अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا خَلَقْتُ – मैंने पैदा नहीं किया
- الْجِنَّ – जिन्नात (जिन)
- الْإِنسَ – इंसान (मनुष्य)
- إِلَّا لِيَعْبُدُونِ – सिवाय इसके कि वे मेरी इबादत करें
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी सृष्टि का उद्देश्य बयान किया है। वह फ़रमाता है: "और मैंने जिन्न और इंसान को पैदा नहीं किया, सिवाय इसके कि वे मेरी इबादत करें।"
यह आयत पूरी कायनात के अंदर इंसान और जिन की पैदाइश का असली मक़सद बयान करती है। अल्लाह ने हमें इस दुनिया में महज़ मौज-मस्ती के लिए, या सिर्फ़ खाने-पीने और सोने के लिए पैदा नहीं किया। हमारी पैदाइश का एक उच्च और पवित्र उद्देश्य है — और वह है अल्लाह की इबादत, उसकी बंदगी और उसके प्रति समर्पण।
इस आयत में "इबादत" का मतलब सिर्फ़ नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात ही नहीं है, बल्कि पूरी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ ढालना है। यानी हर काम में अल्लाह की रज़ा का ख़्याल रखना, उसके दिए हुए हुक्मों को मानना और उसकी मनाही से बचना — यही असली इबादत है।
ग़ौरतलब है कि अल्लाह ने यह नहीं कहा कि "मैंने उन्हें पैदा किया ताकि वे मुझसे फ़ायदा उठाएँ" या "ताकि वे मेरी ज़रूरत पूरी करें"। अल्लाह किसी भी चीज़ का मोहताज नहीं है। वह तो चाहता है कि उसके बंदे उसकी इबादत करके ख़ुद ही फ़ायदा उठाएँ, अपने दर्जे बुलंद करें और अपनी आख़िरत संवारें। इबादत अल्लाह की ज़रूरत नहीं, बल्कि हमारी अपनी ज़रूरत है।
यह भी समझना ज़रूरी है कि यहाँ "इबादत" का हुक्म शरीअत की रू से है, न कि क़िस्मत के फ़ैसले की रू से। यानी अल्लाह ने हमें आज़ादी दी है कि हम चाहें तो उसकी इबादत करें और चाहें तो न करें। लेकिन उसने हमें साफ़ बता दिया है कि हमारी पैदाइश का असली मक़सद इबादत है, और इसी मक़सद को पूरा करने में ही हमारी कामयाबी है।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बड़ी सीख देती है। जब हम जान लेते हैं कि हमारी ज़िंदगी का मक़सद अल्लाह की इबादत है, तो हमारी पूरी ज़िंदगी बदल जाती है। हम हर काम को इबादत बना सकते हैं — नेक कमाई करना, माँ-बाप की ख़िदमत करना, बच्चों की परवरिश करना, लोगों की मदद करना — बशर्ते नीयत सही हो और काम अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ हो।
अल्लाह तआला हम सबको अपनी इबादत की तौफ़ीक़ दे, और हमारी ज़िंदगी को अपनी रज़ा के मुताबिक़ बनाने की हिम्मत अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 54-58 — अज़-ज़ारियात
अनुवाद — अज़-ज़ारियात 56
सूरा अज़-ज़ारियात आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मैने जिनों और आदमियों को इसी ग़रज़ से पैदा…सूरा आयत 56/60 — अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ारियात सुनें, अज़-ज़ारियात अनुवाद, अज़-ज़ारियात mp3, अज़-ज़ारियात pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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