إِذَا سَمِعْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ يُكْفَرُ بِهَا وَيُسْتَهْزَأُ بِهَا فَلَا تَقْعُدُوا مَعَهُمْ حَتَّىٰ يَخُوضُوا فِي حَدِيثٍ غَيْرِهِ ۚ إِنَّكُمْ إِذًا مِّثْلُهُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ جَامِعُ الْمُنَافِقِينَ وَالْكَافِرِينَ فِي جَهَنَّمَ جَمِيعًا
(मुसलमानों) हालॉकि ख़ुदा तुम पर अपनी किताब कुरान में ये हुक्म नाज़िल कर चुका है कि जब तुम सुन लो कि ख़ुदा की आयतों से ईन्कार किया जाता है और उससे मसख़रापन किया जाता है तो तुम उन (कुफ्फ़ार) के साथ मत बैठो यहॉ तक कि वह किसी दूसरी बात में ग़ौर करने लगें वरना तुम भी उस वक्त उनके बराबर हो जाओगे उसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा तमाम मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों को (एक न एक दिन) जहन्नुम में जमा ही करेगा
141الَّذِينَ يَتَرَبَّصُونَ بِكُمْ فَإِن كَانَ لَكُمْ فَتْحٌ مِّنَ اللَّهِ قَالُوا أَلَمْ نَكُن مَّعَكُمْ وَإِن كَانَ لِلْكَافِرِينَ نَصِيبٌ قَالُوا أَلَمْ نَسْتَحْوِذْ عَلَيْكُمْ وَنَمْنَعْكُم مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ ۚ فَاللَّهُ يَحْكُمُ بَيْنَكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ وَلَن يَجْعَلَ اللَّهُ لِلْكَافِرِينَ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ سَبِيلًا
(वो मुनाफ़ेकीन) जो तुम्हारे मुन्तज़िर है (कि देखिए फ़तेह होती है या शिकस्त) तो अगर ख़ुदा की तरफ़ से तुम्हें फ़तेह हुई तो कहने लगे कि क्या हम तुम्हारे साथ न थे और अगर (फ़तेह का) हिस्सा काफ़िरों को मिला तो (काफ़िरों के तरफ़दार बनकर) कहते हैं क्या हम तुमपर ग़ालिब न आ गए थे (मगर क़सदन तुमको छोड़ दिया) और तुमको मोमिनीन (के हाथों) से हमने बचाया नहीं था (मुनाफ़िक़ों) क़यामत के दिन तो ख़ुदा तुम्हारे दरमियान फैसला करेगा और ख़ुदा ने काफ़िरों को मोमिनीन पर वर (ऊँचा) रहने की हरगिज़ कोई राह नहीं क़रार दी है
142إِنَّ الْمُنَافِقِينَ يُخَادِعُونَ اللَّهَ وَهُوَ خَادِعُهُمْ وَإِذَا قَامُوا إِلَى الصَّلَاةِ قَامُوا كُسَالَىٰ يُرَاءُونَ النَّاسَ وَلَا يَذْكُرُونَ اللَّهَ إِلَّا قَلِيلًا
बेशक मुनाफ़िक़ीन (अपने ख्याल में) ख़ुदा को फरेब देते हैं हालॉकि ख़ुदा ख़ुद उन्हें धोखा देता है और ये लोग जब नमाज़ पढ़ने खड़े होते हैं तो (बे दिल से) अलकसाए हुए खड़े होते हैं और सिर्फ लोगों को दिखाते हैं और दिल से तो ख़ुदा को कुछ यूं ही सा याद करते हैं
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीRevelation
140आयत

अनुवाद — अन-निसा 140

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Tuesday, August 18, 2026

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