अल-माइदा · 92/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ وَاحْذَرُوا ۚ فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ ۝٩٢
Wa atee`ul laaha wa atee`ur Rasoola wahzaroo; fa in tawal laitum fa`lamooo annamaa `alaa Rasoolinal balaaghul mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा का हुक्म मानों और रसूल का हुक्म मानों और (नाफ़रमानी) से बचे रहो इस पर भी अगर तुमने (हुक्म ख़ुदा से) मुँह फेरा तो समझ रखो कि हमारे रसूल पर बस साफ़ साफ़ पैग़ाम पहुँचा देना फर्ज है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاحْذَرُوا: सावधान रहो, डरो (अल्लाह की नाफ़रमानी से)।
  • تَوَلَّيْتُمْ: तुम मुँह मोड़ लो, अर्थात आज्ञा का पालन करने से इनकार कर दो।
  • الْبَلَاغُ الْمُبِينُ: स्पष्ट रूप से (संदेश) पहुँचा देना, जिसमें कोई अस्पष्टता या छिपाव न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और उसके रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की आज्ञा का भी पालन करो, और अल्लाह की अवज्ञा और उसकी मनाही की गई चीज़ों से सावधान रहो। अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करने का अर्थ है—जो आदेश दिया जाए उसे मानना और जिससे रोका जाए उससे बचना। यदि तुम इस आज्ञा का पालन करने से मुँह मोड़ लो और उसे ठुकरा दो, तो जान लो कि हमारे रसूल पर केवल स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचाने की ज़िम्मेदारी है, और उन्होंने यह ज़िम्मेदारी पूरी कर दी है। उनका काम केवल संदेश पहुँचाना है, लोगों को मजबूर करना नहीं। यदि तुम हिदायत (मार्गदर्शन) पर चलोगे तो इसका लाभ तुम्हें ही मिलेगा, और यदि तुम बुराई करोगे तो उसका नुक़सान तुम्हीं को होगा। अल्लाह ने अपने रसूल के माध्यम से हर वह चीज़ स्पष्ट कर दी है जो हलाल (वैध) और हराम (अवैध) है, और उन्होंने यह संदेश पूरी तरह पहुँचा दिया है। अतः तुम्हारे पास कोई बहाना नहीं बचता।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करना ही सच्ची कामयाबी का रास्ता है, और यही ईमान की पहचान है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का काम केवल संदेश पहुँचाना था, और उन्होंने यह काम पूरी ईमानदारी और स्पष्टता से किया। इसलिए हमें उनकी सुन्नत (तरीके) को अपनाना चाहिए और उनके बताए रास्ते पर चलना चाहिए।
  3. आज्ञा मानने और अवज्ञा से बचने में ही हमारी दुनिया और आख़िरत (परलोक) की भलाई है। जो व्यक्ति इन आदेशों पर चलता है, वह सफल होता है, और जो मुँह मोड़ता है, वह स्वयं नुक़सान उठाता है।
  4. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का धर्म पूरा और स्पष्ट है, उसमें कोई कमी नहीं है। इसलिए हमें बिना किसी संदेह के उसे अपनाना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए।
  5. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह ने अपने रसूल के माध्यम से हम पर अपनी रहमत (दया) पूरी कर दी है, क्योंकि उसने हमें सीधा रास्ता दिखा दिया है। अब हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उस रास्ते पर चलें और उसकी नेमतों (आशीर्वादों) के लिए शुक्र अदा करें।


📜 आयत 90-94 — सूरा अल-माइदा

90يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِّنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ فَاجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ऐ ईमानदारों शराब, जुआ और बुत और पाँसे तो बस नापाक (बुरे) शैतानी काम हैं तो तुम लोग इससे बचे रहो ताकि तुम फलाह पाओ
91إِنَّمَا يُرِيدُ الشَّيْطَانُ أَن يُوقِعَ بَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَاءَ فِي الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ وَيَصُدَّكُمْ عَن ذِكْرِ اللَّهِ وَعَنِ الصَّلَاةِ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّنتَهُونَ
शैतान की तो बस यही तमन्ना है कि शराब और जुए की बदौलत तुममें बाहम अदावत व दुशमनी डलवा दे और ख़ुदा की याद और नमाज़ से बाज़ रखे तो क्या तुम उससे बाज़ आने वाले हो
92وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ وَاحْذَرُوا ۚ فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
और ख़ुदा का हुक्म मानों और रसूल का हुक्म मानों और (नाफ़रमानी) से बचे रहो इस पर भी अगर तुमने (हुक्म ख़ुदा से) मुँह फेरा तो समझ रखो कि हमारे रसूल पर बस साफ़ साफ़ पैग़ाम पहुँचा देना फर्ज है
93لَيْسَ عَلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جُنَاحٌ فِيمَا طَعِمُوا إِذَا مَا اتَّقَوا وَّآمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ثُمَّ اتَّقَوا وَّآمَنُوا ثُمَّ اتَّقَوا وَّأَحْسَنُوا ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ
(फिर करो चाहे न करो तुम मुख़तार हो) जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए हैं उन पर जो कुछ खा (पी) चुके उसमें कुछ गुनाह नहीं जब उन्होंने परहेज़गारी की और ईमान ले आए और अच्छे (अच्छे) काम किए फिर परहेज़गारी की और नेकियाँ कीं और ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है
94يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَيَبْلُوَنَّكُمُ اللَّهُ بِشَيْءٍ مِّنَ الصَّيْدِ تَنَالُهُ أَيْدِيكُمْ وَرِمَاحُكُمْ لِيَعْلَمَ اللَّهُ مَن يَخَافُهُ بِالْغَيْبِ ۚ فَمَنِ اعْتَدَىٰ بَعْدَ ذَٰلِكَ فَلَهُ عَذَابٌ أَلِيمٌ
ऐ ईमानदारों कुछ शिकार से जिन तक तुम्हारे हाथ और नैज़ें पहुँच सकते हैं ख़ुदा ज़रुर इम्तेहान करेगा ताकि ख़ुदा देख ले कि उससे बे देखे भाले कौन डरता है फिर उसके बाद भी जो ज्यादती करेगा तो उसके लिए दर्दनाक अज़ाब है
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
92आयत

अनुवाद — अल-माइदा 92

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Wednesday, September 30, 2026

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