Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَبَارَكَ: बहुत अधिक बरकत वाला, अत्यंत पवित्र और महान है।
- اسْمُ رَبِّكَ: तुम्हारे पालनहार का नाम।
- ذِي الْجَلَالِ: महानता, बड़ाई और शान-शौकत वाला।
- وَالْإِكْرَامِ: सम्मान और इज़्ज़त देने वाला, अपने बंदों पर एहसान करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत सूरह अर-रहमान की आख़िरी आयत है, जो इस पूरी सूरह को एक बेहद खूबसूरत अंदाज़ में ख़त्म करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि तुम्हारे रब का नाम कितना बरकत वाला, पाक और महान है! उसकी ज़ात हर कमी से पाक है और उसका नाम हर अच्छाई और भलाई से भरा हुआ है।
इस आयत में अल्लाह ने अपने लिए दो खूबियाँ बयान की हैं:
- ذُو الْجَلَال — यानी वह ज़ुल-जलाल है, महानता, अज़मत और शान का मालिक। उसकी बड़ाई के आगे पूरी कायनात छोटी है। उसकी अज़मत का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।
- ذُو الْإِكْرَام — यानी वह इकराम वाला है, यानी अपने नेक बंदों की इज़्ज़त करता है, उन्हें सम्मान देता है, उन पर एहसान करता है और उन्हें जन्नत की नेमतों से नवाज़ता है।
इस आयत का मतलब यह है कि अल्लाह का नाम हर बरकत का स्रोत है। जब भी कोई बंदा उसका नाम लेता है, तो उसे बरकत मिलती है। उसके नाम से ही दुआएँ क़बूल होती हैं, उसके नाम से ही मुसीबतें दूर होती हैं, और उसके नाम से ही दिलों को सुकून मिलता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने रब के नाम को हमेशा अपनी ज़ुबान पर रखना चाहिए, उसकी महानता का ज़िक्र करना चाहिए और उससे मोहब्बत करनी चाहिए। जो बंदा अल्लाह के नाम को प्यार करता है और उसका ज़िक्र करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का नाम कितना पाक और बरकत वाला है। जब हम "बिस्मिल्लाह" कहकर कोई काम शुरू करते हैं, तो उसमें बरकत होती है। जब हम "अल्हम्दुलिल्लाह" कहते हैं, तो हम शुक्र अदा करते हैं। जब हम "अल्लाहु अकबर" कहते हैं, तो हम उसकी बड़ाई बयान करते हैं।
इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान को अल्लाह के ज़िक्र से तर रखें, उसके नाम की बरकत से अपनी ज़िंदगी को रोशन करें, और उसकी महानता और इकराम की उम्मीद रखते हुए उसकी इबादत करें। याद रखें, जो अल्लाह को पहचान लेता है और उसके नाम से मोहब्बत करता है, अल्लाह उसे दुनिया में इज़्ज़त देता है और आख़िरत में जन्नत की नेमतों से नवाज़ता है। आमीन।
📜 आयत 76-78 — सूरा अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 78
सूरा अर-रहमान आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार जो साहिबे जलाल व करामत है…सूरा आयत 78/78 — सूरा अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रहमान सुनें, सूरा अर-रहमान अनुवाद, सूरा अर-रहमान mp3, सूरा अर-रहमान pdf. आयत 76–78. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अर-रहमान
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


