अल-हश्र · 16/24
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हश्र
كَمَثَلِ الشَّيْطَانِ إِذْ قَالَ لِلْإِنسَانِ اكْفُرْ فَلَمَّا كَفَرَ قَالَ إِنِّي بَرِيءٌ مِّنكَ إِنِّي أَخَافُ اللَّهَ رَبَّ الْعَالَمِينَ ۝١٦
Kamasalish shaitaani izqaala lil insaanik fur falammaa kafara qaala innee bareee`um minka inneee akhaaful laaha rabbal `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
(मुनाफ़िकों) की मिसाल शैतान की सी है कि इन्सान से कहता रहा कि काफ़िर हो जाओ, फिर जब वह काफ़िर हो गया तो कहने लगा मैं तुमसे बेज़ार हूँ मैं सारे जहाँ के परवरदिगार से डरता हूँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कमसलिश्शैतान: शैतान की मिसाल की तरह।
  • इज़ क़ाला लिल्इन्सानिक्फुर: जब उसने इंसान से कहा कि कुफ़्र करो।
  • फ़लम्मा कफ़र: फिर जब उसने कुफ़्र कर लिया।
  • इन्नी बरीउन मिन्क: मैं तुमसे बरी हूँ (मेरा तुमसे कोई वास्ता नहीं)।
  • इन्नी अख़ाफुल्लाह: मैं अल्लाह से डरता हूँ।
  • रब्बिल आलमीन: सारे जहानों का पालनहार।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमानों) की मिसाल बयान कर रहे हैं, जो यहूदियों को रसूलुल्लाह ﷺ के खिलाफ़ लड़ने के लिए उकसाते थे और उन्हें यक़ीन दिलाते थे कि हम तुम्हारे साथ हैं, अगर तुम पर कोई हमला करेगा तो हम तुम्हारी मदद करेंगे। अल्लाह फ़रमाता है कि इन मुनाफ़िक़ीन की मिसाल बिल्कुल शैतान जैसी है।

शैतान ने एक इंसान को कुफ़्र की तरफ़ बुलाया और उसके लिए कुफ़्र को ख़ूबसूरत बनाकर पेश किया। उसने कहा: "कुफ़्र कर ले, यही रास्ता है।" जब उस इंसान ने शैतान के बहकावे में आकर कुफ़्र कर लिया, तो शैतान ने तुरंत उससे किनारा कर लिया और कहा: "मैं तुमसे बरी हूँ, मेरा तुमसे कोई नाता नहीं। मैं तो अल्लाह से डरता हूँ, जो सारे जहानों का पालनहार है।" — यानी शैतान ने उसे धोखा दिया, उसे अंधेरे में डाला और फिर जब वह कुफ़्र में गिर गया, तो शैतान ने उसे अकेला छोड़ दिया और अपने हाथ खड़े कर लिए।

यही हाल मुनाफ़िक़ीन का है। वे यहूदियों को जंग पर उकसाते हैं और वादा करते हैं कि हम तुम्हारे साथ हैं, लेकिन जब असली मौका आता है, तो वे पीछे हट जाते हैं और कहते हैं कि हमारा तुमसे कोई वास्ता नहीं। वे सिर्फ़ धोखा देते हैं और लोगों को तबाही की तरफ़ ले जाते हैं।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। शैतान और उसके नक़्शे-क़दम पर चलने वाले लोग हमेशा इंसान को बरबादी की तरफ़ ले जाते हैं। वे मीठी बातों से दिल में उम्मीद जगाते हैं, लेकिन जब इंसान गलत रास्ते पर चल पड़ता है, तो वे उसे अकेला छोड़ देते हैं। इसलिए हमें कभी भी शैतान या उसके जैसे लोगों की बातों में नहीं आना चाहिए। हमें सिर्फ़ अल्लाह की बात माननी चाहिए और उसकी राह पर चलना चाहिए।

याद रखिए, शैतान का वादा हमेशा झूठा होता है। वह इंसान को दुनिया की ख़्वाहिशें दिखाता है, लेकिन आख़िरत में उसके पास देने के लिए कुछ नहीं होता। अल्लाह से डरने वाला इंसान कभी शैतान के धोखे में नहीं आता। अल्लाह हमें शैतान के मक़र से बचाए और हमें सीधी राह पर चलाए। आमीन।



📜 आयत 14-18 — सूरा अल-हश्र

14لَا يُقَاتِلُونَكُمْ جَمِيعًا إِلَّا فِي قُرًى مُّحَصَّنَةٍ أَوْ مِن وَرَاءِ جُدُرٍ ۚ بَأْسُهُم بَيْنَهُمْ شَدِيدٌ ۚ تَحْسَبُهُمْ جَمِيعًا وَقُلُوبُهُمْ شَتَّىٰ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَعْقِلُونَ
ये सब के सब मिलकर भी तुमसे नहीं लड़ सकते, मगर हर तरफ से महफूज़ बस्तियों में या (शहर पनाह की) दीवारों की आड़ में इनकी आपस में तो बड़ी धाक है कि तुम ख्याल करोगे कि सब के सब (एक जान) हैं मगर उनके दिल एक दूसरे से फटे हुए हैं ये इस वजह से कि ये लोग बेअक्ल हैं
15كَمَثَلِ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ قَرِيبًا ۖ ذَاقُوا وَبَالَ أَمْرِهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
उनका हाल उन लोगों का सा है जो उनसे कुछ ही पेशतर अपने कामों की सज़ा का मज़ा चख चुके हैं और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
16كَمَثَلِ الشَّيْطَانِ إِذْ قَالَ لِلْإِنسَانِ اكْفُرْ فَلَمَّا كَفَرَ قَالَ إِنِّي بَرِيءٌ مِّنكَ إِنِّي أَخَافُ اللَّهَ رَبَّ الْعَالَمِينَ
(मुनाफ़िकों) की मिसाल शैतान की सी है कि इन्सान से कहता रहा कि काफ़िर हो जाओ, फिर जब वह काफ़िर हो गया तो कहने लगा मैं तुमसे बेज़ार हूँ मैं सारे जहाँ के परवरदिगार से डरता हूँ
17فَكَانَ عَاقِبَتَهُمَا أَنَّهُمَا فِي النَّارِ خَالِدَيْنِ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ الظَّالِمِينَ
तो दोनों का नतीजा ये हुआ कि दोनों दोज़ख़ में (डाले) जाएँगे और उसमें हमेशा रहेंगे और यही तमाम ज़ालिमों की सज़ा है
18يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَلْتَنظُرْ نَفْسٌ مَّا قَدَّمَتْ لِغَدٍ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो, और हर शख़्श को ग़ौर करना चाहिए कि कल क़यामत के वास्ते उसने पहले से क्या भेजा है और ख़ुदा ही से डरते रहो बेशक जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
अल-हश्रकुरान सूची
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अनुवाद — अल-हश्र 16

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Thursday, October 1, 2026

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