अज़-ज़ारियात · 55/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
وَذَكِّرْ فَإِنَّ الذِّكْرَىٰ تَنفَعُ الْمُؤْمِنِينَ ۝٥٥
Wa zakkir fa innaz zikraa tanfa`ul mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
और नसीहत किए जाओ क्योंकि नसीहत मोमिनीन को फायदा देती है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَذَكِّرْ – और नसीहत करते रहिए।
  • الذِّكْرَى – नसीहत, उपदेश, याद दिलाना।
  • تَنفَعُ – लाभ पहुँचाती है।
  • الْمُؤْمِنِينَ – ईमान वालों को।

तफ़सीर:

ऐ नबी! जब आप देखते हैं कि कुछ लोग आपकी बात से मुँह मोड़ रहे हैं और आपको झुठला रहे हैं, तो आप उनकी परवाह न करें और न ही उनके इनकार से दिल टूटे। आपका काम केवल पहुँचाना है। इसलिए आप लगातार लोगों को अल्लाह की याद दिलाते रहें, उन्हें क़ुरआन की आयतें सुनाते रहें, और उन्हें अच्छे-बुरे का उपदेश देते रहें। यह नसीहत और याद दिलाना कभी बेकार नहीं जाता।

क्योंकि जिनके दिलों में ईमान की रोशनी है, वे इस नसीहत से ज़रूर लाभ उठाते हैं। यह उनके लिए रहनुमा बनती है, उन्हें सीधे रास्ते पर चलने की ताक़त देती है, और उनकी ईमानी कमज़ोरियों को दूर करती है। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखते हैं, उनके दिल नसीहत के लिए नरम होते हैं, और वे उसे क़बूल करते हैं। इसके अलावा, यह नसीहत उन लोगों पर भी अल्लाह की हुज्जत (प्रमाण) क़ायम करती है जो मुँह मोड़ते हैं, ताकि क़ियामत के दिन उनके पास कोई बहाना न बचे।

याद रखिए, नसीहत का असर उसी दिल पर होता है जो ईमान की ज़मीन पर तैयार हो। जैसे अच्छी ज़मीन पर बारिश से फसल उगती है, वैसे ही ईमान वाले दिल पर नसीहत की बारिश से अमल के फल उगते हैं। इसलिए निराश न हों, बल्कि अपना काम करते रहें — नसीहत करते रहें, क्योंकि यही आपकी ज़िम्मेदारी है, और अल्लाह ही हिदायत देने वाला है। जो लोग आज नहीं सुनते, हो सकता है कल सुन लें; और जो सुनते हैं, वे ही असली कामयाब हैं।



📜 आयत 53-57 — सूरा अज़-ज़ारियात

53أَتَوَاصَوْا بِهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ
ये लोग एक दूसरे को ऐसी बात की वसीयत करते आते हैं (नहीं) बल्कि ये लोग हैं ही सरकश
54فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَا أَنتَ بِمَلُومٍ
तो (ऐ रसूल) तुम इनसे मुँह फेर लो तुम पर तो कुछ इल्ज़ाम नहीं है
55وَذَكِّرْ فَإِنَّ الذِّكْرَىٰ تَنفَعُ الْمُؤْمِنِينَ
और नसीहत किए जाओ क्योंकि नसीहत मोमिनीन को फायदा देती है
56وَمَا خَلَقْتُ الْجِنَّ وَالْإِنسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ
और मैने जिनों और आदमियों को इसी ग़रज़ से पैदा किया कि वह मेरी इबादत करें
57مَا أُرِيدُ مِنْهُم مِّن رِّزْقٍ وَمَا أُرِيدُ أَن يُطْعِمُونِ
न तो मैं उनसे रोज़ी का तालिब हूँ और न ये चाहता हूँ कि मुझे खाना खिलाएँ
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
55आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 55

सूरा अज़-ज़ारियात आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और नसीहत किए जाओ क्योंकि नसीहत मोमिनीन को फायदा देती…

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Friday, October 2, 2026

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