अज़-ज़ुखरुफ · 80/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
أَمْ يَحْسَبُونَ أَنَّا لَا نَسْمَعُ سِرَّهُمْ وَنَجْوَاهُم ۚ بَلَىٰ وَرُسُلُنَا لَدَيْهِمْ يَكْتُبُونَ ۝٨٠
Am yahsaboona annaa laa nasma`u sirrahum wa najwaahum; balaa wa Rusulunaa ladaihim yaktuboon
📖 हिंदी अर्थ
क्या ये लोग कुछ समझते हैं कि हम उनके भेद और उनकी सरग़ोशियों को नहीं सुनते हॉ (ज़रूर सुनते हैं) और हमारे फ़रिश्ते उनके पास हैं और उनकी सब बातें लिखते जाते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • सिर्रहुम (उनका भेद/राज़): वह बात जो वे अपने दिलों में छिपाते हैं या आपस में बहुत धीमे कहते हैं।
  • नज्वाहुम (उनकी सरगोशी/कानाफूसी): वह गुप्त बातें जो वे एक-दूसरे से धीमे स्वर में कहते हैं।
  • बल्या (हाँ، بلکہ): इसका अर्थ है "हाँ، یقیناً" — यहाँ इसका प्रयोग पुष्टि और दृढ़ता के लिए हुआ है।
  • रुसुलुना (हमारे भेजे हुए): यहाँ इससे अभिप्राय वे फ़रिश्ते हैं जो इंसानों के कर्म लिखने पर नियुक्त हैं।
  • लदैहिम (उनके पास): अर्थात उनके साथ हमेशा मौजूद रहते हैं।
  • यकतुबून (लिखते हैं): वे हर अच्छे और बुरे काम को दर्ज करते जाते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

इन आयतों में अल्लाह तआला उन लोगों की ग़लतफ़हमी का पर्दाफ़ाश कर रहा है जो यह समझते हैं कि उनके दिलों के राज़ और उनकी गुप्त बातें अल्लाह से छिपी रहेंगी। वे सोचते हैं कि जो बातें वे अपने दिलों में छिपाते हैं या आपस में कानाफूसी करके कहते हैं، उनका कोई हिसाब नहीं होगा। अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या वे लोग यह ख़्याल करते हैं कि हम उनके दिलों के भेद और उनकी सरगोशी नहीं सुनते؟ हरगिज़ नहीं! हम सब कुछ सुनते और जानते हैं। हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते हर वक़्त उनके पास मौजूद रहते हैं और उनके हर अमल को लिखते जाते हैं — चाहे वह ज़ाहिर हो या छिपा، چھوٹا हो या बड़ा।

यह आयत मोमिनों के लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी और डराने वाली नसीहत है। जिसे यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हर बात सुन रहा है और हर अमल लिखा जा रहा है، उसकी ज़ुबान गुनाह से रुक जाती है और उसका दिल नेकियों की तरफ़ झुक जाता है। यही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह की नाराज़गी से बचाती है और उसे सीधे रास्ते पर चलाती है। अल्लाह तआला का यह एलान कि "हमारे फ़रिश्ते तुम्हारे पास मौजूद हैं اور लिख रहे हैं" — यह हमारे लिए एक बड़ी नेमत है कि हमारा हर अमल अल्लाह के हुज़ूर में दर्ज हो रहा है، ताकि क़यामत के दिन हमारे साथ इंसाफ़ किया जाए। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी ज़ुबान، अपने दिल और अपने आमाल को पाक रखे، क्योंकि अल्लाह सब कुछ देखता और सुनता है، और उसका हिसाब बिल्कुल सटीक होगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 78-82 — अज़-ज़ुखरुफ

78لَقَدْ جِئْنَاكُم بِالْحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَكُمْ لِلْحَقِّ كَارِهُونَ
(ऐ कुफ्फ़ार मक्का) हम तो तुम्हारे पास हक़ लेकर आयें हैं तुम मे से बहुत से हक़ (बात से चिढ़ते) हैं
79أَمْ أَبْرَمُوا أَمْرًا فَإِنَّا مُبْرِمُونَ
क्या उन लोगों ने कोई बात ठान ली है हमने भी (कुछ ठान लिया है)
80أَمْ يَحْسَبُونَ أَنَّا لَا نَسْمَعُ سِرَّهُمْ وَنَجْوَاهُم ۚ بَلَىٰ وَرُسُلُنَا لَدَيْهِمْ يَكْتُبُونَ
क्या ये लोग कुछ समझते हैं कि हम उनके भेद और उनकी सरग़ोशियों को नहीं सुनते हॉ (ज़रूर सुनते हैं) और हमारे फ़रिश्ते उनके पास हैं और उनकी सब बातें लिखते जाते हैं
81قُلْ إِن كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ وَلَدٌ فَأَنَا أَوَّلُ الْعَابِدِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ख़ुदा की कोई औलाद होती तो मैं सबसे पहले उसकी इबादत को तैयार हूँ
82سُبْحَانَ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبِّ الْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो कुछ बयान करते हैं सारे आसमान व ज़मीन का मालिक अर्श का मालिक (ख़ुदा) उससे पाक व पाक़ीज़ा है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
80आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 80

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 80 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या ये लोग कुछ समझते हैं कि हम उनके भेद…

सूरा आयत 80/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 78–82. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए