अज़-ज़ुखरुफ · 73/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
لَكُمْ فِيهَا فَاكِهَةٌ كَثِيرَةٌ مِّنْهَا تَأْكُلُونَ ۝٧٣
Lakum feehaa faakihatun kaseeratum minhaa taakuloon
📖 हिंदी अर्थ
वहाँ तुम्हारे वास्ते बहुत से मेवे हैं जिनको तुम खाओगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَاكِهَةٌ كَثِيرَةٌ – अनेक प्रकार के फल
  • مِنْهَا تَأْكُلُونَ – उन्हीं में से तुम खाओगे

तफसीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने नेक बंदों को जन्नत की उस नेमत की खुशखबरी दे रहे हैं, जो उनके लिए हमेशा के लिए तैयार की गई है। यह वही जन्नत है जिसका वादा अल्लाह ने अपने ईमानवालों से किया है। इस आयत में ख़ास तौर पर जन्नत के फलों का ज़िक्र किया गया है, कि वहाँ तुम्हारे लिए फलों की बहुतायत होगी, हर किस्म के फल मौजूद होंगे, और तुम उन्हें जब चाहोगे, जितना चाहोगे, खाओगे।

यहाँ "कसीरा" (बहुतायत) का लफ्ज़ बताता है कि जन्नत की नेमतें कभी खत्म नहीं होंगी, न कभी कम होंगी। दुनिया के फल मौसमी होते हैं, कुछ दिनों के बाद खत्म हो जाते हैं, लेकिन जन्नत के फल हमेशा रहने वाले हैं, उनका मौसम कभी नहीं जाता।

यह आयत मोमिनीन के लिए एक इनाम की खुशखबरी है, और साथ ही उन लोगों के लिए एक सबक भी है जो दुनिया की चंद रोज़ा ज़िंदगी में मशगूल हैं और आख़िरत को भूल गए हैं। अल्लाह ने अपने बंदों के लिए जो कुछ तैयार किया है, वह किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने उसका ख्याल नहीं किया।

प्यारे भाइयो और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत कितनी वसीअ है। उसने अपने बंदों के लिए ऐसी जगह तैयार की है जहाँ हर तरह की खुशियाँ और आराम है। बस ज़रूरत है तो अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों पर चलने की। जो लोग दुनिया में अल्लाह के हुक्म मानेंगे, वही इस नेमत के हक़दार होंगे।

अल्लाह हम सबको अपनी रहमत से जन्नत अता फरमाए और हमें अमल करने की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 71-75 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

71يُطَافُ عَلَيْهِم بِصِحَافٍ مِّن ذَهَبٍ وَأَكْوَابٍ ۖ وَفِيهَا مَا تَشْتَهِيهِ الْأَنفُسُ وَتَلَذُّ الْأَعْيُنُ ۖ وَأَنتُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
उन पर सोने की एक रिक़ाबियों और प्यालियों का दौर चलेगा और वहाँ जिस चीज़ को जी चाहे और जिससे ऑंखें लज्ज़त उठाएं (सब मौजूद हैं) और तुम उसमें हमेशा रहोगे
72وَتِلْكَ الْجَنَّةُ الَّتِي أُورِثْتُمُوهَا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और ये जन्नत जिसके तुम वारिस (हिस्सेदार) कर दिये गये हो तुम्हारी क़ारगुज़ारियों का सिला है
73لَكُمْ فِيهَا فَاكِهَةٌ كَثِيرَةٌ مِّنْهَا تَأْكُلُونَ
वहाँ तुम्हारे वास्ते बहुत से मेवे हैं जिनको तुम खाओगे
74إِنَّ الْمُجْرِمِينَ فِي عَذَابِ جَهَنَّمَ خَالِدُونَ
(गुनाहगार कुफ्फ़ार) तो यक़ीकन जहन्नुम के अज़ाब में हमेशा रहेगें
75لَا يُفَتَّرُ عَنْهُمْ وَهُمْ فِيهِ مُبْلِسُونَ
जो उनसे कभी नाग़ा न किया जाएगा और वह इसी अज़ाब में नाउम्मीद होकर रहेंगें
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
73आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 73

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वहाँ तुम्हारे वास्ते बहुत से मेवे हैं जिनको तुम खाओगे

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Saturday, October 3, 2026

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