अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَشْرَاطُهَا: इसके चिन्ह और निशानियाँ।
- بَغْتَةً: अचानक, बिना किसी पूर्व सूचना के।
- ذِكْرَاهُمْ: उनकी नसीहत याद दिलाना, यानी उस वक्त उन्हें कोई नसीहत याद नहीं आएगी।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो क़यामत के दिन को झुठलाते हैं और मज़ाक उड़ाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या ये लोग बस इसी का इंतज़ार कर रहे हैं कि क़यामत उन पर अचानक आ जाए? यानी वे दुनिया में अपनी ग़फलत और अकड़ में डूबे हुए हैं, और उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं कि उनके सामने क्या आने वाला है।
अल्लाह फ़रमाता है कि क़यामत की निशानियाँ आ चुकी हैं। इन निशानियों में सबसे बड़ी निशानी हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का मुबारक वजूद है, जिन्हें अल्लाह ने आख़िरी नबी बनाकर भेजा। साथ ही चाँद का दो टुकड़े होना, और अन्य कई निशानियाँ भी आ चुकी हैं। इसके बावजूद ये लोग नसीहत हासिल नहीं करते।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: जब क़यामत आ जाएगी, तो उस वक्त उन्हें नसीहत कहाँ से मिलेगी? उस वक्त तो सिर्फ पछतावा और अफ़सोस होगा, लेकिन वह पछतावा उनके किसी काम नहीं आएगा। आज जब उनके पास किताब और रसूल का पैग़ाम है, वे उससे मुँह मोड़ रहे हैं, तो क़यामत के दिन उन्हें क्या हासिल होगा? वहाँ तो सिर्फ अज़ाब और रुसवाई है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बहुत बड़ी सीख देती है कि हमें आज ही अपनी ज़िंदगी सुधार लेनी चाहिए। अल्लाह ने हमें रहमत से भरपूर दुनिया दी है, और हमें चेतावनी देने के लिए अपने नबी और किताब भेजी है। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है कि उसने हमें मौका दिया है कि हम तौबा कर लें और अपने अमल सुधार लें। क़यामत का दिन जब आएगा, तो कोई मौका नहीं मिलेगा। इसलिए आज ही उठें, नमाज़ की पाबंदी करें, अल्लाह की इबादत करें, और अपने गुनाहों से तौबा करें। यही सबसे बड़ी कामयाबी है। अल्लाह हमें अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 16-20 — सूरा मुहम्मद
अनुवाद — मुहम्मद 18
सूरा मुहम्मद आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या ये लोग बस क़यामत ही के मुनतज़िर हैं…सूरा आयत 18/38 — सूरा मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मुहम्मद सुनें, सूरा मुहम्मद अनुवाद, सूरा मुहम्मद mp3, सूरा मुहम्मद pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 7, 2026
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