अर-रहमान · 27/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रहमान
وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ ۝٢٧
Wa yabqaa wajhu rabbika zul jalaali wal ikraam
📖 हिंदी अर्थ
और सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की ज़ात जो अज़मत और करामत वाली है बाक़ी रहेगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَجْهُ رَبِّكَ: तुम्हारे रब का चेहरा (यहाँ अर्थ है अल्लाह की ज़ात)
  • ذُو الْجَلَالِ: महानता, बुज़ुर्गी और अज़मत वाला
  • الْإِكْرَامِ: इकराम (सम्मान) वाला, जो अपने बंदों पर एहसान और फज़ल करने वाला है

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ज़मीन पर जितने भी लोग हैं, सब कुछ फ़ना होने वाला है। हर इंसान, हर जानदार, हर मख़लूक़ — सबको एक दिन मौत आनी है। यह दुनिया की हक़ीक़त है कि यहाँ कुछ भी हमेशा नहीं रहता। लेकिन इसके बाद अल्लाह तआला अपनी ज़ात की हमेशा रहने वाली सिफ़त बयान करता है कि सिर्फ़ तुम्हारे रब का चेहरा — यानी उसकी ज़ात — बाक़ी रहेगी, जो ज़ुल-जलाल (महानता और अज़मत वाला) और ज़ुल-इकराम (इकराम और एहसान वाला) है। उसे कभी फ़ना नहीं होना, न उसे कोई कमी आ सकती है, न उसकी ज़ात पर कोई असर हो सकता है। वह हमेशा से था और हमेशा रहेगा।

यहाँ "वज्ह" (चेहरा) से मुराद अल्लाह की ज़ात है, और यह उसकी सिफ़त है जो उसके शान के लायक़ है — बिना किसी तशबीह (मिलाने) और तकीफ़ (कैसे होने की कल्पना) के। अल्लाह की ज़ात ऐसी है कि उस पर कभी मौत नहीं आएगी, और वही अकेला बाक़ी रहने वाला है।

अल्लाह तआला का "जलाल" यानी उसकी अज़मत, बुज़ुर्गी, कुदरत और सुल्तानत — यह सब कुछ हमेशा रहेगा। और उसका "इकराम" यानी वह अपने नेक और फ़रमाँबरदार बंदों का इकराम करेगा, उन्हें जन्नत की नेअमतें अता करेगा, और उनकी मदद और हिमायत फ़रमाएगा। यह उसकी रहमत और करम की दलील है।

दावती पहलू:

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत और सबक़ है। जब हम जानते हैं कि यह दुनिया फ़ानी है और हर चीज़ एक दिन ख़त्म हो जाएगी, तो हमें अपनी ज़िंदगी का मक़सद समझना चाहिए। हमें उस ज़ात की तरफ़ रुजू करना चाहिए जो हमेशा रहने वाली है — अल्लाह तआला। जो लोग दुनिया की चीज़ों को हमेशा रहने वाला समझकर उन पर भरोसा करते हैं, वह बड़ी नादानी करते हैं। असल कामयाबी यह है कि हम उस रब के बंदे बनें जो ज़ुल-जलाल और ज़ुल-इकराम है, उसकी इबादत करें, उसके हुक्मों पर चलें, ताकि हम भी उसके इकराम के हक़दार बनें और उसकी जन्नत में हमेशा रहने वाली नेअमतें हासिल करें। यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह की ज़ात कभी ख़त्म नहीं होगी, और जो लोग उस पर भरोसा करते हैं, वह कभी नाकाम नहीं हो सकते।



📜 आयत 25-29 — सूरा अर-रहमान

25فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो (ऐ जिन व इन्स) तुम अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत को झुठलाओगे
26كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍ
जो (मख़लूक) ज़मीन पर है सब फ़ना होने वाली है
27وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
और सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की ज़ात जो अज़मत और करामत वाली है बाक़ी रहेगी
28فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे
29يَسْأَلُهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِي شَأْنٍ
और जितने लोग सारे आसमान व ज़मीन में हैं (सब) उसी से माँगते हैं वह हर रोज़ (हर वक्त) मख़लूक के एक न एक काम में है
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अर-रहमान 27

सूरा अर-रहमान आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की ज़ात जो अज़मत और करामत…

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Friday, October 2, 2026

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