अर-रहमान · 62/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
وَمِن دُونِهِمَا جَنَّتَانِ ۝٦٢
Wa min doonihimaa jannataan
📖 हिंदी अर्थ
उन दोनों बाग़ों के अलावा दो बाग़ और हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَمِن دُونِهِمَا: उन दोनों जन्नतों के अलावा, या उन दोनों से आगे/नीचे।
  • جَنَّتَانِ: दो और जन्नतें (बाग़)।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने प्यारे बंदों के लिए उन दो जन्नतों के अलावा, जिनका ज़िक्र पहले हुआ है, दो और जन्नतों का वादा किया है। ये दो जन्नतें उन पहली दो जन्नतों से अलग हैं, और इनका दर्जा भी अलग है। पहली दो जन्नतें उन मुक़र्रबीन (अल्लाह के करीबी बंदों) के लिए हैं, जिन्होंने अपने रब की इबादत में कमाल का दर्जा हासिल किया, और ये दो जन्नतें उनके लिए हैं जो ईमान लाए और नेक अमल किए, हालाँकि उनका दर्जा पहले वालों से कुछ कम है।

ये जन्नतें भी उसी तरह हरी-भरी, नेमतों से भरी हुई हैं, जिनमें हर तरह की ख़ुशी और आराम का सामान मौजूद है। अल्लाह तआला ने अपने बंदों के लिए ये इनाम इसलिए तैयार किए हैं ताकि वे उसकी रहमत और कृपा का अनुभव करें।

यहाँ अल्लाह तआला अपने बंदों से पूछता है: "तो फिर तुम दोनों (जिन्न और इंसान) अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?" यानी इतनी बड़ी नेमतों के बाद भी अगर कोई उसे न पहचाने और उसका शुक्र न अदा करे, तो ये उसकी नाइंसाफ़ी और नाशुक्री है।

ये आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला की रहमत का दामन बहुत वसीअ है। उसने अपने बंदों के लिए जन्नत के कई दरजे बनाए हैं, ताकि हर कोई अपने अमल के हिसाब से वहाँ जगह पा सके। अगर हम चाहें कि हमें इन जन्नतों में से कोई भी जन्नत मिले, तो हमें अपने ईमान को मज़बूत करना होगा, नेक अमल करने होंगे, और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत पर चलना होगा।

अल्लाह तआला ने ये नेमतें हम पर बड़ी मेहरबानी से नाज़िल की हैं, और हमें चाहिए कि हम उसका शुक्र अदा करें, उसकी इबादत में मशगूल रहें, और उसकी रहमत से कभी मायूस न हों। ये जन्नतें उन लोगों के लिए हैं जो अल्लाह से डरते हैं, उसकी राह में ख़र्च करते हैं, और अपने गुनाहों से तौबा करते हैं।

तो आओ, हम सब अपने अमलों को सुधारें, अल्लाह की इबादत में लगे रहें, और उससे उन जन्नतों की दुआ करें जो उसने अपने नेक बंदों के लिए तैयार की हैं। यक़ीनन अल्लाह बड़ा कृपालु और रहम करने वाला है।



📜 आयत 60-64 — अर-रहमान

60هَلْ جَزَاءُ الْإِحْسَانِ إِلَّا الْإِحْسَانُ
भला नेकी का बदला नेकी के सिवा कुछ और भी है
61فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत को झुठलाओगे
62وَمِن دُونِهِمَا جَنَّتَانِ
उन दोनों बाग़ों के अलावा दो बाग़ और हैं
63فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे
64مُدْهَامَّتَانِ
दोनों निहायत गहरे सब्ज़ व शादाब
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
62आयत

अनुवाद — अर-रहमान 62

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सूरा आयत 62/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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