अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- عَسَيْتُمْ – शायद तुम, संभावना है कि तुम
- تَوَلَّيْتُمْ – यदि तुम मुँह मोड़ लो, पीठ फेर लो
- تُفْسِدُوا – तुम फसाद फैलाओ, बिगाड़ पैदा करो
- أَرْحَامَكُمْ – अपने रिश्तेदारियों के संबंध, नाते-रिश्ते
तफसीर:
अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को एक बहुत ही गंभीर सवाल के ज़रिए सावधान कर रहे हैं। वह फ़रमाते हैं: "क्या तुमसे यही उम्मीद है कि अगर तुम इस्लाम की राह से, क़ुरआन और सुन्नत की पैरवी से मुँह मोड़ लो, तो तुम धरती पर फसाद फैलाओगे और अपने रिश्तेदारों के साथ नाता तोड़ोगे?"
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो ईमान लाने के बाद भी जब इस्लामी शिक्षाओं से विमुख हो जाते हैं, तो उनका हाल जाहिलियत के ज़माने जैसा हो जाता है। वे खून बहाते हैं, अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं, और रिश्तेदारों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि अगर तुमने इस्लाम को छोड़ दिया, तो तुम्हारा अंजाम यही होगा कि तुम ज़मीन पर फसाद फैलाओगे और रिश्तों को काट डालोगे।
यह एक ऐतिबार (फटकार) और चेतावनी है कि इस्लाम ही वह चीज़ है जो इंसान को अच्छाई, भलाई, आपसी मुहब्बत और रिश्तों की क़द्र सिखाती है। जब इंसान इस्लाम से दूर होता है, तो उसका दिल सख्त हो जाता है, वह स्वार्थी बन जाता है, और समाज में बिगाड़ पैदा करता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ नमाज़ और रोज़े का नाम नहीं, बल्कि यह पूरे जीवन का निज़ाम है। इस्लाम ही है जो हमें सिखाता है कि रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करो, उनके हालचाल पूछो, उनकी मदद करो। जब हम इस्लाम पर अमल करते हैं, तो हमारा दिल नर्म होता है, हममें मुहब्बत और रहम पैदा होता है। और जब हम इस्लाम से दूर होते हैं, तो हमारे अंदर नफ़रत, ईर्ष्या और स्वार्थ पैदा होता है, जो समाज को तबाह कर देता है।
आज हम देखते हैं कि जिन समाजों में इस्लाम की शिक्षाओं को छोड़ दिया गया, वहाँ रिश्ते टूट रहे हैं, परिवार बिखर रहे हैं, और लोग एक-दूसरे के दुश्मन बन गए हैं। यह आयत हमें आगाह करती है कि अल्लाह की राह पर चलो, क़ुरआन और सुन्नत को अपनाओ, ताकि तुम्हारे दिलों में मुहब्बत बनी रहे, तुम्हारे रिश्ते मज़बूत रहें, और समाज में अमन और सुकून क़ायम रहे।
इसलिए हमें चाहिए कि हम हमेशा क़ुरआन और सुन्नत को अपना रहनुमा बनाएँ, और उन चीज़ों से बचें जो हमें अल्लाह की राह से दूर करें। याद रखें, इस्लाम ही हमारी कामयाबी और खुशी की कुंजी है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 20-24 — मुहम्मद
अनुवाद — मुहम्मद 22
सूरा मुहम्मद आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुनाफ़िक़ों) क्या तुमसे कुछ दूर है कि अगर तुम हाक़िम…सूरा आयत 22/38 — मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मुहम्मद सुनें, मुहम्मद अनुवाद, मुहम्मद mp3, मुहम्मद pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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