अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَوْلِيَاء (औलिया): मित्र, सहायक, संरक्षक।
- مِن دُونِ (मिन दूनि): को छोड़कर, के बजाय।
- الْعِزَّةَ (अल-इज़्ज़त): सम्मान, शक्ति, प्रभुत्व, विजय।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों (मुनाफ़िक़ीन) के बारे में है जो ईमानवालों को छोड़कर काफ़िरों को अपना मित्र और सहायक बनाते हैं। वे उन्हीं से मदद और सहारा चाहते हैं, और ईमानवालों से दूर भागते हैं। अल्लाह तआला उनसे पूछता है: क्या वे काफ़िरों से इज़्ज़त और शक्ति की तलाश कर रहे हैं? क्या वे सोचते हैं कि उनके पास कोई शक्ति या सम्मान है? यह उनकी बड़ी भूल है! क्योंकि सारी इज़्ज़त, सारी शक्ति, सारा प्रभुत्व और सारी विजय केवल अल्लाह ही के हाथ में है। जिसे अल्लाह इज़्ज़त देना चाहे, वही इज़्ज़तवाला होता है, और जिसे वह ज़लील करना चाहे, कोई उसे इज़्ज़त नहीं दे सकता।
यह आयत हमें सिखाती है कि एक मुसलमान की पहचान यह है कि वह अपनी मदद और सहारा केवल अल्लाह से माँगे, और ईमानवालों से ही मोहब्बत और वफ़ादारी रखे। काफ़िरों से दोस्ती और उनसे उम्मीदें बाँधना न केवल बेकार है, बल्कि यह ईमान की कमज़ोरी की निशानी है। अल्लाह ने साफ़ कर दिया है कि असली इज़्ज़त तो सिर्फ़ उसी के पास है, और वही अपने नेक बंदों को इज़्ज़त देता है।
दावती पहलू:
यह आयत हर मुसलमान के लिए एक प्यारा पैग़ाम है — अपनी इज़्ज़त और ताक़त कभी भी अल्लाह के अलावा किसी और से मत माँगो। जो लोग दुनिया में कितने ही बड़े और ताक़तवर क्यों न हों, उनके पास कुछ भी नहीं है जो अल्लाह की मर्ज़ी के बिना तुम्हें दे सकें। अल्लाह से जुड़े रहो, उसकी राह पर चलो, और देखो कैसे वह तुम्हें वह इज़्ज़त देता है जो दुनिया की कोई ताक़त नहीं दे सकती। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अपनी उम्मीदें सिर्फ़ अल्लाह से बाँधें, और उसके नेक बंदों के साथ मिलकर रहें।
📜 आयत 137-141 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 139
सूरा अन-निसा आयत 139 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो लोग मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को अपना सरपरस्त बनाते…सूरा आयत 139/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 137–141. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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