अज़-ज़ुखरुफ · 81/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
قُلْ إِن كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ وَلَدٌ فَأَنَا أَوَّلُ الْعَابِدِينَ ۝٨١
Qul in kaana lir Rahmaani walad; fa-ana awwalul `aabideen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ख़ुदा की कोई औलाद होती तो मैं सबसे पहले उसकी इबादत को तैयार हूँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَلَدٌ (वलद): संतान, बेटा।
  • أَوَّلُ الْعَابِدِينَ (अव्वलुल आबिदीन): सबसे पहले इबादत करने वाला, यानी सबसे अग्रणी और सबसे बढ़कर आज्ञा मानने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन मुशरिकों से कह दीजिए जो यह झूठा दावा करते हैं कि अल्लाह के बेटियाँ हैं (फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहते थे) — अगर सचमुच रहमान (अल्लाह) की कोई संतान होती, जैसा कि तुम्हारा दावा है, तो मैं सबसे पहले उसकी इबादत और भक्ति करने वाला होता। लेकिन यह बात सरासर झूठ और बुनियादी रूप से ग़लत है। अल्लाह तआला हर उस चीज़ से पाक और मुक़द्दस है जो तुम उसके बारे में कहते हो। उसकी कोई पत्नी नहीं, कोई संतान नहीं, कोई साथी नहीं। वह एक है, अकेला है, बेनियाज़ है। मैं तो सबसे पहले उसी अल्लाह की इबादत करने वाला हूँ जो इन सब झूठे गुणों से पाक है, और मैं उसकी तौहीद (एकता) का गवाह हूँ।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ज़ात के बारे में कोई भी ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए जो उसकी शान के ख़िलाफ़ हो। अल्लाह हर ऐब और कमी से पाक है। हमें चाहिए कि हम उसकी तौहीद पर दृढ़ रहें, उसकी इबादत में किसी को शरीक न करें, और उसके नामों और सिफ़ात को वैसे ही मानें जैसे उसने ख़ुद बयान किए हैं। यही सच्ची इबादत है, और यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है। जो लोग अल्लाह के बारे में झूठी बातें गढ़ते हैं, वे सिर्फ़ अपना नुक़सान करते हैं, क्योंकि अल्लाह की शान उनकी बातों से बहुत ऊँची है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह को उसी तरह पहचानें जैसा उसने अपनी किताब और अपने रसूल ﷺ के ज़रिए बताया है — वही सबसे बड़ी सच्चाई और सबसे अच्छी राह है।



📜 आयत 79-83 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

79أَمْ أَبْرَمُوا أَمْرًا فَإِنَّا مُبْرِمُونَ
क्या उन लोगों ने कोई बात ठान ली है हमने भी (कुछ ठान लिया है)
80أَمْ يَحْسَبُونَ أَنَّا لَا نَسْمَعُ سِرَّهُمْ وَنَجْوَاهُم ۚ بَلَىٰ وَرُسُلُنَا لَدَيْهِمْ يَكْتُبُونَ
क्या ये लोग कुछ समझते हैं कि हम उनके भेद और उनकी सरग़ोशियों को नहीं सुनते हॉ (ज़रूर सुनते हैं) और हमारे फ़रिश्ते उनके पास हैं और उनकी सब बातें लिखते जाते हैं
81قُلْ إِن كَانَ لِلرَّحْمَٰنِ وَلَدٌ فَأَنَا أَوَّلُ الْعَابِدِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ख़ुदा की कोई औलाद होती तो मैं सबसे पहले उसकी इबादत को तैयार हूँ
82سُبْحَانَ رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبِّ الْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो कुछ बयान करते हैं सारे आसमान व ज़मीन का मालिक अर्श का मालिक (ख़ुदा) उससे पाक व पाक़ीज़ा है
83فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ
तो तुम उन्हें छोड़ दो कि पड़े बक बक करते और खेलते रहते हैं यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
81आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 81

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Saturday, October 3, 2026

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