अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَابِقُوا: जल्दी करो, दौड़ो, एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करो।
- مَغْفِرَةٍ: क्षमा, पापों से माफ़ी।
- عَرْضُهَا: उसकी चौड़ाई।
- أُعِدَّتْ: तैयार की गई है।
- فَضْلُ اللَّهِ: अल्लाह की कृपा और उदारता।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! अपने रब की ओर से क्षमा की ओर दौड़ो और उस जन्नत की ओर आगे बढ़ो जिसकी चौड़ाई आसमान और ज़मीन जितनी विशाल है। यह जन्नत उन लोगों के लिए तैयार की गई है जिन्होंने अल्लाह पर ईमान लाया और उसके रसूलों पर विश्वास किया। यह अल्लाह का बड़ा अनुग्रह है जो वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है प्रदान करता है। और अल्लाह तो महान कृपा का स्वामी है।
यह आयत हमें बताती है कि जन्नत कोई सस्ती चीज़ नहीं है, बल्कि उसे पाने के लिए दौड़ना और प्रयास करना आवश्यक है। जिस तरह दुनिया में इंसान दौड़कर अपने लक्ष्य को हासिल करता है, उसी तरह आख़िरत की सफलता के लिए भी दौड़ना ज़रूरी है। यह दौड़ इबादत, नेकी, तौबा और अल्लाह की राह में खर्च करने से होती है।
इस आयत में जन्नत की चौड़ाई का वर्णन करके अल्लाह हमें बताना चाहता है कि उसकी जन्नत कितनी विशाल और अद्भुत है। अगर आसमान और ज़मीन को मिला दिया जाए तो जन्नत उससे भी ज़्यादा चौड़ी है। यह अल्लाह की उदारता का प्रमाण है कि उसने अपने ईमानवाले बंदों के लिए इतनी बड़ी नेमत तैयार की है।
देखो, यह जन्नत केवल उन्हीं के लिए है जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए। यानी ईमान ही वह कुंजी है जो जन्नत के दरवाज़े खोलती है। लेकिन साथ ही, यह अल्लाह का फज़ल और कृपा भी है, क्योंकि कोई भी इंसान अपने अमल से जन्नत का हक़दार नहीं बन सकता। यह अल्लाह की रहमत है जो वह जिसे चाहता है देता है।
अल्लाह ने इस आयत के अंत में कहा कि वह "ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ" है, यानी महान कृपा का स्वामी। इसका मतलब यह है कि जब इतना बड़ा कृपालु अल्लाह अपनी कृपा का वर्णन करता है, तो उसकी देन भी उतनी ही महान होगी। वह जन्नत जैसी अद्भुत नेमत दे सकता है, क्योंकि उसकी कृपा की कोई सीमा नहीं।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें जीवन का सही उद्देश्य याद दिलाती है। हमें दुनिया की चमक-दमक में खोकर नहीं रह जाना चाहिए, बल्कि उस जन्नत की ओर दौड़ना चाहिए जो हमेशा रहने वाली है। आज हम जो भी अच्छा काम करेंगे, वह कल हमारे लिए रौशनी बनेगा। तौबा करो, नेक कामों में जल्दी करो, और अल्लाह की रहमत से निराश मत होओ। याद रखो, अल्लाह की कृपा का दामन बहुत बड़ा है, और वह अपने बंदों को माफ़ करना और जन्नत देना पसंद करता है। बस ज़रूरत है सच्चे दिल से ईमान लाने और अच्छे कामों में आगे बढ़ने की।
📜 आयत 19-23 — अल-हदीद
अनुवाद — अल-हदीद 21
सूरा अल-हदीद आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम अपने परवरदिगार के (सबब) बख़्शिस की और बेहिश्त की…सूरा आयत 21/29 — अल-हदीद الحديد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हदीद सुनें, अल-हदीद अनुवाद, अल-हदीद mp3, अल-हदीद pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








