Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُذَبْذَبِينَ: डगमगाते हुए, इधर-उधर भटकते हुए, किसी एक ओर स्थिर न रहने वाले।
- بَيْنَ ذَٰلِكَ: इस (ईमान और कुफ्र) के बीच।
- لَا إِلَىٰ هَٰؤُلَاءِ وَلَا إِلَىٰ هَٰؤُلَاءِ: न इन (मोमिनों) की ओर, न उन (काफिरों) की ओर।
- وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ: और जिसे अल्लाह गुमराह कर दे।
- سَبِيلًا: रास्ता, मार्ग (हिदायत का)।
तफसीर:
ये मुनाफिक (दिखावटी मुसलमान) हमेशा दुविधा और झिझक में डगमगाते रहते हैं। उनका दिल न ईमान पर स्थिर होता है और न कुफ्र पर। वे न तो सच्चे मोमिनों के साथ होते हैं (क्योंकि उनके दिल कुफ्र से भरे होते हैं), और न ही काफिरों के साथ (क्योंकि वे अपनी जान-माल की हिफाजत के लिए मुसलमान बनने का दिखावा करते हैं)। उनका जाहिर (बाहरी हाल) मोमिनों जैसा होता है, लेकिन बातिन (भीतरी हाल) काफिरों जैसा। वे हर हाल में मुतरद्दिद और बेचैन रहते हैं, किसी भी गिरोह से उनका ताल्लुक नहीं होता।
फिर अल्लाह तआला फरमाता है कि जिसे अल्लाह गुमराह कर दे (यानी उसके दिल को हिदायत से महरूम कर दे, उसकी सजा के तौर पर), तो ऐ रसूल! तुम उसके लिए हिदायत का कोई रास्ता नहीं पाओगे। यानी जिसे अल्लाह ने उसके अपने कुकर्मों और अकीदे की खराबी की वजह से गुमराही में छोड़ दिया, उसे कोई भी हिदायत नहीं दे सकता, क्योंकि हिदायत और गुमराही पूरी तरह अल्लाह के हाथ में है।
फायदे:
- मुनाफिकी (दिखावटी ईमान) सबसे बुरी हालत है, क्योंकि ऐसा इंसान न दुनिया में सुकून पाता है और न आखिरत में। उसकी जिंदगी हमेशा परेशानी और दुविधा में गुजरती है।
- सच्चा मुसलमान वही है जो अपने दिल और जुबान दोनों से ईमान लाए और अपने अमल से उसे साबित करे। ईमान में सच्चाई और इखलास (खुलूस) ही कामयाबी की कुंजी है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने दिल को हमेशा अल्लाह की इबादत और उसके जिक्र से जोड़े रखना चाहिए, ताकि हम डगमगाने से बचे रहें। जो इंसान अल्लाह से जुड़ा रहता है, अल्लाह उसे सीधे रास्ते पर चलाता है।
- हिदायत अल्लाह के हाथ में है, इसलिए हमें चाहिए कि हम हर वक्त अल्लाह से साबित कदमी और हिदायत की दुआ मांगते रहें, और अपने अमल को सही करते रहें, क्योंकि अल्लाह की गुमराही उन्हीं को मिलती है जो खुद हक को ठुकरा देते हैं।
📜 आयत 141-145 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 143
सूरा अन-निसा आयत 143 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इस कुफ़्र व ईमान के बीच अधड़ में पड़े झूल…सूरा आयत 143/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 141–145. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


