Faqaatil fee sabeelil laahi laa tukallafu illa nafsaka wa harridil mu`mineena `asallaahu ai yakuffa baasallazeena kafaroo; wallaahu ashaddu baasanw wa ashaaddu tanakeelaa
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
पस (ऐ रसूल) तुम ख़ुदा की राह में जिहाद करो और तुम अपनी ज़ात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो और ईमानदारों को (जेहाद की) तरग़ीब दो और अनक़रीब ख़ुदा काफ़िरों की हैबत रोक देगा और ख़ुदा की हैबत सबसे ज्यादा है और उसकी सज़ा बहुत सख्त है
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🌐 اردو
تو (اے محمدﷺ) تم خدا کی راہ میں لڑو تم اپنے سوا کسی کے ذمہ دار نہیں اور مومنوں کو بھی ترغیب دو قریب ہے کہ خدا کافروں کی لڑائی کو بند کردے اور خدا لڑائی کے اعتبار سے بہت سخت ہے اور سزا کے لحاظ سے بھی بہت سخت ہے
पस (ऐ रसूल) तुम ख़ुदा की राह में जिहाद करो और तुम अपनी ज़ात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो और ईमानदारों को (जेहाद की) तरग़ीब दो और अनक़रीब ख़ुदा काफ़िरों की हैबत रोक देगा और ख़ुदा की हैबत सबसे ज्यादा है और उसकी सज़ा बहुत सख्त है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
فَقَاتِلْ: तुम जिहाद करो / लड़ो।
لَا تُكَلَّفُ: तुम पर बाध्य नहीं किया जाता।
حَرِّضِ: उकसाओ, प्रोत्साहित करो।
بَأْسَ: युद्ध की सख्ती, शक्ति, या आक्रमण।
تَنكِيلًا: कठोर दंड, अपमानजनक सज़ा।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! तुम अल्लाह के मार्ग में जिहाद करो, चाहे तुम अकेले ही क्यों न हो। तुम पर केवल अपने कर्तव्य का दायित्व है, दूसरों के कर्मों का बोझ तुम पर नहीं है। यदि लोग तुम्हारा साथ न दें, तो भी तुम अपने ईमान और अपनी ज़िम्मेदारी के अनुसार क़ताल (युद्ध) करते रहो। साथ ही, मोमिनों (विश्वासियों) को जिहाद के लिए प्रोत्साहित करो, उनके दिलों में जोश पैदा करो और उन्हें इस पुण्य कार्य की ओर प्रेरित करो। यह संभव है कि अल्लाह तुम्हारे और उनके इस संघर्ष के ज़रिए काफ़िरों की शक्ति को रोक दे और उनके हमलों को निष्फल कर दे। अल्लाह ताकत में सबसे बड़ा है और उसकी पकड़ सबसे कठोर है; वह काफ़िरों को उनके कुकर्मों की सज़ा ऐसे देगा जो उनके लिए अत्यंत अपमानजनक और भयावह होगी।
फ़ायदे (लाभ):
यह आयत सिखाती है कि सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए अकेले होने का डर नहीं होना चाहिए; अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ होती है, चाहे वे कितने ही कम क्यों न हों।
मुसलमानों को एक-दूसरे को अच्छे कामों की ओर प्रोत्साहित करना चाहिए, खासकर उन कार्यों की ओर जो अल्लाह की रज़ा के लिए हों।
अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए कि वह अपने बंदों की मेहनत और संघर्ष को बेकार नहीं जाने देता; वह दुश्मनों की चालों को नाकाम कर देता है।
यह आयत मुसलमानों को धैर्य और साहस का पाठ पढ़ाती है, और यह बताती है कि अल्लाह की शक्ति किसी भी इंसानी ताकत से कहीं बढ़कर है।
और जब उनके (मुसलमानों के) पास अमन या ख़ौफ़ की ख़बर आयी तो उसे फ़ौरन मशहूर कर देते हैं हालॉकि अगर वह उसकी ख़बर को रसूल (या) और ईमानदारो में से जो साहबाने हुकूमत तक पहुंचाते तो बेशक जो लोग उनमें से उसकी तहक़ीक़ करने वाले हैं (पैग़म्बर या वली) उसको समझ लेते कि (मशहूर करने की ज़रूरत है या नहीं) और (मुसलमानों) अगर तुमपर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो चन्द आदमियों के सिवा तुम सबके सब शैतान की पैरवी करने लगते
पस (ऐ रसूल) तुम ख़ुदा की राह में जिहाद करो और तुम अपनी ज़ात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो और ईमानदारों को (जेहाद की) तरग़ीब दो और अनक़रीब ख़ुदा काफ़िरों की हैबत रोक देगा और ख़ुदा की हैबत सबसे ज्यादा है और उसकी सज़ा बहुत सख्त है
जो शख्स अच्छे काम की सिफ़ारिश करे तो उसको भी उस काम के सवाब से कुछ हिस्सा मिलेगा और जो बुरे काम की सिफ़ारिश करे तो उसको भी उसी काम की सज़ा का कुछ हिस्सा मिलेगा और ख़ुदा तो हर चीज़ पर निगेहबान है
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