Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا يَفْعَلُ اللَّهُ: अल्लाह क्या करेगा? (यानी उसे क्या ज़रूरत है?)
- بِعَذَابِكُمْ: तुम्हें अज़ाब देने की
- إِن شَكَرْتُمْ: अगर तुम शुक्र अदा करो
- وَآمَنتُمْ: और ईमान लाओ
- شَاكِرًا: शुक्र क़बूल करने वाला (अपने बंदों के अच्छे कामों की क़द्र करने वाला)
- عَلِيمًا: सब कुछ जानने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों पर अपनी बेपनाह रहमत और करम का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि "ऐ लोगो! अगर तुम मेरा शुक्र अदा करते हो और मुझ पर ईमान लाते हो, तो मैं तुम्हें अज़ाब में क्यों डालूँगा?" यानी अल्लाह को तुम्हारे अज़ाब से कोई फ़ायदा नहीं पहुँचता, न ही उसे तुम्हारी सज़ा से कोई ग़रज़ है। वह तो बिल्कुल बेनियाज़ है, अपनी मख़लूक़ से किसी चीज़ का मोहताज नहीं। अगर वह तुम्हें अज़ाब देता है, तो वह सिर्फ़ तुम्हारे अपने गुनाहों की वजह से होगा, क्योंकि अल्लाह इंसाफ़ करने वाला है और गुनाह की सज़ा देना उसका कानून है।
लेकिन अगर तुम अपने अमल को दुरुस्त कर लो, अल्लाह की नेअमतों का शुक्र अदा करो, और उस पर सच्चे दिल से ईमान लाओ — ज़ाहिर और बातिन दोनों तरह से — तो अल्लाह तुम्हें अज़ाब नहीं देगा। क्योंकि अल्लाह तआला शाकिर है, यानी वह अपने बंदों के छोटे से छोटे अच्छे काम की भी क़द्र करता है और उसका बड़ा से बड़ा अज्र अता करता है। वह अलीम है, हर चीज़ से बाख़बर है — वह जानता है कि तुम्हारा शुक्र सच्चा है या झूठा, तुम्हारा ईमान दिल से है या सिर्फ़ ज़ुबान से। वह हर इंसान के अमल के मुताबिक़ उसे बदला देगा।
दावती पहलू:
यह आयत अल्लाह की रहमत का ऐसा ख़ज़ाना है जो हर इंसान के लिए खुला है। अल्लाह हमसे किसी चीज़ का मोहताज नहीं, बल्कि हम ही उसके मोहताज हैं। वह हमें अज़ाब से बचाने का सबसे आसान रास्ता बता रहा है — बस शुक्र और ईमान! यानी अल्लाह की नेअमतों को पहचानो, उसका शुक्र अदा करो, और उस पर पूरा भरोसा रखो। यही वह चाबी है जो जन्नत के दरवाज़े खोलती है। अल्लाह ऐसा रहीम है कि वह चाहता है कि हम उसकी तरफ़ रुजू करें, तौबा करें और अपनी ज़िंदगी को सुधार लें। वह हमारे गुनाहों को माफ़ करने के लिए बेकरार रहता है, बशर्ते हम सच्चे दिल से उसकी तरफ़ पलटें। यही सच्ची कामयाबी है — अल्लाह का शुक्रगुज़ार बंदा बनना और उस पर ईमान लाना, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में सुकून और कामयाबी देता है।
📜 आयत 145-149 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 147
सूरा अन-निसा आयत 147 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर तुमने ख़ुदा का शुक्र किया और उसपर ईमान लाए…सूरा आयत 147/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 145–149. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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