अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- النُّبُوَّةَ: नबुव्वत (पैग़म्बरी), यानी अल्लाह का पैग़ाम लोगों तक पहुँचाने का मक़ाम।
- الْكِتَابَ: किताब, यानी आसमानी किताबें (तौरात, ज़बूर, इंजील, क़ुरआन)।
- مُّهْتَدٍ: हिदायत पाने वाला, सीधे रास्ते पर चलने वाला।
- فَاسِقُونَ: फ़ासिक़, यानी अल्लाह की आज्ञा से निकल जाने वाले, गुनाहगार।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी बड़ी रहमत और एहसान का ज़िक्र फ़रमाया है। उसने हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) और हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को दुनिया की तरफ़ रसूल बनाकर भेजा। ये दोनों पैग़म्बर उन शुरुआती रसूलों में से थे जिन्होंने तौहीद (एक अल्लाह की इबादत) का पैग़ाम इंसानों तक पहुँचाया। अल्लाह ने इन दोनों की संतान को ख़ास शरफ़ अता किया — उनकी नस्ल में नबुव्वत (पैग़म्बरी) और आसमानी किताबें रखीं। यानी इन्हीं की औलाद में से अधिकतर पैग़म्बर आए और तौरात, ज़बूर, इंजील और क़ुरआन जैसी किताबें इन्हीं की नस्ल में उतारी गईं। यह अल्लाह का बहुत बड़ा एहसान था कि उसने हिदायत का सिलसिला इन्हीं की संतान में जारी रखा।
फिर अल्लाह ने बताया कि इन दोनों पैग़म्बरों की संतान में से कुछ लोग हिदायत पाने वाले थे — यानी उन्होंने अल्लाह के दीन को क़बूल किया और सीधे रास्ते पर चले। लेकिन उनमें से बहुत से लोग फ़ासिक़ थे — यानी अल्लाह की आज्ञा से निकल गए, उसकी इबादत छोड़ दी और गुनाहों में पड़ गए। यह बात हमें सिखाती है कि किसी नेक इंसान की संतान होना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि हर इंसान को ख़ुद अपनी मेहनत से हिदायत हासिल करनी होती है। नस्ल या ख़ानदान किसी को जन्नत में नहीं पहुँचा सकता, जब तक कि वह ख़ुद अल्लाह की इबादत न करे और उसके हुक्मों पर न चले।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने इंसानों की हिदायत के लिए हर ज़माने में पैग़म्बर और किताबें भेजीं। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें क़ुरआन जैसी आख़िरी किताब और हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जैसे आख़िरी रसूल अता किए। हमें चाहिए कि इस नेमत की क़द्र करें, क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। अल्लाह ने हिदायत का रास्ता हर इंसान के लिए खोल दिया है — बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करने की। आज हमें अपने अंदर झाँककर देखना चाहिए कि हम किस क़िस्म के लोगों में हैं — हिदायत पाने वालों में या फ़ासिक़ों में? अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 24-28 — अल-हदीद
अनुवाद — अल-हदीद 26
सूरा अल-हदीद आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बेशक हम ही ने नूह और इबराहीम को (पैग़म्बर…सूरा आयत 26/29 — अल-हदीद الحديد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हदीद सुनें, अल-हदीद अनुवाद, अल-हदीद mp3, अल-हदीद pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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