अश-शूरा · 53/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
صِرَاطِ اللَّهِ الَّذِي لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ أَلَا إِلَى اللَّهِ تَصِيرُ الْأُمُورُ ۝٥٣
Siraatil laahil lazee lahoo maa fis samaawaati wa maa fil ard; alaaa ilal laahi taseerul umoor
📖 हिंदी अर्थ
(यानि) उसका रास्ता कि जो आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है सुन रखो सब काम ख़ुदा ही की तरफ रूजू होंगे और वही फैसला करेगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صِرَاطِ – मार्ग, रास्ता
  • تَصِيرُ – लौटकर जाना, अंततः पहुँचना
  • الأُمُورُ – सारे मामले, सभी कार्य

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत मुकर्रमा उस महान सत्य को बयान करती है जो ईमान की बुनियाद है। अल्लाह तआला फरमाता है कि यह सीधा रास्ता, जिसकी ओर पैगंबर ﷺ लोगों को बुलाते हैं, वह अल्लाह ही का रास्ता है। यह वही रास्ता है जो उसकी रहमत, उसकी जन्नत और उसकी रज़ा तक पहुँचाता है। यह कोई साधारण रास्ता नहीं, बल्कि उस मालिक का रास्ता है जिसके क़ब्ज़े में आसमानों की हर चीज़ और ज़मीन की हर चीज़ है। सारा जहान उसी की मिल्कियत है, उसी की पैदाइश है, और उसी के इख्तियार में है। कोई चीज़ उससे बाहर नहीं, कोई ताकत उसके मुकाबले में नहीं।

फिर अल्लाह तआला एक अहम हक़ीक़त की तरफ इशारा करता है: "सुन लो! सारे मामले अल्लाह ही की तरफ लौटकर जाने वाले हैं।" यानी इस दुनिया में चाहे जितने भी इख्तियारात हों, चाहे जितनी सरकारें और ताकतें हों, आखिरकार हर फैसला, हर मामला, हर इंसान की ज़िंदगी का हर पहलू उसी की तरफ लौटकर जाएगा। क़यामत के दिन सारे हुक्म उसी के होंगे। नेक लोगों के लिए इस आयत में खुशखबरी है कि उनका अंजाम अल्लाह की रहमत और जन्नत है, और गुनाहगारों के लिए चेतावनी है कि उन्हें अपने कर्मों का हिसाब देना होगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि ज़िंदगी का हर काम, हर फैसला और हर मंज़िल आखिरकार अल्लाह ही की तरफ है। इसलिए अक्लमंद इंसान वही है जो अपनी ज़िंदगी का रास्ता अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चले, क्योंकि यही वह रास्ता है जो कामयाबी और हमेशा की खुशियों तक पहुँचाता है। जो इंसान इस रास्ते पर चलता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता, और जो इससे हटता है, वह भटककर तबाही के गड्ढे में गिरता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें यकीन दिलाती है कि अल्लाह का दीन ही सच्चा रास्ता है। यह रास्ता हमें सुकून, इत्मिनान और सच्ची खुशी देता है। आओ हम अपनी ज़िंदगी के हर मामले को अल्लाह के हुक्म के मुताबिक बनाएँ, क्योंकि सारे मामले उसी की तरफ लौटने वाले हैं। जब हमें यकीन हो कि हर चीज़ उसी की मिल्कियत है और हर मामला उसी की तरफ जाना है, तो फिर हमें किसी और से डरने की ज़रूरत नहीं, और न ही किसी और से उम्मीद रखनी चाहिए। यही ईमान की मिठास है, और यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 51-53 — अश-शूरा

51۞ وَمَا كَانَ لِبَشَرٍ أَن يُكَلِّمَهُ اللَّهُ إِلَّا وَحْيًا أَوْ مِن وَرَاءِ حِجَابٍ أَوْ يُرْسِلَ رَسُولًا فَيُوحِيَ بِإِذْنِهِ مَا يَشَاءُ ۚ إِنَّهُ عَلِيٌّ حَكِيمٌ
और किसी आदमी के लिए ये मुमकिन नहीं कि ख़ुदा उससे बात करे मगर वही के ज़रिए से (जैसे) (दाऊद) परदे के पीछे से जैसे (मूसा) या कोई फ़रिश्ता भेज दे (जैसे मोहम्मद) ग़रज़ वह अपने एख्तेयार से जो चाहता है पैग़ाम भेज देता है बेशक वह आलीशान हिकमत वाला है
52وَكَذَٰلِكَ أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ رُوحًا مِّنْ أَمْرِنَا ۚ مَا كُنتَ تَدْرِي مَا الْكِتَابُ وَلَا الْإِيمَانُ وَلَٰكِن جَعَلْنَاهُ نُورًا نَّهْدِي بِهِ مَن نَّشَاءُ مِنْ عِبَادِنَا ۚ وَإِنَّكَ لَتَهْدِي إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और इसी तरह हमने अपने हुक्म को रूह (क़ुरान) तुम्हारी तरफ 'वही' के ज़रिए से भेजे तो तुम न किताब ही को जानते थे कि क्या है और न ईमान को मगर इस (क़ुरान) को एक नूर बनाया है कि इससे हम अपने बन्दों में से जिसकी चाहते हैं हिदायत करते हैं और इसमें शक़ नहीं कि तुम (ऐ रसूल) सीधा ही रास्ता दिखाते हो
53صِرَاطِ اللَّهِ الَّذِي لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ أَلَا إِلَى اللَّهِ تَصِيرُ الْأُمُورُ
(यानि) उसका रास्ता कि जो आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है सुन रखो सब काम ख़ुदा ही की तरफ रूजू होंगे और वही फैसला करेगा
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अनुवाद — अश-शूरा 53

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Tuesday, August 18, 2026

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