अल-क़मर · 30/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ ۝٣٠
Fakaifa kaana `azaabee wa nuzur
📖 हिंदी अर्थ
तो (देखो) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अज़ाबी – मेरी यातना, मेरा दंड
  • नुज़ुर – मेरी चेतावनियाँ (डरावनी चेतावनियाँ)

व्याख्या:

यह आयत उन लोगों के लिए एक कठोर चेतावनी और गहरा सबक है, जो अल्लाह के रसूलों को झुठलाते हैं और उनकी नसीहतों को अनसुना कर देते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है: “फिर कैसा था मेरा अज़ाब और मेरी चेतावनियाँ?” यानी जब समूद की क़ौम ने अपने नबी सालिह (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और अल्लाह की भेजी हुई नाक़ा (ऊँटनी) को काट डाला, तो उन्होंने अपने साथियों को बुलाकर उस नाक़ा को हलाक कर दिया। इस पर अल्लाह ने उन्हें ऐसे अज़ाब में पकड़ा कि उनमें से कोई भी बच न सका।

अल्लाह तआला यहाँ क़ुरैश और आने वाली उम्मतों से ख़िताब करके फ़रमा रहे हैं: “तुम लोगों ने सुना कि उनके साथ क्या हुआ, अब ज़रा सोचो कि मेरा अज़ाब कितना सख्त था और मेरी चेतावनियाँ कितनी सच्ची थीं!” यह एक ऐतिबार (सबक) की बात है कि जो लोग अल्लाह के हुक्म से सरकशी करते हैं, उनका अंजाम हमेशा बर्बादी ही होता है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की चेतावनियों को हल्का न समझें। जब अल्लाह किसी क़ौम को डराता है, तो उसका वादा सच्चा होता है। जो लोग नबियों की दावत को ठुकराते हैं, वे अपने लिए तबाही मोल लेते हैं। लेकिन जो लोग अल्लाह की तरफ लौट आते हैं, तौबा करते हैं और अपने अमल सुधार लेते हैं, उनके लिए अल्लाह की रहमत और मग़फिरत है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह बहुत रहम करने वाला भी है। जो उसकी चेतावनियों से डर जाए और अपनी ज़िंदगी को सुधार ले, वह कामयाब है। और जो अल्लाह के हुक्म से मुँह मोड़े, उसका अंजाम वैसा ही होगा जैसा समूद और आद की क़ौमों का हुआ।

अल्लाह तआला हमें अपनी चेतावनियों से सबक लेने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी रहमत के हक़दार हैं। आमीन।



📜 आयत 28-32 — अल-क़मर

28وَنَبِّئْهُمْ أَنَّ الْمَاءَ قِسْمَةٌ بَيْنَهُمْ ۖ كُلُّ شِرْبٍ مُّحْتَضَرٌ
और उनको ख़बर कर दो कि उनमें पानी की बारी मुक़र्रर कर दी गयी है हर (बारी वाले को अपनी) बारी पर हाज़िर होना चाहिए
29فَنَادَوْا صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ
तो उन लोगों ने अपने रफीक़ (क़ेदार) को बुलाया तो उसने पकड़ कर (ऊँटनी की) कूंचे काट डालीं
30فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ
तो (देखो) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
31إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَاحِدَةً فَكَانُوا كَهَشِيمِ الْمُحْتَظِرِ
हमने उन पर एक सख्त चिंघाड़ (का अज़ाब) भेज दिया तो वह बाड़े वालो के सूखे हुए चूर चूर भूसे की तरह हो गए
32وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
और हमने क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीRevelation
30आयत

अनुवाद — अल-क़मर 30

सूरा अल-क़मर आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (देखो) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था

सूरा आयत 30/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए