अल-हश्र · 17/24
अनुवाद उच्चारण — अल-हश्र
فَكَانَ عَاقِبَتَهُمَا أَنَّهُمَا فِي النَّارِ خَالِدَيْنِ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ الظَّالِمِينَ ۝١٧
Fakaana `aaqibatahumaaa annahumaa fin naari khaalidaini feehaa; wa zaalika jazaaa`uz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
तो दोनों का नतीजा ये हुआ कि दोनों दोज़ख़ में (डाले) जाएँगे और उसमें हमेशा रहेंगे और यही तमाम ज़ालिमों की सज़ा है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • عَاقِبَتَهُمَا – दोनों का अंजाम या परिणाम
  • خَالِدَيْنِ – हमेशा रहने वाले (सदैव रहने वाले)
  • جَزَاءُ الظَّالِمِينَ – अत्याचारियों/ज़ालिमों का बदला

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने शैतान और उस इंसान के अंजाम का ज़िक्र किया है जिसने शैतान की बात मानकर कुफ्र और गुमराही का रास्ता अपनाया। दोनों का अंत यह होगा कि वे जहन्नम की आग में हमेशा हमेशा के लिए रहेंगे। यह उन लोगों का बदला है जो अल्लाह की हदों से आगे बढ़ गए, जिन्होंने अपने ऊपर ज़ुल्म किया और अल्लाह की रहमत और हिदायत को ठुकरा दिया।

यहाँ अल्लाह तआला हमें एक बहुत बड़ा सबक दे रहा है कि शैतान का असली मक़सद इंसान को बरबाद करना है। शैतान वादा करता है, लेकिन उसके वादे झूठे होते हैं। वह इंसान को दुनिया की चमक-दमक दिखाकर आख़िरत की भलाई से दूर कर देता है। जो इंसान शैतान की पैरवी करता है, वह अपने ही नुक़सान का सामान करता है।

इस आयत से हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल सटीक है। जिसने अल्लाह की नाफ़रमानी की और ज़ुल्म किया, उसे उसकी सज़ा मिलकर रहेगी। लेकिन साथ ही अल्लाह की रहमत भी बहुत बड़ी है – जो कोई तौबा कर ले, अपनी गलती से बाज़ आ जाए, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और जन्नत की तरफ़ बुलाता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें आगाह करती है कि हम शैतान के धोखे में न आएँ। हमें अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों पर चलना चाहिए। दुनिया की मोहब्बत और शैतान की बातों में पड़कर हम अपनी आख़िरत को बरबाद न करें। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है, क़ुरआन दिया है, और सही रास्ता दिखाया है – यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम इस नेमत की क़द्र करें और सीधे रास्ते पर चलें। अल्लाह हम सबको शैतान के शर से बचाए और जन्नत की राह दिखाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अल-हश्र

15كَمَثَلِ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ قَرِيبًا ۖ ذَاقُوا وَبَالَ أَمْرِهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
उनका हाल उन लोगों का सा है जो उनसे कुछ ही पेशतर अपने कामों की सज़ा का मज़ा चख चुके हैं और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
16كَمَثَلِ الشَّيْطَانِ إِذْ قَالَ لِلْإِنسَانِ اكْفُرْ فَلَمَّا كَفَرَ قَالَ إِنِّي بَرِيءٌ مِّنكَ إِنِّي أَخَافُ اللَّهَ رَبَّ الْعَالَمِينَ
(मुनाफ़िकों) की मिसाल शैतान की सी है कि इन्सान से कहता रहा कि काफ़िर हो जाओ, फिर जब वह काफ़िर हो गया तो कहने लगा मैं तुमसे बेज़ार हूँ मैं सारे जहाँ के परवरदिगार से डरता हूँ
17فَكَانَ عَاقِبَتَهُمَا أَنَّهُمَا فِي النَّارِ خَالِدَيْنِ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ الظَّالِمِينَ
तो दोनों का नतीजा ये हुआ कि दोनों दोज़ख़ में (डाले) जाएँगे और उसमें हमेशा रहेंगे और यही तमाम ज़ालिमों की सज़ा है
18يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَلْتَنظُرْ نَفْسٌ مَّا قَدَّمَتْ لِغَدٍ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो, और हर शख़्श को ग़ौर करना चाहिए कि कल क़यामत के वास्ते उसने पहले से क्या भेजा है और ख़ुदा ही से डरते रहो बेशक जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
19وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ نَسُوا اللَّهَ فَأَنسَاهُمْ أَنفُسَهُمْ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ
और उन लोगों के जैसे न हो जाओ जो ख़ुदा को भुला बैठे तो ख़ुदा ने उन्हें ऐसा कर दिया कि वह अपने आपको भूल गए यही लोग तो बद किरदार हैं
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अनुवाद — अल-हश्र 17

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Tuesday, August 18, 2026

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