Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- कमसलिश्शैतान: शैतान की मिसाल की तरह।
- इज़ क़ाला लिल्इन्सानिक्फुर: जब उसने इंसान से कहा कि कुफ़्र करो।
- फ़लम्मा कफ़र: फिर जब उसने कुफ़्र कर लिया।
- इन्नी बरीउन मिन्क: मैं तुमसे बरी हूँ (मेरा तुमसे कोई वास्ता नहीं)।
- इन्नी अख़ाफुल्लाह: मैं अल्लाह से डरता हूँ।
- रब्बिल आलमीन: सारे जहानों का पालनहार।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमानों) की मिसाल बयान कर रहे हैं, जो यहूदियों को रसूलुल्लाह ﷺ के खिलाफ़ लड़ने के लिए उकसाते थे और उन्हें यक़ीन दिलाते थे कि हम तुम्हारे साथ हैं, अगर तुम पर कोई हमला करेगा तो हम तुम्हारी मदद करेंगे। अल्लाह फ़रमाता है कि इन मुनाफ़िक़ीन की मिसाल बिल्कुल शैतान जैसी है।
शैतान ने एक इंसान को कुफ़्र की तरफ़ बुलाया और उसके लिए कुफ़्र को ख़ूबसूरत बनाकर पेश किया। उसने कहा: "कुफ़्र कर ले, यही रास्ता है।" जब उस इंसान ने शैतान के बहकावे में आकर कुफ़्र कर लिया, तो शैतान ने तुरंत उससे किनारा कर लिया और कहा: "मैं तुमसे बरी हूँ, मेरा तुमसे कोई नाता नहीं। मैं तो अल्लाह से डरता हूँ, जो सारे जहानों का पालनहार है।" — यानी शैतान ने उसे धोखा दिया, उसे अंधेरे में डाला और फिर जब वह कुफ़्र में गिर गया, तो शैतान ने उसे अकेला छोड़ दिया और अपने हाथ खड़े कर लिए।
यही हाल मुनाफ़िक़ीन का है। वे यहूदियों को जंग पर उकसाते हैं और वादा करते हैं कि हम तुम्हारे साथ हैं, लेकिन जब असली मौका आता है, तो वे पीछे हट जाते हैं और कहते हैं कि हमारा तुमसे कोई वास्ता नहीं। वे सिर्फ़ धोखा देते हैं और लोगों को तबाही की तरफ़ ले जाते हैं।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। शैतान और उसके नक़्शे-क़दम पर चलने वाले लोग हमेशा इंसान को बरबादी की तरफ़ ले जाते हैं। वे मीठी बातों से दिल में उम्मीद जगाते हैं, लेकिन जब इंसान गलत रास्ते पर चल पड़ता है, तो वे उसे अकेला छोड़ देते हैं। इसलिए हमें कभी भी शैतान या उसके जैसे लोगों की बातों में नहीं आना चाहिए। हमें सिर्फ़ अल्लाह की बात माननी चाहिए और उसकी राह पर चलना चाहिए।
याद रखिए, शैतान का वादा हमेशा झूठा होता है। वह इंसान को दुनिया की ख़्वाहिशें दिखाता है, लेकिन आख़िरत में उसके पास देने के लिए कुछ नहीं होता। अल्लाह से डरने वाला इंसान कभी शैतान के धोखे में नहीं आता। अल्लाह हमें शैतान के मक़र से बचाए और हमें सीधी राह पर चलाए। आमीन।
📜 आयत 14-18 — सूरा अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 16
सूरा अल-हश्र आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुनाफ़िकों) की मिसाल शैतान की सी है कि इन्सान से…सूरा आयत 16/24 — सूरा अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हश्र सुनें, सूरा अल-हश्र अनुवाद, सूरा अल-हश्र mp3, सूरा अल-हश्र pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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