अन-निसा · 139/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
الَّذِينَ يَتَّخِذُونَ الْكَافِرِينَ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِ الْمُؤْمِنِينَ ۚ أَيَبْتَغُونَ عِندَهُمُ الْعِزَّةَ فَإِنَّ الْعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًا ۝١٣٩
Allazeena yattakhizoo nal kaafireena awliyaaa`a min doonil mu`mineen; a-yabta ghoona `indahumul `izzata fainnnal `izzata lillaahi jamee`aa
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को अपना सरपरस्त बनाते हैं क्या उनके पास इज्ज़त (व आबरू) की तलाश करते हैं इज्ज़त सारी बस ख़ुदा ही के लिए ख़ास है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوْلِيَاء (औलिया): मित्र, सहायक, संरक्षक।
  • مِن دُونِ (मिन दूनि): को छोड़कर, के बजाय।
  • الْعِزَّةَ (अल-इज़्ज़त): सम्मान, शक्ति, प्रभुत्व, विजय।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों (मुनाफ़िक़ीन) के बारे में है जो ईमानवालों को छोड़कर काफ़िरों को अपना मित्र और सहायक बनाते हैं। वे उन्हीं से मदद और सहारा चाहते हैं, और ईमानवालों से दूर भागते हैं। अल्लाह तआला उनसे पूछता है: क्या वे काफ़िरों से इज़्ज़त और शक्ति की तलाश कर रहे हैं? क्या वे सोचते हैं कि उनके पास कोई शक्ति या सम्मान है? यह उनकी बड़ी भूल है! क्योंकि सारी इज़्ज़त, सारी शक्ति, सारा प्रभुत्व और सारी विजय केवल अल्लाह ही के हाथ में है। जिसे अल्लाह इज़्ज़त देना चाहे, वही इज़्ज़तवाला होता है, और जिसे वह ज़लील करना चाहे, कोई उसे इज़्ज़त नहीं दे सकता।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक मुसलमान की पहचान यह है कि वह अपनी मदद और सहारा केवल अल्लाह से माँगे, और ईमानवालों से ही मोहब्बत और वफ़ादारी रखे। काफ़िरों से दोस्ती और उनसे उम्मीदें बाँधना न केवल बेकार है, बल्कि यह ईमान की कमज़ोरी की निशानी है। अल्लाह ने साफ़ कर दिया है कि असली इज़्ज़त तो सिर्फ़ उसी के पास है, और वही अपने नेक बंदों को इज़्ज़त देता है।

दावती पहलू:

यह आयत हर मुसलमान के लिए एक प्यारा पैग़ाम है — अपनी इज़्ज़त और ताक़त कभी भी अल्लाह के अलावा किसी और से मत माँगो। जो लोग दुनिया में कितने ही बड़े और ताक़तवर क्यों न हों, उनके पास कुछ भी नहीं है जो अल्लाह की मर्ज़ी के बिना तुम्हें दे सकें। अल्लाह से जुड़े रहो, उसकी राह पर चलो, और देखो कैसे वह तुम्हें वह इज़्ज़त देता है जो दुनिया की कोई ताक़त नहीं दे सकती। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अपनी उम्मीदें सिर्फ़ अल्लाह से बाँधें, और उसके नेक बंदों के साथ मिलकर रहें।



📜 आयत 137-141 — अन-निसा

137إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا ثُمَّ كَفَرُوا ثُمَّ آمَنُوا ثُمَّ كَفَرُوا ثُمَّ ازْدَادُوا كُفْرًا لَّمْ يَكُنِ اللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ سَبِيلًا
बेशक जो लोग ईमान लाए उसके बाद फ़िर काफ़िर हो गए फिर ईमान लाए और फिर उसके बाद काफ़िर हो गये और कुफ़्र में बढ़ते चले गए तो ख़ुदा उनकी मग़फ़िरत करेगा और न उन्हें राहे रास्त की हिदायत ही करेगा
138بَشِّرِ الْمُنَافِقِينَ بِأَنَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا
(ऐ रसूल) मुनाफ़िक़ों को ख़ुशख़बरी दे दो कि उनके लिए ज़रूर दर्दनाक अज़ाब है
139الَّذِينَ يَتَّخِذُونَ الْكَافِرِينَ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِ الْمُؤْمِنِينَ ۚ أَيَبْتَغُونَ عِندَهُمُ الْعِزَّةَ فَإِنَّ الْعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًا
जो लोग मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को अपना सरपरस्त बनाते हैं क्या उनके पास इज्ज़त (व आबरू) की तलाश करते हैं इज्ज़त सारी बस ख़ुदा ही के लिए ख़ास है
140وَقَدْ نَزَّلَ عَلَيْكُمْ فِي الْكِتَابِ أَنْ إِذَا سَمِعْتُمْ آيَاتِ اللَّهِ يُكْفَرُ بِهَا وَيُسْتَهْزَأُ بِهَا فَلَا تَقْعُدُوا مَعَهُمْ حَتَّىٰ يَخُوضُوا فِي حَدِيثٍ غَيْرِهِ ۚ إِنَّكُمْ إِذًا مِّثْلُهُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ جَامِعُ الْمُنَافِقِينَ وَالْكَافِرِينَ فِي جَهَنَّمَ جَمِيعًا
(मुसलमानों) हालॉकि ख़ुदा तुम पर अपनी किताब कुरान में ये हुक्म नाज़िल कर चुका है कि जब तुम सुन लो कि ख़ुदा की आयतों से ईन्कार किया जाता है और उससे मसख़रापन किया जाता है तो तुम उन (कुफ्फ़ार) के साथ मत बैठो यहॉ तक कि वह किसी दूसरी बात में ग़ौर करने लगें वरना तुम भी उस वक्त उनके बराबर हो जाओगे उसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा तमाम मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों को (एक न एक दिन) जहन्नुम में जमा ही करेगा
141الَّذِينَ يَتَرَبَّصُونَ بِكُمْ فَإِن كَانَ لَكُمْ فَتْحٌ مِّنَ اللَّهِ قَالُوا أَلَمْ نَكُن مَّعَكُمْ وَإِن كَانَ لِلْكَافِرِينَ نَصِيبٌ قَالُوا أَلَمْ نَسْتَحْوِذْ عَلَيْكُمْ وَنَمْنَعْكُم مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ ۚ فَاللَّهُ يَحْكُمُ بَيْنَكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ وَلَن يَجْعَلَ اللَّهُ لِلْكَافِرِينَ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ سَبِيلًا
(वो मुनाफ़ेकीन) जो तुम्हारे मुन्तज़िर है (कि देखिए फ़तेह होती है या शिकस्त) तो अगर ख़ुदा की तरफ़ से तुम्हें फ़तेह हुई तो कहने लगे कि क्या हम तुम्हारे साथ न थे और अगर (फ़तेह का) हिस्सा काफ़िरों को मिला तो (काफ़िरों के तरफ़दार बनकर) कहते हैं क्या हम तुमपर ग़ालिब न आ गए थे (मगर क़सदन तुमको छोड़ दिया) और तुमको मोमिनीन (के हाथों) से हमने बचाया नहीं था (मुनाफ़िक़ों) क़यामत के दिन तो ख़ुदा तुम्हारे दरमियान फैसला करेगा और ख़ुदा ने काफ़िरों को मोमिनीन पर वर (ऊँचा) रहने की हरगिज़ कोई राह नहीं क़रार दी है
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अनुवाद — अन-निसा 139

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Tuesday, August 18, 2026

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