Wa qaffainaa `alaaa aasaaarihim bi `Eesab ni Maryama musaddiqal limaa baina yadihi minat Tawraati wa aatainaahul Injeela feehi hudanw wa noorunw wa musaddiqal limaa baina yadaihi minat Tawraati wa hudanw wa maw`izatal lilmuttaqeen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और हम ने उन्हीं पैग़म्बरों के क़दम ब क़दम मरियम के बेटे ईसा को चलाया और वह इस किताब तौरैत की भी तस्दीक़ करते थे जो उनके सामने (पहले से) मौजूद थी और हमने उनको इन्जील (भी) अता की जिसमें (लोगों के लिए हर तरह की) हिदायत थी और नूर (ईमान) और वह इस किताब तौरेत की जो वक्ते नुज़ूले इन्जील (पहले से) मौजूद थी तसदीक़ करने वाली और परहेज़गारों की हिदायत व नसीहत थी
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اور ان پیغمبروں کے بعد انہی کے قدموں پر ہم نے عیسیٰ بن مریم کو بھیجا جو اپنے سے پہلے کی کتاب تورات کی تصدیق کرتے تھے اور ان کو انجیل عنایت کی جس میں ہدایت اور نور ہے اور تورات کی جو اس سے پہلی کتاب (ہے) تصدیق کرتی ہے اور پرہیزگاروں کو راہ بتاتی اور نصیحت کرتی ہے
और हम ने उन्हीं पैग़म्बरों के क़दम ब क़दम मरियम के बेटे ईसा को चलाया और वह इस किताब तौरैत की भी तस्दीक़ करते थे जो उनके सामने (पहले से) मौजूद थी और हमने उनको इन्जील (भी) अता की जिसमें (लोगों के लिए हर तरह की) हिदायत थी और नूर (ईमान) और वह इस किताब तौरेत की जो वक्ते नुज़ूले इन्जील (पहले से) मौजूद थी तसदीक़ करने वाली और परहेज़गारों की हिदायत व नसीहत थी
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
وَقَفَّيْنَا: हमने पीछे-पीछे भेजा, अनुगमन कराया।
عَلَىٰ آثَارِهِم: उन (पिछले नबियों) के निशानों पर।
مُصَدِّقًا: सत्यापित करने वाला, पुष्टि करने वाला।
لِمَا بَيْنَ يَدَيْهِ: जो उसके सामने (पहले से मौजूद) है।
هُدًى: मार्गदर्शन।
نُورٌ: प्रकाश, रोशनी।
مَوْعِظَةً: नसीहत, उपदेश।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने बनी इसराईल के नबियों के सिलसिले को जारी रखते हुए उन्हीं के निशानों पर ईसा (अलैहिस्सलाम) को भेजा, जो मरयम (अलैहिस्सलाम) के बेटे थे। वे इस स्थिति में आए कि उन्होंने उस तौरात को सच माना जो उनसे पहले उतारी गई थी और उसके अनुसार अमल किया, सिवाय उन आदेशों के जिन्हें अल्लाह ने उनके लिए बदला। अल्लाह ने उन्हें इंजील प्रदान की, जो सत्य की ओर मार्गदर्शन करने वाली, अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर लाने वाली और संदेहों को दूर करने वाली किताब थी। यह इंजील तौरात की पुष्टि करती थी, उसकी सच्चाई की गवाही देती थी और उसके अधिकांश आदेशों की पुष्टि करती थी, सिवाय उन मामलों के जिन्हें अल्लाह ने नया नियम बनाया। इंजील को अल्लाह ने उन लोगों के लिए मार्गदर्शन और डराने वाला उपदेश बनाया जो अल्लाह से डरते हैं, उसकी अवज्ञा से बचते हैं और उसके आदेशों का पालन करते हैं। यह उन्हें अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करती है और बुरे कर्मों से रोकती है।
फ़ायदे (लाभ):
अल्लाह तआला ने अपने नबियों को क्रमबद्ध रूप से भेजा, जो उनकी रहमत और हिदायत का प्रमाण है। यह दर्शाता है कि अल्लाह कभी भी अपने बंदों को बिना मार्गदर्शन के नहीं छोड़ता।
हर नबी अपने से पहले की किताब को सच मानता था और उसकी पुष्टि करता था, जिससे पता चलता है कि सभी आसमानी किताबें एक ही स्रोत से हैं और उनका उद्देश्य एक ही है — अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा का पालन।
