Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الدَّرْكِ الأَسْفَلِ: नरक का सबसे निचला और सबसे भयानक स्तर, जो सबसे गहरा और सबसे कष्टदायक स्थान है।
- نَصِيرًا: सहायक, मददगार, कोई जो उन्हें इस आज़ाब से बचा सके।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के अंजाम को बयान कर रहा है। ये वे लोग हैं जो बाहर से मुसलमान बनते हैं लेकिन दिल में कुफ़्र और ईमान से नफ़रत रखते हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि ये मुनाफ़िक़ क़ियामत के दिन नरक के सबसे निचले और सबसे गहरे हिस्से में डाले जाएँगे। यह वह स्थान है जो सबसे अधिक गर्म, सबसे अधिक तंग और सबसे अधिक यातनादायक होगा। उनके लिए कोई मददगार नहीं होगा जो उन्हें इस भयानक अज़ाब से बचा सके या उनकी पीड़ा कम कर सके। यह उनके दोहरेपन और धोखे की सज़ा है, क्योंकि उन्होंने दुनिया में ईमान का दिखावा किया और अल्लाह और मुसलमानों को धोखा दिया, इसलिए अल्लाह उन्हें सबसे बुरे ठिकाने में डालेगा।
फ़ायदे (सबक):
- नफ़ाक़ (दोहरापन) सबसे बुरी बीमारी है — यह आयत हमें सिखाती है कि दिल में ईमान न होते हुए भी मुसलमान बनने का दिखावा करना सबसे बड़ा गुनाह है, और इसकी सज़ा सबसे भयानक होगी। इसलिए हमें अपने दिल और अमल को साफ़ रखना चाहिए और कभी धोखेबाज़ी नहीं करनी चाहिए।
- ईमान की हिफ़ाज़त करें — हमें अपने ईमान की रक्षा करनी चाहिए और उसे कमज़ोर नहीं पड़ने देना चाहिए, क्योंकि ईमान की कमज़ोरी ही इंसान को नफ़ाक़ की तरफ ले जाती है।
- अल्लाह की रहमत का एहसास — यह आयत हमें यह भी याद दिलाती है कि अल्लाह ने हमें ईमान और इस्लाम की नेमत दी है, इसलिए हमें इस नेमत की क़द्र करनी चाहिए और उस पर साबित क़दम रहना चाहिए।
- सच्चाई और इख़लास की तरग़ीब — यह आयत हमें सच्चे मुसलमान बनने की तरग़ीब देती है, यानी जो हमारे दिल में हो वही हमारी ज़ुबान और अमल पर हो। सच्चाई और इख़लास ही वह रास्ता है जो हमें जहन्नम के सबसे निचले दर्जे से बचाकर जन्नत की ऊँचाइयों तक पहुँचाता है।
📜 आयत 143-147 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 145
सूरा अन-निसा आयत 145 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें तो शक ही नहीं कि मुनाफ़िक जहन्नुम के सबसे…सूरा आयत 145/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 143–147. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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