काफ · 14/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
وَأَصْحَابُ الْأَيْكَةِ وَقَوْمُ تُبَّعٍ ۚ كُلٌّ كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ وَعِيدِ ۝١٤
Wa Ashaabul Aykati wa qawmu Tubba`; kullun kazzabar Rusula fahaqqa wa`eed
📖 हिंदी अर्थ
और बन के रहने वालों (क़ौम शुऐब) और तुब्बा की क़ौम और (उन) सबने अपने (अपने) पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा (अज़ाब का) वायदा पूरा हो कर रहा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ: "अयकह" घने जंगलों और पेड़ों वाली जगह को कहते हैं। यहाँ से मुराद हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) की क़ौम है।
  • تُبَّعٍ: यमन के एक बादशाह का नाम है, जो हिम्यर क़बीले से था। उसकी क़ौम को "क़ौमे तुब्बा" कहा गया है।
  • وَعِيدِ: अज़ाब की धमकी, जो अल्लाह ने काफ़िरों के लिए तैयार की है।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने उन क़ौमों का ज़िक्र किया है जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और अल्लाह के अज़ाब का शिकार हुईं। इनमें हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) की क़ौम "असहाबुल अयकह" भी शामिल है, जो घने जंगलों और हरियाली के बीच रहती थी, लेकिन इस आराम-ओ-सुकून के बावजूद उन्होंने अपने नबी की बात नहीं मानी और नाप-तौल में धोखा देते रहे। इसी तरह "क़ौमे तुब्बा" का ज़िक्र है, जो यमन की एक ताकतवर और खुशहाल क़ौम थी। तुब्बा ख़ुद एक मुसलमान बादशाह था और उसने अपनी क़ौम को ईमान की दावत दी थी, लेकिन उसकी क़ौम ने उसकी बात नहीं मानी और नबियों को झुठलाया।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इन सब क़ौमों ने अपने-अपने नबियों को झुठलाया, और जब उन्होंने रसूलों को झुठलाया तो अल्लाह का वो वादा जो उसने काफ़िरों के लिए किया था, उन पर सच होकर रहा। यानी अल्लाह का अज़ाब उन पर नाज़िल हुआ और वो तबाह कर दिए गए।

इस आयत में मक्का के काफ़िरों के लिए बड़ी नसीहत और डर है। अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि जो क़ौमें तुमसे पहले थीं और तुमसे ज़्यादा ताकतवर और खुशहाल थीं, जब उन्होंने नबियों को झुठलाया तो अल्लाह के अज़ाब से नहीं बच सकीं। तो ऐ मक्का के काफ़िरों! तुम भी अगर रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को झुठलाते रहे तो तुम पर भी वही अज़ाब आ सकता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह का अज़ाब किसी को देखकर नहीं आता। जो क़ौमें नबियों की दावत को ठुकराती हैं और ज़ुल्म व सरकशी पर अड़ी रहती हैं, उनका अंजाम तबाही ही होता है। अल्लाह की रहमत और उसका अज़ाब दोनों उसके फ़ैसले के मुताबिक़ आते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि अल्लाह के रसूलों पर ईमान लाएँ, उनकी तालीमात पर अमल करें और अल्लाह के अज़ाब से डरते रहें। यही वो रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 12-16 — सूरा काफ

12كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَأَصْحَابُ الرَّسِّ وَثَمُودُ
इसी तरह (क़यामत में मुर्दों को) निकलना होगा उनसे पहले नूह की क़ौम और ख़न्दक़ वालों और (क़ौम) समूद ने अपने अपने पैग़म्बरों को झुठलाया
13وَعَادٌ وَفِرْعَوْنُ وَإِخْوَانُ لُوطٍ
और (क़ौम) आद और फिरऔन और लूत की क़ौम
14وَأَصْحَابُ الْأَيْكَةِ وَقَوْمُ تُبَّعٍ ۚ كُلٌّ كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ وَعِيدِ
और बन के रहने वालों (क़ौम शुऐब) और तुब्बा की क़ौम और (उन) सबने अपने (अपने) पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा (अज़ाब का) वायदा पूरा हो कर रहा
15أَفَعَيِينَا بِالْخَلْقِ الْأَوَّلِ ۚ بَلْ هُمْ فِي لَبْسٍ مِّنْ خَلْقٍ جَدِيدٍ
तो क्या हम पहली बार पैदा करके थक गये हैं (हरगिज़ नहीं) मगर ये लोग अज़ सरे नौ (दोबारा) पैदा करने की निस्बत शक़ में पड़े हैं
16وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِ نَفْسُهُ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِيدِ
और बेशक हम ही ने इन्सान को पैदा किया और जो ख्यालात उसके दिल में गुज़रते हैं हम उनको जानते हैं और हम तो उसकी शहरग से भी ज्यादा क़रीब हैं
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
14आयत

अनुवाद — काफ 14

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Saturday, October 3, 2026

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