अल-हदीद · 21/29
अनुवाद उच्चारण — अल-हदीद
سَابِقُوا إِلَىٰ مَغْفِرَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ وَجَنَّةٍ عَرْضُهَا كَعَرْضِ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ أُعِدَّتْ لِلَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ ۚ ذَٰلِكَ فَضْلُ اللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ ۝٢١
Saabiqooo ilaa maghfiratim mir Rabbikum wa jannatin `arduhaa ka-`ardis samaaa`i wal ardi u`iddat lillazeena aamanoo billaahi wa Rusulih; zaalika fadlul laahi yu`teehi many yashaaa`; wal laahu zul fadlil `azeem
📖 हिंदी अर्थ
तुम अपने परवरदिगार के (सबब) बख़्शिस की और बेहिश्त की तरफ लपक के आगे बढ़ जाओ जिसका अर्ज़ आसमान और ज़मीन के अर्ज़ के बराबर है जो उन लोगों के लिए तैयार की गयी है जो ख़ुदा पर और उसके रसूलों पर ईमान लाए हैं ये ख़ुदा का फज़ल है जिसे चाहे अता करे और ख़ुदा का फज़ल (व क़रम) तो बहुत बड़ा है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَابِقُوا: जल्दी करो, दौड़ो, एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करो।
  • مَغْفِرَةٍ: क्षमा, पापों से माफ़ी।
  • عَرْضُهَا: उसकी चौड़ाई।
  • أُعِدَّتْ: तैयार की गई है।
  • فَضْلُ اللَّهِ: अल्लाह की कृपा और उदारता।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! अपने रब की ओर से क्षमा की ओर दौड़ो और उस जन्नत की ओर आगे बढ़ो जिसकी चौड़ाई आसमान और ज़मीन जितनी विशाल है। यह जन्नत उन लोगों के लिए तैयार की गई है जिन्होंने अल्लाह पर ईमान लाया और उसके रसूलों पर विश्वास किया। यह अल्लाह का बड़ा अनुग्रह है जो वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है प्रदान करता है। और अल्लाह तो महान कृपा का स्वामी है।

यह आयत हमें बताती है कि जन्नत कोई सस्ती चीज़ नहीं है, बल्कि उसे पाने के लिए दौड़ना और प्रयास करना आवश्यक है। जिस तरह दुनिया में इंसान दौड़कर अपने लक्ष्य को हासिल करता है, उसी तरह आख़िरत की सफलता के लिए भी दौड़ना ज़रूरी है। यह दौड़ इबादत, नेकी, तौबा और अल्लाह की राह में खर्च करने से होती है।

इस आयत में जन्नत की चौड़ाई का वर्णन करके अल्लाह हमें बताना चाहता है कि उसकी जन्नत कितनी विशाल और अद्भुत है। अगर आसमान और ज़मीन को मिला दिया जाए तो जन्नत उससे भी ज़्यादा चौड़ी है। यह अल्लाह की उदारता का प्रमाण है कि उसने अपने ईमानवाले बंदों के लिए इतनी बड़ी नेमत तैयार की है।

देखो, यह जन्नत केवल उन्हीं के लिए है जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए। यानी ईमान ही वह कुंजी है जो जन्नत के दरवाज़े खोलती है। लेकिन साथ ही, यह अल्लाह का फज़ल और कृपा भी है, क्योंकि कोई भी इंसान अपने अमल से जन्नत का हक़दार नहीं बन सकता। यह अल्लाह की रहमत है जो वह जिसे चाहता है देता है।

अल्लाह ने इस आयत के अंत में कहा कि वह "ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ" है, यानी महान कृपा का स्वामी। इसका मतलब यह है कि जब इतना बड़ा कृपालु अल्लाह अपनी कृपा का वर्णन करता है, तो उसकी देन भी उतनी ही महान होगी। वह जन्नत जैसी अद्भुत नेमत दे सकता है, क्योंकि उसकी कृपा की कोई सीमा नहीं।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें जीवन का सही उद्देश्य याद दिलाती है। हमें दुनिया की चमक-दमक में खोकर नहीं रह जाना चाहिए, बल्कि उस जन्नत की ओर दौड़ना चाहिए जो हमेशा रहने वाली है। आज हम जो भी अच्छा काम करेंगे, वह कल हमारे लिए रौशनी बनेगा। तौबा करो, नेक कामों में जल्दी करो, और अल्लाह की रहमत से निराश मत होओ। याद रखो, अल्लाह की कृपा का दामन बहुत बड़ा है, और वह अपने बंदों को माफ़ करना और जन्नत देना पसंद करता है। बस ज़रूरत है सच्चे दिल से ईमान लाने और अच्छे कामों में आगे बढ़ने की।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — अल-हदीद

19وَالَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الصِّدِّيقُونَ ۖ وَالشُّهَدَاءُ عِندَ رَبِّهِمْ لَهُمْ أَجْرُهُمْ وَنُورُهُمْ ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ
और जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाए यही लोग अपने परवरदिगार के नज़दीक सिद्दीक़ों और शहीदों के दरजे में होंगे उनके लिए उन्ही (सिद्दीकों और शहीदों) का अज्र और उन्हीं का नूर होगा और जिन लोगों ने कुफ्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया वही लोग जहन्नुमी हैं
20اعْلَمُوا أَنَّمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا لَعِبٌ وَلَهْوٌ وَزِينَةٌ وَتَفَاخُرٌ بَيْنَكُمْ وَتَكَاثُرٌ فِي الْأَمْوَالِ وَالْأَوْلَادِ ۖ كَمَثَلِ غَيْثٍ أَعْجَبَ الْكُفَّارَ نَبَاتُهُ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَاهُ مُصْفَرًّا ثُمَّ يَكُونُ حُطَامًا ۖ وَفِي الْآخِرَةِ عَذَابٌ شَدِيدٌ وَمَغْفِرَةٌ مِّنَ اللَّهِ وَرِضْوَانٌ ۚ وَمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا إِلَّا مَتَاعُ الْغُرُورِ
जान रखो कि दुनियावी ज़िन्दगी महज़ खेल और तमाशा और ज़ाहिरी ज़ीनत (व आसाइश) और आपस में एक दूसरे पर फ़ख्र क़रना और माल और औलाद की एक दूसरे से ज्यादा ख्वाहिश है (दुनयावी ज़िन्दगी की मिसाल तो) बारिश की सी मिसाल है जिस (की वजह) से किसानों की खेती (लहलहाती और) उनको ख़ुश कर देती थी फिर सूख जाती है तो तू उसको देखता है कि ज़र्द हो जाती है फिर चूर चूर हो जाती है और आख़िरत में (कुफ्फार के लिए) सख्त अज़ाब है और (मोमिनों के लिए) ख़ुदा की तरफ से बख़्शिस और ख़ुशनूदी और दुनयावी ज़िन्दगी तो बस फ़रेब का साज़ो सामान है
21سَابِقُوا إِلَىٰ مَغْفِرَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ وَجَنَّةٍ عَرْضُهَا كَعَرْضِ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ أُعِدَّتْ لِلَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ ۚ ذَٰلِكَ فَضْلُ اللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ
तुम अपने परवरदिगार के (सबब) बख़्शिस की और बेहिश्त की तरफ लपक के आगे बढ़ जाओ जिसका अर्ज़ आसमान और ज़मीन के अर्ज़ के बराबर है जो उन लोगों के लिए तैयार की गयी है जो ख़ुदा पर और उसके रसूलों पर ईमान लाए हैं ये ख़ुदा का फज़ल है जिसे चाहे अता करे और ख़ुदा का फज़ल (व क़रम) तो बहुत बड़ा है
22مَا أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي أَنفُسِكُمْ إِلَّا فِي كِتَابٍ مِّن قَبْلِ أَن نَّبْرَأَهَا ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
जितनी मुसीबतें रूए ज़मीन पर और ख़ुद तुम लोगों पर नाज़िल होती हैं (वह सब) क़ब्ल इसके कि हम उन्हें पैदा करें किताब (लौह महफूज़) में (लिखी हुई) हैं बेशक ये ख़ुदा पर आसान है
23لِّكَيْلَا تَأْسَوْا عَلَىٰ مَا فَاتَكُمْ وَلَا تَفْرَحُوا بِمَا آتَاكُمْ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍ فَخُورٍ
ताकि जब कोई चीज़ तुमसे जाती रहे तो तुम उसका रंज न किया करो और जब कोई चीज़ (नेअमत) ख़ुदा तुमको दे तो उस पर न इतराया करो और ख़ुदा किसी इतराने वाले येख़ी बाज़ को दोस्त नहीं रखता
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अनुवाद — अल-हदीद 21

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Tuesday, August 18, 2026

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