Wa atee`ul laaha wa atee`ur Rasoola wahzaroo; fa in tawal laitum fa`lamooo annamaa `alaa Rasoolinal balaaghul mubeen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा का हुक्म मानों और रसूल का हुक्म मानों और (नाफ़रमानी) से बचे रहो इस पर भी अगर तुमने (हुक्म ख़ुदा से) मुँह फेरा तो समझ रखो कि हमारे रसूल पर बस साफ़ साफ़ पैग़ाम पहुँचा देना फर्ज है
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
اور خدا کی فرمانبرداری اور رسولِ (خدا) کی اطاعت کرتے رہو اور ڈرتے رہو اگر منہ پھیرو گے تو جان رکھو کہ ہمارے پیغمبر کے ذمے تو صرف پیغام کا کھول کر پہنچا دینا ہے
और ख़ुदा का हुक्म मानों और रसूल का हुक्म मानों और (नाफ़रमानी) से बचे रहो इस पर भी अगर तुमने (हुक्म ख़ुदा से) मुँह फेरा तो समझ रखो कि हमारे रसूल पर बस साफ़ साफ़ पैग़ाम पहुँचा देना फर्ज है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
وَاحْذَرُوا: सावधान रहो, डरो (अल्लाह की नाफ़रमानी से)।
تَوَلَّيْتُمْ: तुम मुँह मोड़ लो, अर्थात आज्ञा का पालन करने से इनकार कर दो।
الْبَلَاغُ الْمُبِينُ: स्पष्ट रूप से (संदेश) पहुँचा देना, जिसमें कोई अस्पष्टता या छिपाव न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालों! अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और उसके रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की आज्ञा का भी पालन करो, और अल्लाह की अवज्ञा और उसकी मनाही की गई चीज़ों से सावधान रहो। अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करने का अर्थ है—जो आदेश दिया जाए उसे मानना और जिससे रोका जाए उससे बचना। यदि तुम इस आज्ञा का पालन करने से मुँह मोड़ लो और उसे ठुकरा दो, तो जान लो कि हमारे रसूल पर केवल स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचाने की ज़िम्मेदारी है, और उन्होंने यह ज़िम्मेदारी पूरी कर दी है। उनका काम केवल संदेश पहुँचाना है, लोगों को मजबूर करना नहीं। यदि तुम हिदायत (मार्गदर्शन) पर चलोगे तो इसका लाभ तुम्हें ही मिलेगा, और यदि तुम बुराई करोगे तो उसका नुक़सान तुम्हीं को होगा। अल्लाह ने अपने रसूल के माध्यम से हर वह चीज़ स्पष्ट कर दी है जो हलाल (वैध) और हराम (अवैध) है, और उन्होंने यह संदेश पूरी तरह पहुँचा दिया है। अतः तुम्हारे पास कोई बहाना नहीं बचता।
फ़ायदे (लाभ):
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करना ही सच्ची कामयाबी का रास्ता है, और यही ईमान की पहचान है।
यह आयत हमें सिखाती है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का काम केवल संदेश पहुँचाना था, और उन्होंने यह काम पूरी ईमानदारी और स्पष्टता से किया। इसलिए हमें उनकी सुन्नत (तरीके) को अपनाना चाहिए और उनके बताए रास्ते पर चलना चाहिए।
आज्ञा मानने और अवज्ञा से बचने में ही हमारी दुनिया और आख़िरत (परलोक) की भलाई है। जो व्यक्ति इन आदेशों पर चलता है, वह सफल होता है, और जो मुँह मोड़ता है, वह स्वयं नुक़सान उठाता है।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का धर्म पूरा और स्पष्ट है, उसमें कोई कमी नहीं है। इसलिए हमें बिना किसी संदेह के उसे अपनाना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए।
इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह ने अपने रसूल के माध्यम से हम पर अपनी रहमत (दया) पूरी कर दी है, क्योंकि उसने हमें सीधा रास्ता दिखा दिया है। अब हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उस रास्ते पर चलें और उसकी नेमतों (आशीर्वादों) के लिए शुक्र अदा करें।
शैतान की तो बस यही तमन्ना है कि शराब और जुए की बदौलत तुममें बाहम अदावत व दुशमनी डलवा दे और ख़ुदा की याद और नमाज़ से बाज़ रखे तो क्या तुम उससे बाज़ आने वाले हो
और ख़ुदा का हुक्म मानों और रसूल का हुक्म मानों और (नाफ़रमानी) से बचे रहो इस पर भी अगर तुमने (हुक्म ख़ुदा से) मुँह फेरा तो समझ रखो कि हमारे रसूल पर बस साफ़ साफ़ पैग़ाम पहुँचा देना फर्ज है
(फिर करो चाहे न करो तुम मुख़तार हो) जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए हैं उन पर जो कुछ खा (पी) चुके उसमें कुछ गुनाह नहीं जब उन्होंने परहेज़गारी की और ईमान ले आए और अच्छे (अच्छे) काम किए फिर परहेज़गारी की और नेकियाँ कीं और ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है
ऐ ईमानदारों कुछ शिकार से जिन तक तुम्हारे हाथ और नैज़ें पहुँच सकते हैं ख़ुदा ज़रुर इम्तेहान करेगा ताकि ख़ुदा देख ले कि उससे बे देखे भाले कौन डरता है फिर उसके बाद भी जो ज्यादती करेगा तो उसके लिए दर्दनाक अज़ाब है
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।