अज़-ज़ुखरुफ · 74/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
إِنَّ الْمُجْرِمِينَ فِي عَذَابِ جَهَنَّمَ خَالِدُونَ ۝٧٤
Innal mujrimeena fee `azaabi jahannama khaalidoon
📖 हिंदी अर्थ
(गुनाहगार कुफ्फ़ार) तो यक़ीकन जहन्नुम के अज़ाब में हमेशा रहेगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अल-मुजरिमून (المجرمين): वे लोग जिन्होंने कु़फ़्र (अविश्वास) और गुनाहों को अपनी आदत बना लिया।
  • ख़ालिदून (خالدون): हमेशा रहने वाले, कभी समाप्त न होने वाला ठहराव।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के भयानक अंजाम को बयान करती है जिन्होंने अपने रब की नेमतों को ठुकराया और अपने गुनाहों में डूबे रहे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये मुजरिम (अपराधी) लोग, जिन्होंने कु़फ़्र और नाफ़रमानी का रास्ता चुना, क़यामत के दिन जहन्नम के अज़ाब में हमेशा-हमेशा के लिए डाल दिए जाएँगे। उनका यह अज़ाब कभी हल्का नहीं होगा, न ही उन्हें किसी तरह की राहत मिलेगी। वे अल्लाह की रहमत से बिल्कुल निराश हो जाएँगे और उनके लिए कोई उम्मीद की किरण नहीं बचेगी।

यहाँ एक बहुत ज़रूरी बात समझनी चाहिए कि अल्लाह तआला ने इन लोगों पर ज़ुल्म नहीं किया। अल्लाह तो बड़ा रहम वाला और इंसाफ़ करने वाला है। असल में ये लोग ख़ुद अपनी ज़ात पर ज़ुल्म करते रहे, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की इबादत छोड़ दी, उसके साथ शिर्क किया, और अपने रसूलों की पैरवी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने खुद अपने हाथों अपना अंजाम बिगाड़ा।

इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों की पैरवी को अपना निशाना बनाएँ। जो लोग दुनिया में अल्लाह के आगे झुकते हैं और उसकी राह पर चलते हैं, उनके लिए जन्नत की ख़ुशियाँ हैं। और जो लोग अल्लाह से मुँह मोड़ते हैं, उनका ठिकाना जहन्नम है। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं बदलता। हमें चाहिए कि हम अपने गुनाहों से तौबा करें, अल्लाह की रहमत की तरफ लौटें, क्योंकि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा वसीअ है। जो शख्स दुनिया में अल्लाह की रहमत का तालिब बन जाए, उसके लिए कामयाबी यक़ीनी है।



📜 आयत 72-76 — अज़-ज़ुखरुफ

72وَتِلْكَ الْجَنَّةُ الَّتِي أُورِثْتُمُوهَا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और ये जन्नत जिसके तुम वारिस (हिस्सेदार) कर दिये गये हो तुम्हारी क़ारगुज़ारियों का सिला है
73لَكُمْ فِيهَا فَاكِهَةٌ كَثِيرَةٌ مِّنْهَا تَأْكُلُونَ
वहाँ तुम्हारे वास्ते बहुत से मेवे हैं जिनको तुम खाओगे
74إِنَّ الْمُجْرِمِينَ فِي عَذَابِ جَهَنَّمَ خَالِدُونَ
(गुनाहगार कुफ्फ़ार) तो यक़ीकन जहन्नुम के अज़ाब में हमेशा रहेगें
75لَا يُفَتَّرُ عَنْهُمْ وَهُمْ فِيهِ مُبْلِسُونَ
जो उनसे कभी नाग़ा न किया जाएगा और वह इसी अज़ाब में नाउम्मीद होकर रहेंगें
76وَمَا ظَلَمْنَاهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا هُمُ الظَّالِمِينَ
और हमने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया बल्कि वह लोग ख़ुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
74आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 74

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सूरा आयत 74/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 72–76. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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