अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَحْشُرُهُمْ: उन्हें इकट्ठा करेगा।
- يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ: ऐ जिन्नात के समुदाय!
- اسْتَكْثَرْتُم مِّنَ الْإِنسِ: तुमने इंसानों में से बहुतों को (गुमराह करके) अपना अनुयायी बना लिया।
- أَوْلِيَاؤُهُم: उनके (जिन्नात के) मित्र और साथी।
- اسْتَمْتَعَ بَعْضُنَا بِبَعْضٍ: हममें से एक ने दूसरे से लाभ उठाया।
- أَجَلَنَا الَّذِي أَجَّلْتَ لَنَا: वह नियत समय जो तूने हमारे लिए निर्धारित किया था।
- مَثْوَاكُمْ: तुम्हारा ठिकाना और निवास स्थान।
- خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले।
विस्तृत तफसीर:
ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब अल्लाह तआला सभी इंसानों और जिन्नात को इकट्ठा करेगा। उस दिन अल्लाह जिन्नात के सरगनाओं और शैतानों से कहेगा: "ऐ जिन्नात के समुदाय! तुमने इंसानों में से बहुतों को गुमराह किया और उन्हें अपना अनुयायी बना लिया।" यह सुनकर जिन्नात के इंसानी साथी — जिन्होंने दुनिया में उनकी बात मानी और उनके कहने पर चले — अल्लाह की बारगाह में जवाब देंगे: "ऐ हमारे रब! हममें से एक ने दूसरे से फायदा उठाया। जिन्नात ने हमें गुमराह करके अपनी बात मनवाई, और हमने उनकी बात मानकर अपनी इच्छाओं और ख्वाहिशों को पूरा किया। इस तरह हमने एक-दूसरे से लाभ उठाया। और अब हम उस नियत समय तक पहुँच गए हैं जो तूने हमारे लिए निर्धारित किया था — यानी क़यामत का दिन।"
तब अल्लाह तआला उन्हें सख्त अंदाज़ में जवाब देगा: "आग तुम्हारा ठिकाना है, तुम उसमें हमेशा रहोगे।" हाँ, अल्लाह ने जो लोग अपने रब पर ईमान लाए और उसकी इबादत करते रहे, लेकिन कुछ गुनाह किए — उनके बारे में अल्लाह की मर्ज़ी है कि वह चाहे तो उन्हें माफ कर दे और चाहे तो उन्हें कुछ समय के लिए आग में डाले। यह अल्लाह की रहमत और उसकी इंसाफ़ पर मुबनी है। अल्लाह तआला हिकमत वाला है — वह जो कुछ करता है हिकमत के साथ करता है, और वह सब कुछ जानने वाला है — उसे अपने बंदों के हालात, उनके अमल और उनकी नीयतों का पूरा इल्म है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बड़ी अहम सीख देती है कि शैतान और उसके साथी इंसानों को गुमराह करने की कोशिश में लगे रहते हैं। इसलिए हमें हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए और अल्लाह की किताब और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत को अपना रहनुमा बनाना चाहिए। याद रखिए! दुनिया की यह ज़िंदगी बहुत छोटी है, और आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा की है। जो लोग आज अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है। और जो लोग शैतान की پیروی करते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है — उसने हमें आगाह कर दिया और रास्ता दिखा दिया। अब फैसला हमारा है कि हम किस रास्ते पर चलते हैं। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 126-130 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 128
सूरा अल-अनआम आयत 128 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल वह दिन याद दिलाओ) जिस दिन ख़ुदा…सूरा आयत 128/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 126–130. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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