अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُخَادِعُونَ اللَّهَ: अल्लाह के साथ धोखा करने की कोशिश करना, यानी बाहर से ईमान दिखाना और अंदर से कुफ्र छिपाना।
- وَهُوَ خَادِعُهُمْ: अल्लाह उन्हें उनके धोखे का बदला देने वाला है।
- كُسَالَى: आलसी, सुस्त, बेरुखी और काहिली के साथ।
- يُرَاءُونَ النَّاسَ: लोगों को दिखाने के लिए (रिया) करना, ताकि लोग उनकी तारीफ करें।
- إِلَّا قَلِيلًا: बहुत कम, थोड़ा सा।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमानों) के हालात बयान करती है। ये लोग अल्लाह के साथ धोखा करने की कोशिश करते हैं, क्योंकि वे ज़बान से ईमान का इज़हार करते हैं, लेकिन दिल में कुफ्र और नफ़रत छिपाए रहते हैं। उन्हें लगता है कि अल्लाह उनके छिपे हुए हाल से बेखबर है, जबकि अल्लाह उनके इस धोखे का बदला देने वाला है। अल्लाह ने दुनिया में उनकी जान और माल को महफूज़ रखा, उन्हें मुसलमानों के साथ रहने का मौका दिया, लेकिन आख़िरत में उनके लिए सख्त से सख्त अज़ाब तैयार है — यही उनकी सज़ा है।
फिर अल्लाह उनकी एक और खूबी बयान करता है: जब ये लोग नमाज़ के लिए उठते हैं, तो बड़ी काहिली, आलस और बेरुखी के साथ उठते हैं। उनके दिल नमाज़ से खाली होते हैं, वे इसे बोझ समझते हैं। उनकी नमाज़ का मकसद अल्लाह की रज़ा नहीं होता, बल्कि लोगों को दिखाना होता है — ताकि लोग उन्हें नेक समझें, उनकी तारीफ करें, और उन्हें अपने दायरे में शामिल रखें। वे अल्लाह का ज़िक्र बहुत कम करते हैं, और जब करते भी हैं, तो सिर्फ दिखावे के लिए, जब लोग उन्हें देख रहे होते हैं। उनका यह कम ज़िक्र भी खालिस नहीं होता, बल्कि रिया और दिखावे पर आधारित होता है।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह से धोखा नहीं किया जा सकता: इंसान चाहे जितना भी दिखावा करे, अल्लाह उसके दिल का हाल जानता है। नेकी वही है जो खालिस अल्लाह के लिए हो, और बुराई वही है जो दिल में छिपी हो — अल्लाह उसे ज़रूर पकड़ेगा।
- नमाज़ की रूह (आत्मा): नमाज़ सिर्फ शरीर की हरकत नहीं है, बल्कि दिल का अल्लाह से जुड़ाव है। आलस और दिखावे के साथ पढ़ी गई नमाज़ इंसान को अल्लाह के करीब नहीं लाती, बल्कि उससे दूर करती है।
- रिया (दिखावा) एक बड़ा गुनाह है: लोगों को खुश करने के लिए अच्छे काम करना, अल्लाह की नज़र में उस अमल को बर्बाद कर देता है। इंसान को चाहिए कि वह अपने हर अमल में सिर्फ अल्लाह की रज़ा का ख्याल रखे।
- ज़िक्र की क़ीमत: अल्लाह का ज़िक्र चाहे थोड़ा हो, लेकिन अगर वह खालिस नियत से हो, तो अल्लाह के यहाँ बहुत बड़ा है। जैसा कि एक बड़े साहाबी ने फ़रमाया: "अगर वे उस थोड़े से ज़िक्र को भी अल्लाह की रज़ा के लिए करते, तो वह उनके लिए बहुत होता।"
- मोमिन की पहचान: सच्चा मोमिन वही है जो अकेले में और लोगों के सामने एक जैसा हो — उसकी नमाज़, उसका ज़िक्र और उसके अमल सब खालिस अल्लाह के लिए होते हैं, न कि लोगों को दिखाने के लिए।
📜 आयत 140-144 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 142
सूरा अन-निसा आयत 142 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक मुनाफ़िक़ीन (अपने ख्याल में) ख़ुदा को फरेब देते हैं…सूरा आयत 142/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 140–144. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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