अर-रहमान · 28/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ۝٢٨
Fabi ayyi aalaaa`i Rabbikumaa tukazzibaan
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे
📜

अनुवाद — Tafsir

फिर तुम दोनों (इंसानों और जिन्नातों) अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

इस आयत में अल्लाह तआला इंसानों और जिन्नातों दोनों को सम्बोधित करते हुए उनसे पूछ रहा है कि उसकी अनगिनत नेमतों और एहसानों में से आखिर कौन सी नेमत ऐसी है जिसे तुम झुठला सकते हो? यह एक ऐसा सवाल है जो दिल को झिंझोड़ देता है और इंसान को अपने रब की नेमतों पर गौर करने पर मजबूर कर देता है।

अल्लाह तआला ने इस सूरह में बार-बार यह आयत दोहराई है ताकि इंसान और जिन्न अपनी ज़िन्दगी में दिखने वाली हर छोटी-बड़ी नेमत पर गौर करें। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं — आसमान, ज़मीन, सूरज, चाँद, पानी, हवा, खाना, पीना, सेहत, अम्न और सबसे बड़ी नेमत ईमान — तो क्या हममें से कोई इन नेमतों को झुठला सकता है? हरगिज़ नहीं!

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें इतनी ज़्यादा हैं कि उन्हें गिनना भी मुमकिन नहीं। जैसा कि क़ुरआन में और जगह फ़रमाया गया है कि अगर तुम अल्लाह की नेमतों को गिनो तो उन्हें पूरा नहीं गिन सकते। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने रब की हर नेमत पर शुक्र अदा करें और उसकी नाफ़रमानी से बचें।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह तआला ने इंसानों और जिन्नातों दोनों को यह नेमतें दी हैं, और दोनों को हिदायत और गुमराही का रास्ता दिखाया है। इसलिए दोनों में से जो भी अल्लाह की नेमतों का इन्कार करेगा या उन्हें झुठलाएगा, वह बड़ी नाइंसाफ़ी करेगा।

प्यारे भाइयों और बहनों! आओ हम अपने रब की नेमतों को पहचानें, उन पर शुक्र करें और अपनी ज़िन्दगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ। यही हमारी कामयाबी है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी।

🎧 सुनें

📜 आयत 26-30 — अर-रहमान

26كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍ
जो (मख़लूक) ज़मीन पर है सब फ़ना होने वाली है
27وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
और सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की ज़ात जो अज़मत और करामत वाली है बाक़ी रहेगी
28فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे
29يَسْأَلُهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِي شَأْنٍ
और जितने लोग सारे आसमान व ज़मीन में हैं (सब) उसी से माँगते हैं वह हर रोज़ (हर वक्त) मख़लूक के एक न एक काम में है
30فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की कौन कौन सी नेअमत से मुकरोगे
अर-रहमानकुरान सूची
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मदनीRevelation
28आयत

अनुवाद — अर-रहमान 28

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Tuesday, August 18, 2026

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