अर-रहमान · 66/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
فِيهِمَا عَيْنَانِ نَضَّاخَتَانِ ۝٦٦
Feehimaa `aynaani nad daakhataan
📖 हिंदी अर्थ
उन दोनों बाग़ों में दो चश्में जोश मारते होंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नद्दाख़तानि (نَضَّاخَتَانِ): अत्यधिक उबलने वाली, फव्वारे की तरह बहने वाली, जो कभी न रुके।

तफ़सीर:

इन दोनों जन्नतों में दो चश्मे (सोते) हैं जो पानी के फव्वारों की तरह लगातार उबलते और बहते रहते हैं। उनका पानी कभी सूखता नहीं, कभी रुकता नहीं, और कभी कम नहीं होता। यह ऐसे चश्मे हैं जो हर समय ताज़गी, जीवन और खुशहाली बिखेरते रहते हैं। उनका पानी इतना अधिक और शक्तिशाली है कि वह ऊँचाई तक उछलता है, जिससे जन्नत के बाग़ और भी खूबसूरत और हरियाले हो जाते हैं।

यह नेमत अल्लाह तआला की ओर से उन बंदों के लिए है जिन्होंने दुनिया में उसकी आज्ञा का पालन किया और उसके रसूलों पर ईमान लाए। जब एक मोमिन इन चश्मों को देखेगा, तो उसकी खुशी का ठिकाना न होगा, क्योंकि यह उसी रब की तरफ से इनाम है जो बड़ा कृपालु और दयावान है।

अल्लाह तआला ने इस आयत के बाद फरमाया: "तो तुम दोनों (जिन्न और इंसान) अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?" यह एक प्यार भरा सवाल है जो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि अल्लाह ने हमें दुनिया में भी अनगिनत नेमतें दी हैं—पानी, हवा, खाना, सेहत, और ईमान की दौलत। क्या हमें उसका शुक्र अदा नहीं करना चाहिए? क्या हमें उसकी इबादत और उसके बताए रास्ते पर नहीं चलना चाहिए?

याद रखिए, जन्नत के ये चश्मे उन लोगों के लिए हैं जो दुनिया में अल्लाह के हुक्मों पर चले, नमाज़ क़ायम की, रोज़ा रखा, ज़कात दी, और अल्लाह के रास्ते में खर्च किया। यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने गुनाहों से तौबा की और अपने रब की रहमत के तलबगार रहे।

तो आओ, हम सब अपने अमल को सुधारें, अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करें, और उस जन्नत के तलबगार बनें जहाँ ऐसे चश्मे बहते हैं जो कभी नहीं सूखते—बल्कि हमेशा के लिए खुशियाँ और सुकून देते हैं। अल्लाह हमें अपनी जन्नत का हक़ीक़ी तलबगार बनाए। आमीन।



📜 आयत 64-68 — अर-रहमान

64مُدْهَامَّتَانِ
दोनों निहायत गहरे सब्ज़ व शादाब
65فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की किन किन नेअमतों को न मानोगे
66فِيهِمَا عَيْنَانِ نَضَّاخَتَانِ
उन दोनों बाग़ों में दो चश्में जोश मारते होंगे
67فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे
68فِيهِمَا فَاكِهَةٌ وَنَخْلٌ وَرُمَّانٌ
उन दोनों में मेवें हैं खुरमें और अनार
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
66आयत

अनुवाद — अर-रहमान 66

सूरा अर-रहमान आयत 66 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उन दोनों बाग़ों में दो चश्में जोश मारते होंगे

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Tuesday, August 18, 2026

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