अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَتَدَبَّرُونَ – गहराई से सोचना, चिंतन करना, विचार-विमर्श करना।
- اخْتِلَافًا – विरोधाभास, अंतर्विरोध, आपसी टकराव।
- كَثِيرًا – बहुत अधिक, अनेक।
व्याख्या:
क्या ये लोग क़ुरआन पर गहराई से चिंतन और विचार नहीं करते? यदि वे ऐसा करते, तो उन्हें यह स्पष्ट हो जाता कि यह किताब अपनी एकरूपता, सुसंगतता और अद्भुत सामंजस्य के कारण किसी मानवीय रचना से कहीं बढ़कर है। इसकी आयतें, इसके आदेश, इसकी शिक्षाएँ और इसके वादे-धमकी सभी में पूर्ण सामंजस्य है। कोई भी बात एक-दूसरे का खंडन नहीं करती, न ही इसमें कोई आपसी टकराव पाया जाता है।
यदि यह क़ुरआन अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की ओर से होता — चाहे वह कोई विद्वान हो, कवि हो, या कोई सामान्य व्यक्ति — तो उसमें अवश्य ही अनेक विरोधाभास और अंतर्विरोध पाए जाते। क्योंकि मानवीय ज्ञान सीमित है, विचार बदलते हैं, और परिस्थितियों के अनुसार बातें बदल जाती हैं। लेकिन यह क़ुरआन चौदह शताब्दियों से अपनी हर आयत, हर शब्द और हर आदेश में एक जैसा सुसंगत और अटल है। इसकी शिक्षाएँ कभी पुरानी नहीं होतीं, और इसके नियम कभी टकराते नहीं। यही इस बात का प्रमाण है कि यह अल्लाह की ओर से है।
लाभ एवं शिक्षाएँ:
- क़ुरआन पर चिंतन और विचार करना हर मुसलमान का कर्तव्य है, क्योंकि यही ईमान को मजबूत करता है और सच्चाई को उजागर करता है।
- क़ुरआन की एकरूपता और अंतर्विरोधों से मुक्त होना इसकी दिव्यता का सबसे बड़ा प्रमाण है — यह एक ऐसा चमत्कार है जो हर युग में स्पष्ट है।
- यह आयत उन लोगों को भी सोचने की دعوت देती है जो क़ुरआन पर संदेह करते हैं — वे खुले दिल से इसका अध्ययन करें, तो उन्हें सत्य स्वयं प्रकट हो जाएगा।
- क़ुरआन का अध्ययन केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समझने और उस पर अमल करने के लिए है। यही वह मार्ग है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत की सफलता तक पहुँचाता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य की पहचान के लिए तर्क और विचार का उपयोग करना चाहिए — और क़ुरआन ही वह सत्य है जो हर युग में अपनी प्रामाणिकता सिद्ध करता है।
📜 आयत 80-84 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 82
सूरा अन-निसा आयत 82 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या ये लोग क़ुरान में भी ग़ौर नहीं करते…सूरा आयत 82/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 80–84. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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