अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَذَكِّرْ – और नसीहत करते रहिए।
- الذِّكْرَى – नसीहत, उपदेश, याद दिलाना।
- تَنفَعُ – लाभ पहुँचाती है।
- الْمُؤْمِنِينَ – ईमान वालों को।
तफ़सीर:
ऐ नबी! जब आप देखते हैं कि कुछ लोग आपकी बात से मुँह मोड़ रहे हैं और आपको झुठला रहे हैं, तो आप उनकी परवाह न करें और न ही उनके इनकार से दिल टूटे। आपका काम केवल पहुँचाना है। इसलिए आप लगातार लोगों को अल्लाह की याद दिलाते रहें, उन्हें क़ुरआन की आयतें सुनाते रहें, और उन्हें अच्छे-बुरे का उपदेश देते रहें। यह नसीहत और याद दिलाना कभी बेकार नहीं जाता।
क्योंकि जिनके दिलों में ईमान की रोशनी है, वे इस नसीहत से ज़रूर लाभ उठाते हैं। यह उनके लिए रहनुमा बनती है, उन्हें सीधे रास्ते पर चलने की ताक़त देती है, और उनकी ईमानी कमज़ोरियों को दूर करती है। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखते हैं, उनके दिल नसीहत के लिए नरम होते हैं, और वे उसे क़बूल करते हैं। इसके अलावा, यह नसीहत उन लोगों पर भी अल्लाह की हुज्जत (प्रमाण) क़ायम करती है जो मुँह मोड़ते हैं, ताकि क़ियामत के दिन उनके पास कोई बहाना न बचे।
याद रखिए, नसीहत का असर उसी दिल पर होता है जो ईमान की ज़मीन पर तैयार हो। जैसे अच्छी ज़मीन पर बारिश से फसल उगती है, वैसे ही ईमान वाले दिल पर नसीहत की बारिश से अमल के फल उगते हैं। इसलिए निराश न हों, बल्कि अपना काम करते रहें — नसीहत करते रहें, क्योंकि यही आपकी ज़िम्मेदारी है, और अल्लाह ही हिदायत देने वाला है। जो लोग आज नहीं सुनते, हो सकता है कल सुन लें; और जो सुनते हैं, वे ही असली कामयाब हैं।
📜 आयत 53-57 — अज़-ज़ारियात
अनुवाद — अज़-ज़ारियात 55
सूरा अज़-ज़ारियात आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और नसीहत किए जाओ क्योंकि नसीहत मोमिनीन को फायदा देती…सूरा आयत 55/60 — अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ारियात सुनें, अज़-ज़ारियात अनुवाद, अज़-ज़ारियात mp3, अज़-ज़ारियात pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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