Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَلْفِظُ (यल्फ़िज़ु): बोलना, मुँह से निकालना
- رَقِيبٌ (रक़ीब): निगरानी करने वाला, देखभाल करने वाला
- عَتِيدٌ (अतीद): हाज़िर, मौजूद, तैयार
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत करीमा मुसलमानों को यह अहम सबक़ सिखाती है कि इंसान का हर शब्द, हर बात, हर लफ़्ज़ — चाहे वह छोटा हो या बड़ा — अल्लाह तआला के फ़रिश्तों द्वारा दर्ज किया जा रहा है। जब इंसान कुछ बोलता है, तो उसके साथ एक फ़रिश्ता मौजूद होता है जो उसकी हर बात को लिखता है। यह फ़रिश्ता हमेशा इंसान के साथ रहता है, उसकी हर हरकत पर नज़र रखता है, और उसके हर क़ौल को रिकॉर्ड करता है।
यह आयत हमें बताती है कि हमारी ज़ुबान एक अमानत है। हम जो भी बोलते हैं, वह कहीं गुम नहीं होता, बल्कि उसका हिसाब रखा जा रहा है। यही वजह है कि इस्लाम हमें हमेशा अच्छी बातें बोलने की तालीम देता है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, उसे चाहिए कि अच्छी बात बोले या ख़ामोश रहे।" (बुख़ारी, मुस्लिम)
इस आयत से हमें यह भी पता चलता है कि हमारी हर बात का हिसाब क़ियामत के दिन होगा। जो इंसान अपनी ज़ुबान पर क़ाबू रखता है, वह कई गुनाहों से बच जाता है। ज़ुबान की बदौलत इंसान जन्नत के रास्ते पर चल सकता है, और ज़ुबान की बदौलत ही वह जहन्नम में भी जा सकता है।
यह आयत हमें यह भी यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह तआला का इंसाफ़ बिल्कुल कामिल है। जिस तरह हमारे अच्छे कामों का सवाब लिखा जाता है, उसी तरह हमारी बुरी बातों का गुनाह भी दर्ज होता है। कोई भी बात छोटी नहीं होती, हर बात का हिसाब होगा।
इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान को हमेशा नेकी, ज़िक्र, तिलावत और अच्छी बातों में मशरूफ़ रखें। ग़ीबत, चुग़ली, झूठ, बदज़ुबानी और बेकार की बातों से बचें। याद रखें — हमारे साथ हमेशा एक रक़ीब (निगरानी करने वाला) और अतीद (हाज़िर) फ़रिश्ता मौजूद है, जो हमारे हर लफ़्ज़ को लिख रहा है। यह हमारे लिए एक बड़ी नेमत है, क्योंकि यह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तरग़ीब देता है और हमें उन बातों से बचाता है जो हमारे लिए नुक़सानदेह हैं।
अल्लाह तआला हम सबको अपनी ज़ुबान की हिफ़ाज़त करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 16-20 — सूरा काफ
अनुवाद — काफ 18
सूरा काफ आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कोई बात उसकी ज़बान पर नहीं आती मगर एक निगेहबान…सूरा आयत 18/45 — सूरा काफ ق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा काफ सुनें, सूरा काफ अनुवाद, सूरा काफ mp3, सूरा काफ pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा काफ
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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