मुहम्मद · 23/38
अनुवाद उच्चारण — सूरा मुहम्मद
أُولَٰئِكَ الَّذِينَ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فَأَصَمَّهُمْ وَأَعْمَىٰ أَبْصَارَهُمْ ۝٢٣
Ulaaa`ikal lazeena la`anahumul laahu fa asammahum wa a`maaa absaarahum
📖 हिंदी अर्थ
और (गोया ख़ुद उसने) उन (के कानों) को बहरा और ऑंखों को अंधा कर दिया है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَعَنَهُمُ اللهُ: अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से दूर कर दिया।
  • فَأَصَمَّهُمْ: उनके कानों को सत्य सुनने से बहरा कर दिया।
  • وَأَعْمَىٰ أَبْصَارَهُمْ: उनकी आँखों (दृष्टि) को अंधा कर दिया, यानी उनकी समझ और विवेक की आँखें बंद कर दीं।

तफसीर (व्याख्या):

ये वे लोग हैं जिन्हें अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से महरूम (दूर) कर दिया है। यह महरूमी उनके अपने कर्मों का नतीजा है, क्योंकि उन्होंने ज़मीन में फसाद (बिगाड़) फैलाया और रिश्तों को तोड़ा। अल्लाह ने उनके कानों को इस क़दर बहरा कर दिया कि वे सत्य की आवाज़ सुनकर भी उसे क़बूल नहीं करते, और उनकी आँखों को अंधा कर दिया कि वे अल्लाह की निशानियों और हिदायत के रास्ते को देखकर भी उस पर अमल नहीं करते। यह अंधापन और बहरापन सिर्फ़ ज़ाहिरी नहीं, बल्कि दिल की आँखों और कानों का अंधापन है, जिससे वे हक़ को समझने और उसे अपनाने से वंचित हो गए।

यह आयत हमें चेतावनी देती है कि अल्लाह की नाफ़रमानी और उसके हुक्मों से मुँह मोड़ना इंसान को धीरे-धीरे ऐसे हालात में ले जाता है कि उसका दिल सत्य के लिए बंद हो जाता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को साफ़ रखें, अल्लाह के ज़िक्र से जोड़े रखें और उसकी नाफ़रमानी से बचें, ताकि हमारे दिल सत्य को सुनने और समझने की तौफ़ीक़ पाते रहें। याद रखें, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, तौबा करते हैं और अपने अमल को सुधारते हैं। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और क्षमा करने वाला है, वह हर उस बंदे को क़बूल करता है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ लौटता है।



📜 आयत 21-25 — सूरा मुहम्मद

21طَاعَةٌ وَقَوْلٌ مَّعْرُوفٌ ۚ فَإِذَا عَزَمَ الْأَمْرُ فَلَوْ صَدَقُوا اللَّهَ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُمْ
(उनके लिए अच्छा काम तो) फरमाबरदारी और पसन्दीदा बात है फिर जब लड़ाई ठन जाए तो अगर ये लोग ख़ुदा से सच्चे रहें तो उनके हक़ में बहुत बेहतर है
22فَهَلْ عَسَيْتُمْ إِن تَوَلَّيْتُمْ أَن تُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ وَتُقَطِّعُوا أَرْحَامَكُمْ
(मुनाफ़िक़ों) क्या तुमसे कुछ दूर है कि अगर तुम हाक़िम बनो तो रूए ज़मीन में फसाद फैलाने और अपने रिश्ते नातों को तोड़ने लगो ये वही लोग हैं जिन पर ख़ुदा ने लानत की है
23أُولَٰئِكَ الَّذِينَ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فَأَصَمَّهُمْ وَأَعْمَىٰ أَبْصَارَهُمْ
और (गोया ख़ुद उसने) उन (के कानों) को बहरा और ऑंखों को अंधा कर दिया है
24أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْآنَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَا
तो क्या लोग क़ुरान में (ज़रा भी) ग़ौर नहीं करते या (उनके) दिलों पर ताले लगे हुए हैं
25إِنَّ الَّذِينَ ارْتَدُّوا عَلَىٰ أَدْبَارِهِم مِّن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَى ۙ الشَّيْطَانُ سَوَّلَ لَهُمْ وَأَمْلَىٰ لَهُمْ
बेशक जो लोग राहे हिदायत साफ़ साफ़ मालूम होने के बाद उलटे पाँव (कुफ़्र की तरफ) फिर गये शैतान ने उन्हें (बुते देकर) ढील दे रखी है और उनकी (तमन्नाओं) की रस्सियाँ दराज़ कर दी हैं
मुहम्मदकुरान सूची
38आयत
मदनीअवतरण स्थान
23आयत

अनुवाद — मुहम्मद 23

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Thursday, October 1, 2026

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