काफ · 15/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
أَفَعَيِينَا بِالْخَلْقِ الْأَوَّلِ ۚ بَلْ هُمْ فِي لَبْسٍ مِّنْ خَلْقٍ جَدِيدٍ ۝١٥
Afa`a yeenaa bilkhalqil awwal; bal hum fee labsim min khalqin jadeed
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या हम पहली बार पैदा करके थक गये हैं (हरगिज़ नहीं) मगर ये लोग अज़ सरे नौ (दोबारा) पैदा करने की निस्बत शक़ में पड़े हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَفَعَيِينَا: क्या हम थक गए या असमर्थ हो गए?
  • بِالْخَلْقِ الْأَوَّلِ: पहली बार की रचना से।
  • لَبْسٍ: संदेह, भ्रम या उलझन।
  • خَلْقٍ جَدِيدٍ: नई रचना (यानी मृत्यु के बाद दोबारा उठाया जाना)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुनकिरीन-ए-आख़िरत (आख़िरत के इनकार करने वालों) को सम्बोधित करते हुए फ़रमाते हैं: क्या हम पहली बार की रचना से थक गए या असमर्थ हो गए? हमने उन्हें पैदा किया जब वे कुछ भी नहीं थे—ना उनका कोई वजूद था, ना कोई नमूना। जब हम उन्हें शून्य से अस्तित्व में लाने पर क़ादिर थे, तो क्या हम उन्हें दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर नहीं हैं? यह हरगिज़ नहीं है। हमारी क़ुदरत (शक्ति) के आगे पहली रचना और दूसरी रचना बराबर है। जिस तरह हमने उन्हें पहली बार पैदा किया, उसी तरह हम उन्हें मौत के बाद दोबारा उठाएँगे। यह हमारे लिए कोई मुश्किल काम नहीं है।

लेकिन अफ़सोस! ये लोग अपनी समझ की कमी और दिल की अंधी होने की वजह से क़यामत के दिन और मरने के बाद दोबारा जी उठने के मामले में गहरे संदेह और भ्रम में पड़े हुए हैं। वे इस सच्चाई को क़ुबूल नहीं करते कि अल्लाह जो चाहता है, वह करता है, और उसकी क़ुदरत के आगे कोई चीज़ असम्भव नहीं। वे अजीब तरह से उलझन में हैं—कभी कहते हैं कि मरने के बाद कौन ज़िंदा करेगा? कभी कहते हैं कि बिखरी हुई हड्डियाँ दोबारा कैसे जुड़ेंगी? हालाँकि उन्होंने अपनी आँखों से देखा है कि अल्लाह ने उन्हें पहली बार कैसे पैदा किया, फिर भी वे दूसरी बार की रचना पर यक़ीन नहीं करते।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। जिस अल्लाह ने हमें पहली बार पैदा किया, वह हमें दोबारा ज़िंदा करके ज़रूर उठाएगा। यही वह यक़ीन है जो मुसलमान को ज़िंदगी में सब्र और शुक्र के साथ जीने की ताक़त देता है। जब हमें यक़ीन होगा कि हमारे अमल का हिसाब होगा और हमें हमारे कर्मों का बदला मिलेगा, तो हम नेकी पर चलेंगे और गुनाहों से बचेंगे। यही आख़िरत पर ईमान का असली फल है—एक पाक और पुण्यमय ज़िंदगी जो हमें अल्लाह की रहमत के क़रीब ले जाती है।



📜 आयत 13-17 — सूरा काफ

13وَعَادٌ وَفِرْعَوْنُ وَإِخْوَانُ لُوطٍ
और (क़ौम) आद और फिरऔन और लूत की क़ौम
14وَأَصْحَابُ الْأَيْكَةِ وَقَوْمُ تُبَّعٍ ۚ كُلٌّ كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ وَعِيدِ
और बन के रहने वालों (क़ौम शुऐब) और तुब्बा की क़ौम और (उन) सबने अपने (अपने) पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा (अज़ाब का) वायदा पूरा हो कर रहा
15أَفَعَيِينَا بِالْخَلْقِ الْأَوَّلِ ۚ بَلْ هُمْ فِي لَبْسٍ مِّنْ خَلْقٍ جَدِيدٍ
तो क्या हम पहली बार पैदा करके थक गये हैं (हरगिज़ नहीं) मगर ये लोग अज़ सरे नौ (दोबारा) पैदा करने की निस्बत शक़ में पड़े हैं
16وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِ نَفْسُهُ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِيدِ
और बेशक हम ही ने इन्सान को पैदा किया और जो ख्यालात उसके दिल में गुज़रते हैं हम उनको जानते हैं और हम तो उसकी शहरग से भी ज्यादा क़रीब हैं
17إِذْ يَتَلَقَّى الْمُتَلَقِّيَانِ عَنِ الْيَمِينِ وَعَنِ الشِّمَالِ قَعِيدٌ
जब (वह कोई काम करता हैं तो) दो लिखने वाले (केरामन क़ातेबीन) जो उसके दाहिने बाएं बैठे हैं लिख लेते हैं
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — काफ 15

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Friday, October 2, 2026

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