इंजील में "हुदा" (मार्गदर्शन) और "नूर" (प्रकाश) का वर्णन हमें सिखाता है कि अल्लाह की किताबें अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाती हैं, और यही कुरआन का भी गुण है — यह पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शन और प्रकाश है।
"मविज़ा" (उपदेश) का उल्लेख बताता है कि अल्लाह की किताबें सिर्फ़ कानून नहीं देतीं, बल्कि दिलों को नरम करने और आत्मा को पवित्र करने का भी काम करती हैं। यह हमें सिखाता है कि कुरआन को सिर्फ़ पढ़ना नहीं, बल्कि उससे नसीहत लेना और उस पर अमल करना ज़रूरी है।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के नबियों के बीच कोई विरोध नहीं था, बल्कि वे एक दूसरे की पुष्टि करते थे। इसलिए हमें सभी नबियों पर ईमान लाना चाहिए और उनके बीच कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए।
बेशक हम ने तौरेत नाज़िल की जिसमें (लोगों की) हिदायत और नूर (ईमान) है उसी के मुताबिक़ ख़ुदा के फ़रमाबरदार बन्दे (अम्बियाए बनी इसराईल) यहूदियों को हुक्म देते रहे और अल्लाह वाले और उलेमाए (यहूद) भी किताबे ख़ुदा से (हुक्म देते थे) जिसके वह मुहाफ़िज़ बनाए गए थे और वह उसके गवाह भी थे पस (ऐ मुसलमानों) तुम लोगों से (ज़रा भी) न डरो (बल्कि) मुझ ही से डरो और मेरी आयतों के बदले में (दुनिया की दौलत जो दर हक़ीक़त बहुत थोड़ी क़ीमत है) न लो और (समझ लो कि) जो शख्स ख़ुदा की नाज़िल की हुई (किताब) के मुताबिक़ हुक्म न दे तो ऐसे ही लोग काफ़िर हैं
और हम ने तौरेत में यहूदियों पर यह हुक्म फर्ज क़र दिया था कि जान के बदले जान और ऑख के बदले ऑख और नाक के बदले नाक और कान के बदले कान और दॉत के बदले दॉत और जख्म के बदले (वैसा ही) बराबर का बदला (जख्म) है फिर जो (मज़लूम ज़ालिम की) ख़ता माफ़ कर दे तो ये उसके गुनाहों का कफ्फ़ारा हो जाएगा और जो शख्स ख़ुदा की नाज़िल की हुई (किताब) के मुवाफ़िक़ हुक्म न दे तो ऐसे ही लोग ज़ालिम हैं
और हम ने उन्हीं पैग़म्बरों के क़दम ब क़दम मरियम के बेटे ईसा को चलाया और वह इस किताब तौरैत की भी तस्दीक़ करते थे जो उनके सामने (पहले से) मौजूद थी और हमने उनको इन्जील (भी) अता की जिसमें (लोगों के लिए हर तरह की) हिदायत थी और नूर (ईमान) और वह इस किताब तौरेत की जो वक्ते नुज़ूले इन्जील (पहले से) मौजूद थी तसदीक़ करने वाली और परहेज़गारों की हिदायत व नसीहत थी
और इन्जील वालों (नसारा) को जो कुछ ख़ुदा ने (उसमें) नाज़िल किया है उसके मुताबिक़ हुक्म करना चाहिए और जो शख्स ख़ुदा की नाज़िल की हुई (किताब के मुआफ़िक) हुक्म न दे तो ऐसे ही लोग बदकार हैं
और (ऐ रसूल) हमने तुम पर भी बरहक़ किताब नाज़िल की जो किताब (उसके पहले से) उसके वक्त में मौजूद है उसकी तसदीक़ करती है और उसकी निगेहबान (भी) है जो कुछ तुम पर ख़ुदा ने नाज़िल किया है उसी के मुताबिक़ तुम भी हुक्म दो और जो हक़ बात ख़ुदा की तरफ़ से आ चुकी है उससे कतरा के उन लोगों की ख्वाहिशे नफ़सियानी की पैरवी न करो और हमने तुम में हर एक के वास्ते (हस्बे मसलेहते वक्त) एक एक शरीयत और ख़ास तरीक़े पर मुक़र्रर कर दिया और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सब के सब को एक ही (शरीयत की) उम्मत बना देता मगर (मुख़तलिफ़ शरीयतों से) ख़ुदा का मतलब यह था कि जो कुछ तुम्हें दिया है उसमें तुम्हारा इमतेहान करे बस तुम नेकी में लपक कर आगे बढ़ जाओ और (यक़ीन जानो कि) तुम सब को ख़ुदा ही की तरफ़ लौट कर जाना है
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