Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عُثِرَ (उसिरा): पता चलना, भेद खुलना, किसी बात का पर्दाफाश हो जाना।
- اسْتَحَقَّا إِثْمًا (इस्तहक़्क़ा इस्मन): उन्होंने गुनाह कमाया, यानी झूठी गवाही या ख़ियानत के ज़रिए गुनाह के हक़दार बने।
- يَقُومَانِ مَقَامَهُمَا (यक़ूमानि मक़ामहुमा): उनकी जगह खड़े हों, उनका स्थान लें।
- اسْتَحَقَّ عَلَيْهِمُ الْأَوْلَيَانِ (इस्तहक़्क़ा अलैहिमुल अवलयानि): जिनके मामले में पहले दो गवाहों ने गुनाह कमाया, यानी मृतक के वारिस।
- اعْتَدَيْنَا (इ'तदैना): हमने हद से तजावुज़ किया, ज़ुल्म किया।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में शहादत (गवाही) के मामले की एक और बारीक स्थिति बयान कर रहे हैं। जब वसीयत के सिलसिले में दो गवाहों की गवाही ली जाती है और बाद में यह बात खुल जाए कि उन दोनों ने झूठी गवाही दी थी, या उन्होंने वसीयत में ख़ियानत की थी और इस तरह वे गुनाह के हक़दार बने, तो क्या किया जाए?
इसका हल यह है कि मृतक के वारिसों में से दो और नेक लोग उठें और उन दोनों झूठे गवाहों की जगह खड़े हों। ये दोनों वारिस अल्लाह की क़सम खाकर गवाही दें कि "हमारी गवाही उन दोनों की गवाही से ज़्यादा सच्ची और हक़ पर है, और हमने कोई ज़ुल्म या हद से तजावुज़ नहीं किया। अगर हमने झूठी गवाही दी या ज़ुल्म किया, तो हम भी उन्हीं ज़ालिमों में से होंगे।"
यानी अल्लाह तआला ने हक़ और इंसाफ़ के लिए एक पूरा सिस्टम बनाया है। अगर गवाही में ख़ियानत हो जाए, तो उसे भी बेनक़ाब किया जा सकता है। यह इस्लाम का वह अदालती निज़ाम है जो हर हाल में सच्चाई को उजागर करने का तरीक़ा सिखाता है।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि गवाही में सच्चाई पर क़ायम रहना कितनी बड़ी ज़िम्मेदारी है। झूठी गवाही देना और ख़ियानत करना बड़े गुनाह हैं, और अल्लाह के यहाँ इसकी सख़्त सज़ा है। साथ ही, अगर किसी को पता चले कि गवाही में धोखा हुआ है, तो उसे चुप नहीं बैठना चाहिए, बल्कि हक़ के लिए खड़ा होना चाहिए।
यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि हमेशा सच बोलें, चाहे मामला किसी का भी हो। अल्लाह तआला सच्चों के साथ है और झूठे लोगों का अंजाम बुरा है। इस्लाम का दीन हमें इंसाफ़, सच्चाई और अमानतदारी की तालीम देता है, ताकि समाज में भरोसा और सुकून क़ायम रहे।
📜 आयत 105-109 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 107
सूरा अल-माइदा आयत 107 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर इस पर मालूम हो जाए कि वह दोनों (दरोग़…सूरा आयत 107/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 105–109. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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