अज़-ज़ुखरुफ · 79/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
أَمْ أَبْرَمُوا أَمْرًا فَإِنَّا مُبْرِمُونَ ۝٧٩
Am abramooo amran fainnaa mubrimoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन लोगों ने कोई बात ठान ली है हमने भी (कुछ ठान लिया है)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَبْرَمُوا: उन्होंने मज़बूत किया, पक्का किया
  • أَمْرًا: कोई योजना, चाल या साज़िश
  • مُبْرِمُونَ: हम भी मज़बूत करने वाले हैं, अर्थात हमारी योजना भी पक्की है

तफ़सीर:

इन मुशरिकों ने सोचा कि वे अपनी चालों और साज़िशों से इस्लाम के दीने हक़ को नष्ट कर देंगे और रसूलुल्लाह ﷺ की दावत को बेअसर कर देंगे। उन्होंने अपनी योजनाएँ बनाईं, अपने जाल बिछाए और अपनी ताक़त पर भरोसा किया। लेकिन वे भूल गए कि इस क़ुरआन के पीछे और इस दावत के पीछे वह ज़ात है जो सबसे बड़ी तदबीर करने वाली है, सबसे मज़बूत योजना बनाने वाली है।

अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं: क्या उन्होंने सोचा कि उन्होंने अपना मामला पक्का कर लिया है? तो हम भी अपना मामला पक्का कर रहे हैं। यानी जिस तरह वे अपनी चालें चल रहे हैं, हम भी उनके ख़िलाफ़ अपनी तदबीर कर रहे हैं — और हमारी तदबीर सबसे बेहतर और सबसे मज़बूत है। वे चाहे जितनी भी साज़िशें कर लें, अल्लाह की योजना उनकी सारी योजनाओं पर भारी पड़ने वाली है।

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक बड़ी तसल्ली और हौसला है जो अल्लाह के दीन पर क़ायम है। चाहे दुश्मन कितनी भी ताक़त जुटा लें, कितनी ही चालें चल लें, अल्लाह का वादा है कि वह अपने दीन को ग़ालिब करके रहेगा और अपने नबी की मदद करके रहेगा। यही वजह है कि हम देखते हैं कि हर दौर में अल्लाह के दुश्मनों की साज़िशें नाकाम हुई हैं और अल्लाह का दीन बुलंद होता रहा है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें कभी भी दुश्मनों की तादाद और उनकी ताक़त से डरना नहीं चाहिए। हमारा भरोसा अल्लाह पर होना चाहिए, क्योंकि वही सबसे बड़ा योजनाकार है और उसकी योजना के आगे सारी योजनाएँ बेकार हैं। जो लोग अल्लाह के दीन की मदद करते हैं, अल्लाह उनकी मदद ज़रूर करता है — यह अल्लाह का पक्का वादा है जो कभी टलता नहीं।



📜 आयत 77-81 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

77وَنَادَوْا يَا مَالِكُ لِيَقْضِ عَلَيْنَا رَبُّكَ ۖ قَالَ إِنَّكُم مَّاكِثُونَ
और (जहन्नुमी) पुकारेगें कि ऐ मालिक (दरोग़ा ए जहन्नुम कोई तरकीब करो) तुम्हारा परवरदिगार हमें मौत ही दे दे वह जवाब देगा कि तुमको इसी हाल में रहना है
78لَقَدْ جِئْنَاكُم بِالْحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَكُمْ لِلْحَقِّ كَارِهُونَ
(ऐ कुफ्फ़ार मक्का) हम तो तुम्हारे पास हक़ लेकर आयें हैं तुम मे से बहुत से हक़ (बात से चिढ़ते) हैं
79أَمْ أَبْرَمُوا أَمْرًا فَإِنَّا مُبْرِمُونَ
क्या उन लोगों ने कोई बात ठान ली है हमने भी (कुछ ठान लिया है)
80أَمْ يَحْسَبُونَ أَنَّا لَا نَسْمَعُ سِرَّهُمْ وَنَجْوَاهُم ۚ بَلَىٰ وَرُسُلُنَا لَدَيْهِمْ يَكْتُبُونَ
क्या ये लोग कुछ समझते हैं कि हम उनके भेद और उनकी सरग़ोशियों को नहीं सुनते हॉ (ज़रूर सुनते हैं) और हमारे फ़रिश्ते उनके पास हैं और उनकी सब बातें लिखते जाते हैं
81قُلْ إِن كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ وَلَدٌ فَأَنَا أَوَّلُ الْعَابِدِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ख़ुदा की कोई औलाद होती तो मैं सबसे पहले उसकी इबादत को तैयार हूँ
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
79आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 79

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों ने कोई बात ठान ली है हमने…

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Friday, October 2, 2026

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