अन-निसा · 147/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
مَّا يَفْعَلُ اللَّهُ بِعَذَابِكُمْ إِن شَكَرْتُمْ وَآمَنتُمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ شَاكِرًا عَلِيمًا ۝١٤٧
maa yafa`lul laahu bi `azaabikum in shakartum wa aamantum; wa kaanal laahu Shaakiran `Aleema
📖 हिंदी अर्थ
अगर तुमने ख़ुदा का शुक्र किया और उसपर ईमान लाए तो ख़ुदा तुम पर अज़ाब करके क्या करेगा बल्कि ख़ुदा तो (ख़ुद शुक्र करने वालों का) क़दरदॉ और वाक़िफ़कार है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا يَفْعَلُ اللَّهُ: अल्लाह क्या करेगा? (यानी उसे क्या ज़रूरत है?)
  • بِعَذَابِكُمْ: तुम्हें अज़ाब देने की
  • إِن شَكَرْتُمْ: अगर तुम शुक्र अदा करो
  • وَآمَنتُمْ: और ईमान लाओ
  • شَاكِرًا: शुक्र क़बूल करने वाला (अपने बंदों के अच्छे कामों की क़द्र करने वाला)
  • عَلِيمًا: सब कुछ जानने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों पर अपनी बेपनाह रहमत और करम का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि "ऐ लोगो! अगर तुम मेरा शुक्र अदा करते हो और मुझ पर ईमान लाते हो, तो मैं तुम्हें अज़ाब में क्यों डालूँगा?" यानी अल्लाह को तुम्हारे अज़ाब से कोई फ़ायदा नहीं पहुँचता, न ही उसे तुम्हारी सज़ा से कोई ग़रज़ है। वह तो बिल्कुल बेनियाज़ है, अपनी मख़लूक़ से किसी चीज़ का मोहताज नहीं। अगर वह तुम्हें अज़ाब देता है, तो वह सिर्फ़ तुम्हारे अपने गुनाहों की वजह से होगा, क्योंकि अल्लाह इंसाफ़ करने वाला है और गुनाह की सज़ा देना उसका कानून है।

लेकिन अगर तुम अपने अमल को दुरुस्त कर लो, अल्लाह की नेअमतों का शुक्र अदा करो, और उस पर सच्चे दिल से ईमान लाओ — ज़ाहिर और बातिन दोनों तरह से — तो अल्लाह तुम्हें अज़ाब नहीं देगा। क्योंकि अल्लाह तआला शाकिर है, यानी वह अपने बंदों के छोटे से छोटे अच्छे काम की भी क़द्र करता है और उसका बड़ा से बड़ा अज्र अता करता है। वह अलीम है, हर चीज़ से बाख़बर है — वह जानता है कि तुम्हारा शुक्र सच्चा है या झूठा, तुम्हारा ईमान दिल से है या सिर्फ़ ज़ुबान से। वह हर इंसान के अमल के मुताबिक़ उसे बदला देगा।

दावती पहलू:

यह आयत अल्लाह की रहमत का ऐसा ख़ज़ाना है जो हर इंसान के लिए खुला है। अल्लाह हमसे किसी चीज़ का मोहताज नहीं, बल्कि हम ही उसके मोहताज हैं। वह हमें अज़ाब से बचाने का सबसे आसान रास्ता बता रहा है — बस शुक्र और ईमान! यानी अल्लाह की नेअमतों को पहचानो, उसका शुक्र अदा करो, और उस पर पूरा भरोसा रखो। यही वह चाबी है जो जन्नत के दरवाज़े खोलती है। अल्लाह ऐसा रहीम है कि वह चाहता है कि हम उसकी तरफ़ रुजू करें, तौबा करें और अपनी ज़िंदगी को सुधार लें। वह हमारे गुनाहों को माफ़ करने के लिए बेकरार रहता है, बशर्ते हम सच्चे दिल से उसकी तरफ़ पलटें। यही सच्ची कामयाबी है — अल्लाह का शुक्रगुज़ार बंदा बनना और उस पर ईमान लाना, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में सुकून और कामयाबी देता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 145-149 — अन-निसा

145إِنَّ الْمُنَافِقِينَ فِي الدَّرْكِ الْأَسْفَلِ مِنَ النَّارِ وَلَن تَجِدَ لَهُمْ نَصِيرًا
इसमें तो शक ही नहीं कि मुनाफ़िक जहन्नुम के सबसे नीचे तबके में होंगे और (ऐ रसूल) तुम वहॉ किसी को उनका हिमायती भी न पाओगे
146إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا وَأَصْلَحُوا وَاعْتَصَمُوا بِاللَّهِ وَأَخْلَصُوا دِينَهُمْ لِلَّهِ فَأُولَٰئِكَ مَعَ الْمُؤْمِنِينَ ۖ وَسَوْفَ يُؤْتِ اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ أَجْرًا عَظِيمًا
मगर (हॉ) जिन लोगों ने (निफ़ाक़ से) तौबा कर ली और अपनी हालत दुरूस्त कर ली और ख़ुदा से लगे लिपटे रहे और अपने दीन को महज़ ख़ुदा के वास्ते निरा खरा कर लिया तो ये लोग मोमिनीन के साथ (बेहिश्त में) होंगे और मोमिनीन को ख़ुदा अनक़रीब ही बड़ा (अच्छा) बदला अता फ़रमाएगा
147مَّا يَفْعَلُ اللَّهُ بِعَذَابِكُمْ إِن شَكَرْتُمْ وَآمَنتُمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ شَاكِرًا عَلِيمًا
अगर तुमने ख़ुदा का शुक्र किया और उसपर ईमान लाए तो ख़ुदा तुम पर अज़ाब करके क्या करेगा बल्कि ख़ुदा तो (ख़ुद शुक्र करने वालों का) क़दरदॉ और वाक़िफ़कार है
148۞ لَّا يُحِبُّ اللَّهُ الْجَهْرَ بِالسُّوءِ مِنَ الْقَوْلِ إِلَّا مَن ظُلِمَ ۚ وَكَانَ اللَّهُ سَمِيعًا عَلِيمًا
ख़ुदा (किसी को) हॉक पुकार कर बुरा कहने को पसन्द नहीं करता मगर मज़लूम (ज़ालिम की बुराई बयान कर सकता है) और ख़ुदा तो (सबकी) सुनता है (और हर एक को) जानता है
149إِن تُبْدُوا خَيْرًا أَوْ تُخْفُوهُ أَوْ تَعْفُوا عَن سُوءٍ فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ عَفُوًّا قَدِيرًا
अगर खुल्लम खुल्ला नेकी करते हो या छिपा कर या किसी की बुराई से दरगुज़र करते हो तो तो ख़ुदा भी बड़ा दरगुज़र करने वाला (और) क़ादिर है
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अनुवाद — अन-निसा 147

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Tuesday, August 18, 2026

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