अन-निसा · 84/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
فَقَاتِلْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ لَا تُكَلَّفُ إِلَّا نَفْسَكَ ۚ وَحَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ ۖ عَسَى اللَّهُ أَن يَكُفَّ بَأْسَ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ وَاللَّهُ أَشَدُّ بَأْسًا وَأَشَدُّ تَنكِيلًا ۝٨٤
Faqaatil fee sabeelil laahi laa tukallafu illa nafsaka wa harridil mu`mineena `asallaahu ai yakuffa baasallazeena kafaroo; wallaahu ashaddu baasanw wa ashaaddu tanakeelaa
📖 हिंदी अर्थ
पस (ऐ रसूल) तुम ख़ुदा की राह में जिहाद करो और तुम अपनी ज़ात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो और ईमानदारों को (जेहाद की) तरग़ीब दो और अनक़रीब ख़ुदा काफ़िरों की हैबत रोक देगा और ख़ुदा की हैबत सबसे ज्यादा है और उसकी सज़ा बहुत सख्त है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَقَاتِلْ: तुम जिहाद करो / लड़ो।
  • لَا تُكَلَّفُ: तुम पर बाध्य नहीं किया जाता।
  • حَرِّضِ: उकसाओ, प्रोत्साहित करो।
  • بَأْسَ: युद्ध की सख्ती, शक्ति, या आक्रमण।
  • تَنكِيلًا: कठोर दंड, अपमानजनक सज़ा।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! तुम अल्लाह के मार्ग में जिहाद करो, चाहे तुम अकेले ही क्यों न हो। तुम पर केवल अपने कर्तव्य का दायित्व है, दूसरों के कर्मों का बोझ तुम पर नहीं है। यदि लोग तुम्हारा साथ न दें, तो भी तुम अपने ईमान और अपनी ज़िम्मेदारी के अनुसार क़ताल (युद्ध) करते रहो। साथ ही, मोमिनों (विश्वासियों) को जिहाद के लिए प्रोत्साहित करो, उनके दिलों में जोश पैदा करो और उन्हें इस पुण्य कार्य की ओर प्रेरित करो। यह संभव है कि अल्लाह तुम्हारे और उनके इस संघर्ष के ज़रिए काफ़िरों की शक्ति को रोक दे और उनके हमलों को निष्फल कर दे। अल्लाह ताकत में सबसे बड़ा है और उसकी पकड़ सबसे कठोर है; वह काफ़िरों को उनके कुकर्मों की सज़ा ऐसे देगा जो उनके लिए अत्यंत अपमानजनक और भयावह होगी।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत सिखाती है कि सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए अकेले होने का डर नहीं होना चाहिए; अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ होती है, चाहे वे कितने ही कम क्यों न हों।
  2. मुसलमानों को एक-दूसरे को अच्छे कामों की ओर प्रोत्साहित करना चाहिए, खासकर उन कार्यों की ओर जो अल्लाह की रज़ा के लिए हों।
  3. अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए कि वह अपने बंदों की मेहनत और संघर्ष को बेकार नहीं जाने देता; वह दुश्मनों की चालों को नाकाम कर देता है।
  4. यह आयत मुसलमानों को धैर्य और साहस का पाठ पढ़ाती है, और यह बताती है कि अल्लाह की शक्ति किसी भी इंसानी ताकत से कहीं बढ़कर है।


📜 आयत 82-86 — सूरा अन-निसा

82أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْآنَ ۚ وَلَوْ كَانَ مِنْ عِندِ غَيْرِ اللَّهِ لَوَجَدُوا فِيهِ اخْتِلَافًا كَثِيرًا
तो क्या ये लोग क़ुरान में भी ग़ौर नहीं करते और (ये नहीं ख्याल करते कि) अगर ख़ुदा के सिवा किसी और की तरफ़ से (आया) होता तो ज़रूर उसमें बड़ा इख्तेलाफ़ पाते
83وَإِذَا جَاءَهُمْ أَمْرٌ مِّنَ الْأَمْنِ أَوِ الْخَوْفِ أَذَاعُوا بِهِ ۖ وَلَوْ رَدُّوهُ إِلَى الرَّسُولِ وَإِلَىٰ أُولِي الْأَمْرِ مِنْهُمْ لَعَلِمَهُ الَّذِينَ يَسْتَنبِطُونَهُ مِنْهُمْ ۗ وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ لَاتَّبَعْتُمُ الشَّيْطَانَ إِلَّا قَلِيلًا
और जब उनके (मुसलमानों के) पास अमन या ख़ौफ़ की ख़बर आयी तो उसे फ़ौरन मशहूर कर देते हैं हालॉकि अगर वह उसकी ख़बर को रसूल (या) और ईमानदारो में से जो साहबाने हुकूमत तक पहुंचाते तो बेशक जो लोग उनमें से उसकी तहक़ीक़ करने वाले हैं (पैग़म्बर या वली) उसको समझ लेते कि (मशहूर करने की ज़रूरत है या नहीं) और (मुसलमानों) अगर तुमपर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो चन्द आदमियों के सिवा तुम सबके सब शैतान की पैरवी करने लगते
84فَقَاتِلْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ لَا تُكَلَّفُ إِلَّا نَفْسَكَ ۚ وَحَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ ۖ عَسَى اللَّهُ أَن يَكُفَّ بَأْسَ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ وَاللَّهُ أَشَدُّ بَأْسًا وَأَشَدُّ تَنكِيلًا
पस (ऐ रसूल) तुम ख़ुदा की राह में जिहाद करो और तुम अपनी ज़ात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो और ईमानदारों को (जेहाद की) तरग़ीब दो और अनक़रीब ख़ुदा काफ़िरों की हैबत रोक देगा और ख़ुदा की हैबत सबसे ज्यादा है और उसकी सज़ा बहुत सख्त है
85مَّن يَشْفَعْ شَفَاعَةً حَسَنَةً يَكُن لَّهُ نَصِيبٌ مِّنْهَا ۖ وَمَن يَشْفَعْ شَفَاعَةً سَيِّئَةً يَكُن لَّهُ كِفْلٌ مِّنْهَا ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ مُّقِيتًا
जो शख्स अच्छे काम की सिफ़ारिश करे तो उसको भी उस काम के सवाब से कुछ हिस्सा मिलेगा और जो बुरे काम की सिफ़ारिश करे तो उसको भी उसी काम की सज़ा का कुछ हिस्सा मिलेगा और ख़ुदा तो हर चीज़ पर निगेहबान है
86وَإِذَا حُيِّيتُم بِتَحِيَّةٍ فَحَيُّوا بِأَحْسَنَ مِنْهَا أَوْ رُدُّوهَا ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ حَسِيبًا
और जब कोई शख्स सलाम करे तो तुम भी उसके जवाब में उससे बेहतर तरीक़े से सलाम करो या वही लफ्ज़ जवाब में कह दो बेशक ख़ुदा हर चीज़ का हिसाब करने वाला है
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
84आयत

अनुवाद — अन-निसा 84

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Monday, September 28, 2026

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