काफ · 18/45
अनुवाद उच्चारण — काफ
مَّا يَلْفِظُ مِن قَوْلٍ إِلَّا لَدَيْهِ رَقِيبٌ عَتِيدٌ ۝١٨
Maa yalfizu min qawlin illaa ladaihi raqeebun `ateed
📖 हिंदी अर्थ
कोई बात उसकी ज़बान पर नहीं आती मगर एक निगेहबान उसके पास तैयार रहता है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَلْفِظُ (यल्फ़िज़ु): बोलना, मुँह से निकालना
  • رَقِيبٌ (रक़ीब): निगरानी करने वाला, देखभाल करने वाला
  • عَتِيدٌ (अतीद): हाज़िर, मौजूद, तैयार

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत करीमा मुसलमानों को यह अहम सबक़ सिखाती है कि इंसान का हर शब्द, हर बात, हर लफ़्ज़ — चाहे वह छोटा हो या बड़ा — अल्लाह तआला के फ़रिश्तों द्वारा दर्ज किया जा रहा है। जब इंसान कुछ बोलता है, तो उसके साथ एक फ़रिश्ता मौजूद होता है जो उसकी हर बात को लिखता है। यह फ़रिश्ता हमेशा इंसान के साथ रहता है, उसकी हर हरकत पर नज़र रखता है, और उसके हर क़ौल को रिकॉर्ड करता है।

यह आयत हमें बताती है कि हमारी ज़ुबान एक अमानत है। हम जो भी बोलते हैं, वह कहीं गुम नहीं होता, बल्कि उसका हिसाब रखा जा रहा है। यही वजह है कि इस्लाम हमें हमेशा अच्छी बातें बोलने की तालीम देता है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, उसे चाहिए कि अच्छी बात बोले या ख़ामोश रहे।" (बुख़ारी, मुस्लिम)

इस आयत से हमें यह भी पता चलता है कि हमारी हर बात का हिसाब क़ियामत के दिन होगा। जो इंसान अपनी ज़ुबान पर क़ाबू रखता है, वह कई गुनाहों से बच जाता है। ज़ुबान की बदौलत इंसान जन्नत के रास्ते पर चल सकता है, और ज़ुबान की बदौलत ही वह जहन्नम में भी जा सकता है।

यह आयत हमें यह भी यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह तआला का इंसाफ़ बिल्कुल कामिल है। जिस तरह हमारे अच्छे कामों का सवाब लिखा जाता है, उसी तरह हमारी बुरी बातों का गुनाह भी दर्ज होता है। कोई भी बात छोटी नहीं होती, हर बात का हिसाब होगा।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान को हमेशा नेकी, ज़िक्र, तिलावत और अच्छी बातों में मशरूफ़ रखें। ग़ीबत, चुग़ली, झूठ, बदज़ुबानी और बेकार की बातों से बचें। याद रखें — हमारे साथ हमेशा एक रक़ीब (निगरानी करने वाला) और अतीद (हाज़िर) फ़रिश्ता मौजूद है, जो हमारे हर लफ़्ज़ को लिख रहा है। यह हमारे लिए एक बड़ी नेमत है, क्योंकि यह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तरग़ीब देता है और हमें उन बातों से बचाता है जो हमारे लिए नुक़सानदेह हैं।

अल्लाह तआला हम सबको अपनी ज़ुबान की हिफ़ाज़त करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 16-20 — काफ

16وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِ نَفْسُهُ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِيدِ
और बेशक हम ही ने इन्सान को पैदा किया और जो ख्यालात उसके दिल में गुज़रते हैं हम उनको जानते हैं और हम तो उसकी शहरग से भी ज्यादा क़रीब हैं
17إِذْ يَتَلَقَّى الْمُتَلَقِّيَانِ عَنِ الْيَمِينِ وَعَنِ الشِّمَالِ قَعِيدٌ
जब (वह कोई काम करता हैं तो) दो लिखने वाले (केरामन क़ातेबीन) जो उसके दाहिने बाएं बैठे हैं लिख लेते हैं
18مَّا يَلْفِظُ مِن قَوْلٍ إِلَّا لَدَيْهِ رَقِيبٌ عَتِيدٌ
कोई बात उसकी ज़बान पर नहीं आती मगर एक निगेहबान उसके पास तैयार रहता है
19وَجَاءَتْ سَكْرَةُ الْمَوْتِ بِالْحَقِّ ۖ ذَٰلِكَ مَا كُنتَ مِنْهُ تَحِيدُ
मौत की बेहोशी यक़ीनन तारी होगी (जो हम बता देंगे कि) यही तो वह (हालात है) जिससे तू भागा करता था
20وَنُفِخَ فِي الصُّورِ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْوَعِيدِ
और सूर फूँका जाएगा यही (अज़ाब) के वायदे का दिन है और हर शख़्श (हमारे सामने) (इस तरह) हाज़िर होगा
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अनुवाद — काफ 18

सूरा काफ आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कोई बात उसकी ज़बान पर नहीं आती मगर एक निगेहबान…

सूरा आयत 18/45 — काफ ق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: काफ सुनें, काफ अनुवाद, काफ mp3, काफ pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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