अन-निसा · 144/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا الْكَافِرِينَ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِ الْمُؤْمِنِينَ ۚ أَتُرِيدُونَ أَن تَجْعَلُوا لِلَّهِ عَلَيْكُمْ سُلْطَانًا مُّبِينًا ۝١٤٤
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa tattakhizul kaafireena awliyaaa`a min doonil mu`mineen; aturee doona an taj`aloo lillaahi `alaikum sultaanam mubeenaa
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमान वालों मोमिनीन को छोड़कर काफ़िरों को (अपना) सरपरस्त न बनाओ क्या ये तुम चाहते हो कि ख़ुदा का सरीही इल्ज़ाम अपने सर क़ायम कर लो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوْلِيَاء (औलिया): मित्र, सहायक, संरक्षक।
  • مِن دُونِ (मिन दूनि): को छोड़कर, के बजाय।
  • سُلْطَانًا مُّبِينًا (सुल्तानन मुबीना): स्पष्ट प्रमाण, खुली हुज्जत, पुख्ता दलील।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ को दिल से माना और उसके दीन पर चलने का एहद किया, सुनो! काफिरों को अपना दोस्त, मददगार और संरक्षक मत बनाओ। उनसे मुहब्बत और वफादारी का रिश्ता मत जोड़ो, जबकि मोमिनों को छोड़कर ऐसा करना बिल्कुल गलत है। क्या तुम चाहते हो कि अपने इस कृत्य से अल्लाह को अपने ऊपर एक साफ और खुली हुज्जत दे दो, जो तुम्हारे ईमान के दावे को झूठा साबित कर दे? यानी अगर तुम काफिरों से दोस्ती रखोगे और मोमिनों को छोड़ दोगे, तो यह तुम्हारे निफाक (दोहरेपन) की गवाही होगी, और अल्लाह के पास तुम्हारी सजा के लिए स्पष्ट दलील हो जाएगी।

यह आयत मोमिनों को साफ पैगाम देती है कि ईमान की मजबूती उन्हीं से दोस्ती में है जो अल्लाह के दीन पर हैं। काफिरों से मुहब्बत और उनकी तरफ झुकाव दिल के ईमान को कमजोर करता है और इंसान को अल्लाह के अज़ाब का हकदार बनाता है। याद रखो, अल्लाह तुम्हारे दिलों के राज को जानता है, और वह कभी किसी पर जुल्म नहीं करता, बल्कि तुम्हारे अपने कर्मों का फल तुम्हें देता है।

दावत और नसीहत:

प्यारे मोमिनो! यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी पहचान हमारे ईमान से है। जो लोग अल्लाह के दुश्मन हैं, उनसे दोस्ती रखना हमारे ईमान के लिए जहर है। अगर हम सच्चे मोमिन हैं, तो हमें मोमिनों से मुहब्बत करनी चाहिए, उनके दुख-सुख में शरीक होना चाहिए, और उनकी मदद करनी चाहिए। यही रास्ता हमें दुनिया में इज्जत और आखिरत में कामयाबी तक पहुंचाता है। अल्लाह ने हमें आगाह किया है ताकि हम अपने हाथों अपना नुकसान न करें। तो आओ, हम अपने दिलों को साफ करें, सिर्फ अल्लाह और उसके नबी ﷺ की मुहब्बत को अपने दिलों में जगह दें, और मोमिनों के साथ भाईचारे का रिश्ता मजबूत करें। यही सच्ची कामयाबी है, और यही अल्लाह की रहमत का जरिया है।

🎧 सुनें

📜 आयत 142-146 — अन-निसा

142إِنَّ الْمُنَافِقِينَ يُخَادِعُونَ اللَّهَ وَهُوَ خَادِعُهُمْ وَإِذَا قَامُوا إِلَى الصَّلَاةِ قَامُوا كُسَالَىٰ يُرَاءُونَ النَّاسَ وَلَا يَذْكُرُونَ اللَّهَ إِلَّا قَلِيلًا
बेशक मुनाफ़िक़ीन (अपने ख्याल में) ख़ुदा को फरेब देते हैं हालॉकि ख़ुदा ख़ुद उन्हें धोखा देता है और ये लोग जब नमाज़ पढ़ने खड़े होते हैं तो (बे दिल से) अलकसाए हुए खड़े होते हैं और सिर्फ लोगों को दिखाते हैं और दिल से तो ख़ुदा को कुछ यूं ही सा याद करते हैं
143مُّذَبْذَبِينَ بَيْنَ ذَٰلِكَ لَا إِلَىٰ هَٰؤُلَاءِ وَلَا إِلَىٰ هَٰؤُلَاءِ ۚ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُ سَبِيلًا
इस कुफ़्र व ईमान के बीच अधड़ में पड़े झूल रहे हैं न उन (मुसलमानों) की तरफ़ न उन काफ़िरों की तरफ़ और (ऐ रसूल) जिसे ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे उसकी (हिदायत की) तुम हरगिज़ सबील नहीं कर सकते
144يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا الْكَافِرِينَ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِ الْمُؤْمِنِينَ ۚ أَتُرِيدُونَ أَن تَجْعَلُوا لِلَّهِ عَلَيْكُمْ سُلْطَانًا مُّبِينًا
ऐ ईमान वालों मोमिनीन को छोड़कर काफ़िरों को (अपना) सरपरस्त न बनाओ क्या ये तुम चाहते हो कि ख़ुदा का सरीही इल्ज़ाम अपने सर क़ायम कर लो
145إِنَّ الْمُنَافِقِينَ فِي الدَّرْكِ الْأَسْفَلِ مِنَ النَّارِ وَلَن تَجِدَ لَهُمْ نَصِيرًا
इसमें तो शक ही नहीं कि मुनाफ़िक जहन्नुम के सबसे नीचे तबके में होंगे और (ऐ रसूल) तुम वहॉ किसी को उनका हिमायती भी न पाओगे
146إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا وَأَصْلَحُوا وَاعْتَصَمُوا بِاللَّهِ وَأَخْلَصُوا دِينَهُمْ لِلَّهِ فَأُولَٰئِكَ مَعَ الْمُؤْمِنِينَ ۖ وَسَوْفَ يُؤْتِ اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ أَجْرًا عَظِيمًا
मगर (हॉ) जिन लोगों ने (निफ़ाक़ से) तौबा कर ली और अपनी हालत दुरूस्त कर ली और ख़ुदा से लगे लिपटे रहे और अपने दीन को महज़ ख़ुदा के वास्ते निरा खरा कर लिया तो ये लोग मोमिनीन के साथ (बेहिश्त में) होंगे और मोमिनीन को ख़ुदा अनक़रीब ही बड़ा (अच्छा) बदला अता फ़रमाएगा
अन-निसाकुरान सूची
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मदनीRevelation
144आयत

अनुवाद — अन-निसा 144

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Tuesday, August 18, 2026

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