अन-निसा · 146/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا وَأَصْلَحُوا وَاعْتَصَمُوا بِاللَّهِ وَأَخْلَصُوا دِينَهُمْ لِلَّهِ فَأُولَٰئِكَ مَعَ الْمُؤْمِنِينَ ۖ وَسَوْفَ يُؤْتِ اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ أَجْرًا عَظِيمًا ۝١٤٦
Illal lazeena taaboo wa aslahoo wa`tasamoo billaahi wa akhlasoo deenahum lillaahi faulaaa`ika ma`al mu`mineena wa sawfa yu`til laahul mu`mineena ajran `azeemaa
📖 हिंदी अर्थ
मगर (हॉ) जिन लोगों ने (निफ़ाक़ से) तौबा कर ली और अपनी हालत दुरूस्त कर ली और ख़ुदा से लगे लिपटे रहे और अपने दीन को महज़ ख़ुदा के वास्ते निरा खरा कर लिया तो ये लोग मोमिनीन के साथ (बेहिश्त में) होंगे और मोमिनीन को ख़ुदा अनक़रीब ही बड़ा (अच्छा) बदला अता फ़रमाएगा

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَابُوا: तौबा की, अपने कुकर्मों से लौट आए।
  • وَأَصْلَحُوا: अपनी स्थिति को सुधारा, अपने अंदर और बाहर सुधार किया।
  • وَاعْتَصَمُوا بِاللَّهِ: अल्लाह को मज़बूत पकड़ लिया, उसके दीन को थाम लिया।
  • وَأَخْلَصُوا دِينَهُمْ لِلَّهِ: अपने दीन (धर्म) को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लिया, बिना किसी रिया (दिखावे) के।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने निफ़ाक़ (मुनाफ़िक़ी) का रास्ता अपनाया था, लेकिन अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा उनके लिए भी खुला है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो लोग मुनाफ़िक़ थे, उनमें से जिन्होंने सच्ची तौबा की — यानी अपने निफ़ाक़ से लौट आए, अपने किए पर पछताया और अल्लाह से माफ़ी माँगी — और अपने अंदर सुधार किया, अपने अच्छे कामों को फिर से शुरू किया, और अल्लाह के साथ अपना रिश्ता मज़बूत किया, उसके दीन को थाम लिया, और अपने दीन को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लिया — बिना किसी दिखावे के, बिना किसी दुनियावी मतलब के — तो ऐसे लोग असली मोमिनों के साथ होंगे। दुनिया में भी उनका दर्जा मोमिनों के साथ होगा और आख़िरत में भी वही उनके साथी होंगे।

और फिर अल्लाह तआला एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी देता है: "और अल्लाह मोमिनों को बहुत बड़ा अज्र (इनाम) देगा।" यानी जो लोग सच्चे दिल से ईमान लाए, उनके लिए अल्लाह के पास बेहिसाब नेमतें, जन्नत और उसकी रज़ा है। यह अज्र इतना अज़ीम है कि इसकी कोई हद नहीं, कोई अंत नहीं — यह हमेशा रहने वाला है।


दावती पहलू:

यह आयत अल्लाह की असीम रहमत का जीता-जागता सबूत है। अल्लाह तआला कितना मेहरबान है कि वह अपने बंदों के लिए तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला रखता है। चाहे इंसान कितना ही गुनाहगार हो, कितनी ही गहरी गलती कर बैठे, अगर वह सच्चे दिल से लौट आए, तो अल्लाह उसे कबूल कर लेता है। यह हमारे लिए सबसे बड़ी उम्मीद है। कभी निराश न हों, कभी यह न सोचें कि हमारे गुनाह बहुत बड़े हैं, अल्लाह हमें माफ़ नहीं करेगा। अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से कहीं ज़्यादा है। बस शर्त यह है कि हम सच्चे दिल से तौबा करें, अपने अमल सुधारें, और अपने दीन को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लें। यही वह रास्ता है जो हमें मोमिनों की जमात से जोड़ता है और हमें उस अज़ीम अज्र का हक़दार बनाता है जो अल्लाह ने अपने मोमिन बंदों के लिए तैयार किया है। आओ, हम सब इस दरवाज़े की तरफ़ दौड़ें — तौबा का दरवाज़ा — क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।



📜 आयत 144-148 — अन-निसा

144يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا الْكَافِرِينَ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِ الْمُؤْمِنِينَ ۚ أَتُرِيدُونَ أَن تَجْعَلُوا لِلَّهِ عَلَيْكُمْ سُلْطَانًا مُّبِينًا
ऐ ईमान वालों मोमिनीन को छोड़कर काफ़िरों को (अपना) सरपरस्त न बनाओ क्या ये तुम चाहते हो कि ख़ुदा का सरीही इल्ज़ाम अपने सर क़ायम कर लो
145إِنَّ الْمُنَافِقِينَ فِي الدَّرْكِ الْأَسْفَلِ مِنَ النَّارِ وَلَن تَجِدَ لَهُمْ نَصِيرًا
इसमें तो शक ही नहीं कि मुनाफ़िक जहन्नुम के सबसे नीचे तबके में होंगे और (ऐ रसूल) तुम वहॉ किसी को उनका हिमायती भी न पाओगे
146إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا وَأَصْلَحُوا وَاعْتَصَمُوا بِاللَّهِ وَأَخْلَصُوا دِينَهُمْ لِلَّهِ فَأُولَٰئِكَ مَعَ الْمُؤْمِنِينَ ۖ وَسَوْفَ يُؤْتِ اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ أَجْرًا عَظِيمًا
मगर (हॉ) जिन लोगों ने (निफ़ाक़ से) तौबा कर ली और अपनी हालत दुरूस्त कर ली और ख़ुदा से लगे लिपटे रहे और अपने दीन को महज़ ख़ुदा के वास्ते निरा खरा कर लिया तो ये लोग मोमिनीन के साथ (बेहिश्त में) होंगे और मोमिनीन को ख़ुदा अनक़रीब ही बड़ा (अच्छा) बदला अता फ़रमाएगा
147مَّا يَفْعَلُ اللَّهُ بِعَذَابِكُمْ إِن شَكَرْتُمْ وَآمَنتُمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ شَاكِرًا عَلِيمًا
अगर तुमने ख़ुदा का शुक्र किया और उसपर ईमान लाए तो ख़ुदा तुम पर अज़ाब करके क्या करेगा बल्कि ख़ुदा तो (ख़ुद शुक्र करने वालों का) क़दरदॉ और वाक़िफ़कार है
148۞ لَّا يُحِبُّ اللَّهُ الْجَهْرَ بِالسُّوءِ مِنَ الْقَوْلِ إِلَّا مَن ظُلِمَ ۚ وَكَانَ اللَّهُ سَمِيعًا عَلِيمًا
ख़ुदा (किसी को) हॉक पुकार कर बुरा कहने को पसन्द नहीं करता मगर मज़लूम (ज़ालिम की बुराई बयान कर सकता है) और ख़ुदा तो (सबकी) सुनता है (और हर एक को) जानता है
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीRevelation
146आयत

अनुवाद — अन-निसा 146

सूरा अन-निसा आयत 146 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर (हॉ) जिन लोगों ने (निफ़ाक़ से) तौबा कर ली…

सूरा आयत 146/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 144–148. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए