अल-माइदा · 91/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
إِنَّمَا يُرِيدُ الشَّيْطَانُ أَن يُوقِعَ بَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَاءَ فِي الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ وَيَصُدَّكُمْ عَن ذِكْرِ اللَّهِ وَعَنِ الصَّلَاةِ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّنتَهُونَ ۝٩١
Innamaa yureedush Shaitaanu ai yooqi`a bainakumul `adaawata wal baghdaaa`a fil khamri wal maisiri wa yasuddakum `an zikril laahi wa `anis Salaati fahal antum muntahoon
📖 हिंदी अर्थ
शैतान की तो बस यही तमन्ना है कि शराब और जुए की बदौलत तुममें बाहम अदावत व दुशमनी डलवा दे और ख़ुदा की याद और नमाज़ से बाज़ रखे तो क्या तुम उससे बाज़ आने वाले हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْمَيْسِرِ (मैसिर): जुआ, यानी दांव पर लगाकर माल हासिल करने का खेल।
  • الْعَدَاوَةَ (अदावत): दुश्मनी और वैर।
  • الْبَغْضَاءَ (बग़्ज़ा): नफ़रत और कड़वाहट।
  • يَصُدَّكُمْ (यसुद्दकुम): तुम्हें रोके और बाज़ रखे।
  • مُنتَهُون (मुंतहून): रुक जाने वाले, बाज़ आने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला बताते हैं कि शैतान शराब और जुए को खूबसूरत बनाकर पेश करता है, लेकिन उसका असली मक़सद यह नहीं है कि तुम्हें कोई फ़ायदा पहुँचे, बल्कि उसका निशाना तो यह है कि इन चीज़ों के ज़रिए तुम्हारे दिलों में एक-दूसरे के ख़िलाफ़ दुश्मनी और नफ़रत पैदा कर दे। शराब पीने से इंसान का अक़्ल जाती रहती है, जिससे झगड़े और लड़ाइयाँ होती हैं, और जुए में एक की जीत दूसरे के नुक़्सान से होती है, जिससे दिलों में कड़वाहट और बैर पैदा होता है। इसके अलावा, शैतान चाहता है कि ये काम तुम्हें अल्लाह की याद से और नमाज़ से दूर कर दें, क्योंकि शराब पीने वाला बेहोश रहता है और जुआरी अपने खेल में इतना मशग़ूल हो जाता है कि उसे नमाज़ की फ़िक्र ही नहीं रहती। इसलिए अल्लाह तआला पूछते हैं: "क्या तुम इन चीज़ों से बाज़ नहीं आओगे?" यह एक सवालिया अंदाज़ में ताकीदी हुक्म है, यानी अब तो रुक जाओ, क्योंकि ये चीज़ें सिर्फ़ नुक़्सान ही नुक़्सान देती हैं।

फ़ायदे (सबक़):

  1. शराब और जुआ सिर्फ़ गुनाह नहीं हैं, बल्कि ये शैतान के हथियार हैं जिनसे वह समाज में दुश्मनी और नफ़रत फैलाता है। इनसे दूर रहना ही अक़्लमंदी है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि हर उस चीज़ से बचना चाहिए जो अल्लाह की याद और नमाज़ से ग़ाफ़िल कर दे, चाहे वह कोई भी शगल या आदत हो।
  3. अल्लाह तआला अपने बंदों पर इतना मेहरबान है कि वह उन्हें उन चीज़ों से रोकता है जो उनके दुनिया और आख़िरत दोनों के लिए तबाही का सबब बनती हैं।
  4. इस आयत में मोमिनों के लिए एक प्यारा सा इशारा है कि अल्लाह उनसे यह उम्मीद रखता है कि वे सच्चे मोमिन हैं और हिदायत की पुकार पर कान धरेंगे — "तो क्या तुम बाज़ आओगे?" यानी तुम्हारा ईमान तो यही चाहता है कि तुम इन गंदगियों को छोड़ दो।
🎧 सुनें

📜 आयत 89-93 — अल-माइदा

89لَا يُؤَاخِذُكُمُ اللَّهُ بِاللَّغْوِ فِي أَيْمَانِكُمْ وَلَٰكِن يُؤَاخِذُكُم بِمَا عَقَّدتُّمُ الْأَيْمَانَ ۖ فَكَفَّارَتُهُ إِطْعَامُ عَشَرَةِ مَسَاكِينَ مِنْ أَوْسَطِ مَا تُطْعِمُونَ أَهْلِيكُمْ أَوْ كِسْوَتُهُمْ أَوْ تَحْرِيرُ رَقَبَةٍ ۖ فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ ثَلَاثَةِ أَيَّامٍ ۚ ذَٰلِكَ كَفَّارَةُ أَيْمَانِكُمْ إِذَا حَلَفْتُمْ ۚ وَاحْفَظُوا أَيْمَانَكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
ख़ुदा तुम्हारे बेकार (बेकार) क़समों (के खाने) पर तो ख़ैर गिरफ्तार न करेगा मगर बाक़सद (सच्ची) पक्की क़सम खाने और उसके ख़िलाफ करने पर तो ज़रुर तुम्हारी ले दे करेगा (लो सुनो) उसका जुर्माना जैसा तुम ख़ुद अपने एहलोअयाल को खिलाते हो उसी क़िस्म का औसत दर्जे का दस मोहताजों को खाना खिलाना या उनको कपड़े पहनाना या एक गुलाम आज़ाद करना है फिर जिससे यह सब न हो सके तो मैं तीन दिन के रोज़े (रखना) ये (तो) तुम्हारी क़समों का जुर्माना है जब तुम क़सम खाओ (और पूरी न करो) और अपनी क़समों (के पूरा न करने) का ख्याल रखो ख़ुदा अपने एहकाम को तुम्हारे वास्ते यूँ साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम शुक्र करो
90يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِّنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ فَاجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ऐ ईमानदारों शराब, जुआ और बुत और पाँसे तो बस नापाक (बुरे) शैतानी काम हैं तो तुम लोग इससे बचे रहो ताकि तुम फलाह पाओ
91إِنَّمَا يُرِيدُ الشَّيْطَانُ أَن يُوقِعَ بَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَاءَ فِي الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ وَيَصُدَّكُمْ عَن ذِكْرِ اللَّهِ وَعَنِ الصَّلَاةِ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّنتَهُونَ
शैतान की तो बस यही तमन्ना है कि शराब और जुए की बदौलत तुममें बाहम अदावत व दुशमनी डलवा दे और ख़ुदा की याद और नमाज़ से बाज़ रखे तो क्या तुम उससे बाज़ आने वाले हो
92وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ وَاحْذَرُوا ۚ فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
और ख़ुदा का हुक्म मानों और रसूल का हुक्म मानों और (नाफ़रमानी) से बचे रहो इस पर भी अगर तुमने (हुक्म ख़ुदा से) मुँह फेरा तो समझ रखो कि हमारे रसूल पर बस साफ़ साफ़ पैग़ाम पहुँचा देना फर्ज है
93لَيْسَ عَلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جُنَاحٌ فِيمَا طَعِمُوا إِذَا مَا اتَّقَوا وَّآمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ثُمَّ اتَّقَوا وَّآمَنُوا ثُمَّ اتَّقَوا وَّأَحْسَنُوا ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ
(फिर करो चाहे न करो तुम मुख़तार हो) जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए हैं उन पर जो कुछ खा (पी) चुके उसमें कुछ गुनाह नहीं जब उन्होंने परहेज़गारी की और ईमान ले आए और अच्छे (अच्छे) काम किए फिर परहेज़गारी की और नेकियाँ कीं और ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीRevelation
91आयत

अनुवाद — अल-माइदा 91

सूरा अल-माइदा आयत 91 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : शैतान की तो बस यही तमन्ना है कि शराब और…

सूरा आयत 91/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 89–93. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए