अल-अनआम · 128/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ قَدِ اسْتَكْثَرْتُم مِّنَ الْإِنسِ ۖ وَقَالَ أَوْلِيَاؤُهُم مِّنَ الْإِنسِ رَبَّنَا اسْتَمْتَعَ بَعْضُنَا بِبَعْضٍ وَبَلَغْنَا أَجَلَنَا الَّذِي أَجَّلْتَ لَنَا ۚ قَالَ النَّارُ مَثْوَاكُمْ خَالِدِينَ فِيهَا إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ ۗ إِنَّ رَبَّكَ حَكِيمٌ عَلِيمٌ ۝١٢٨
Wa yamwa yahshuruhum jamee`ai yaa ma`sharal jinni qadistaksartum minal insi wa qaala awliyaaa`uhy minal insi Rabbanas tamta`a ba`dunaa biba`dinw wa balaghnaaa ajalannal lazeee ajjalta lanaa; qaalan Naaru maswaakum khaalideena feehaaa illaa maa shaaa`allaah; inna Rabbaka Hakeemun `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल वह दिन याद दिलाओ) जिस दिन ख़ुदा सब लोगों को जमा करेगा और शयातीन से फरमाएगा, ऐ गिरोह जिन्नात तुमने तो बहुतेरे आदमियों को (बहका बहका कर) अपनी जमाअत बड़ी कर ली (और) आदमियों से जो लोग (उन शयातीन के दुनिया में) दोस्त थे कहेंगे ऐ हमारे पालने वाले (दुनिया में) हमने एक दूसरे से फायदा हासिल किया और अपने किए की सज़ा पाने को, जो वक्त तू ने हमारे लिए मुअय्युन किया था अब हम अपने उस वक्त (क़यामत) में पहुँच गए ख़ुदा उसके जवाब में, फरमाएगा तुम सब का ठिकाना जहन्नुम है और उसमें हमेशा रहोगे मगर जिसे ख़ुदा चाहे (नजात दे) बेशक तेरा परवरदिगार हिकमत वाला वाक़िफकार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَحْشُرُهُمْ: उन्हें इकट्ठा करेगा।
  • يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ: ऐ जिन्नात के समुदाय!
  • اسْتَكْثَرْتُم مِّنَ الْإِنسِ: तुमने इंसानों में से बहुतों को (गुमराह करके) अपना अनुयायी बना लिया।
  • أَوْلِيَاؤُهُم: उनके (जिन्नात के) मित्र और साथी।
  • اسْتَمْتَعَ بَعْضُنَا بِبَعْضٍ: हममें से एक ने दूसरे से लाभ उठाया।
  • أَجَلَنَا الَّذِي أَجَّلْتَ لَنَا: वह नियत समय जो तूने हमारे लिए निर्धारित किया था।
  • مَثْوَاكُمْ: तुम्हारा ठिकाना और निवास स्थान।
  • خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले।

विस्तृत तफसीर:

ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब अल्लाह तआला सभी इंसानों और जिन्नात को इकट्ठा करेगा। उस दिन अल्लाह जिन्नात के सरगनाओं और शैतानों से कहेगा: "ऐ जिन्नात के समुदाय! तुमने इंसानों में से बहुतों को गुमराह किया और उन्हें अपना अनुयायी बना लिया।" यह सुनकर जिन्नात के इंसानी साथी — जिन्होंने दुनिया में उनकी बात मानी और उनके कहने पर चले — अल्लाह की बारगाह में जवाब देंगे: "ऐ हमारे रब! हममें से एक ने दूसरे से फायदा उठाया। जिन्नात ने हमें गुमराह करके अपनी बात मनवाई, और हमने उनकी बात मानकर अपनी इच्छाओं और ख्वाहिशों को पूरा किया। इस तरह हमने एक-दूसरे से लाभ उठाया। और अब हम उस नियत समय तक पहुँच गए हैं जो तूने हमारे लिए निर्धारित किया था — यानी क़यामत का दिन।"

तब अल्लाह तआला उन्हें सख्त अंदाज़ में जवाब देगा: "आग तुम्हारा ठिकाना है, तुम उसमें हमेशा रहोगे।" हाँ, अल्लाह ने जो लोग अपने रब पर ईमान लाए और उसकी इबादत करते रहे, लेकिन कुछ गुनाह किए — उनके बारे में अल्लाह की मर्ज़ी है कि वह चाहे तो उन्हें माफ कर दे और चाहे तो उन्हें कुछ समय के लिए आग में डाले। यह अल्लाह की रहमत और उसकी इंसाफ़ पर मुबनी है। अल्लाह तआला हिकमत वाला है — वह जो कुछ करता है हिकमत के साथ करता है, और वह सब कुछ जानने वाला है — उसे अपने बंदों के हालात, उनके अमल और उनकी नीयतों का पूरा इल्म है।


दावती पहलू:

यह आयत हमें बड़ी अहम सीख देती है कि शैतान और उसके साथी इंसानों को गुमराह करने की कोशिश में लगे रहते हैं। इसलिए हमें हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए और अल्लाह की किताब और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत को अपना रहनुमा बनाना चाहिए। याद रखिए! दुनिया की यह ज़िंदगी बहुत छोटी है, और आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा की है। जो लोग आज अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है। और जो लोग शैतान की پیروی करते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है — उसने हमें आगाह कर दिया और रास्ता दिखा दिया। अब फैसला हमारा है कि हम किस रास्ते पर चलते हैं। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 126-130 — अल-अनआम

126وَهَٰذَا صِرَاطُ رَبِّكَ مُسْتَقِيمًا ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ
और (ऐ रसूल) ये (इस्लाम) तुम्हारे परवरदिगार का (बनाया हुआ) सीधा रास्ता है इबरत हासिल करने वालों के वास्ते हमने अपने आयात तफसीलन बयान कर दिए हैं
127۞ لَهُمْ دَارُ السَّلَامِ عِندَ رَبِّهِمْ ۖ وَهُوَ وَلِيُّهُم بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
उनके वास्ते उनके परवरदिगार के यहाँ अमन व चैन का घर (बेहश्त) है और दुनिया में जो कारगुज़ारियाँ उन्होने की थीं उसके ऐवज़ ख़ुदा उन का सरपरस्त होगा
128وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ قَدِ اسْتَكْثَرْتُم مِّنَ الْإِنسِ ۖ وَقَالَ أَوْلِيَاؤُهُم مِّنَ الْإِنسِ رَبَّنَا اسْتَمْتَعَ بَعْضُنَا بِبَعْضٍ وَبَلَغْنَا أَجَلَنَا الَّذِي أَجَّلْتَ لَنَا ۚ قَالَ النَّارُ مَثْوَاكُمْ خَالِدِينَ فِيهَا إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ ۗ إِنَّ رَبَّكَ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
और (ऐ रसूल वह दिन याद दिलाओ) जिस दिन ख़ुदा सब लोगों को जमा करेगा और शयातीन से फरमाएगा, ऐ गिरोह जिन्नात तुमने तो बहुतेरे आदमियों को (बहका बहका कर) अपनी जमाअत बड़ी कर ली (और) आदमियों से जो लोग (उन शयातीन के दुनिया में) दोस्त थे कहेंगे ऐ हमारे पालने वाले (दुनिया में) हमने एक दूसरे से फायदा हासिल किया और अपने किए की सज़ा पाने को, जो वक्त तू ने हमारे लिए मुअय्युन किया था अब हम अपने उस वक्त (क़यामत) में पहुँच गए ख़ुदा उसके जवाब में, फरमाएगा तुम सब का ठिकाना जहन्नुम है और उसमें हमेशा रहोगे मगर जिसे ख़ुदा चाहे (नजात दे) बेशक तेरा परवरदिगार हिकमत वाला वाक़िफकार है
129وَكَذَٰلِكَ نُوَلِّي بَعْضَ الظَّالِمِينَ بَعْضًا بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
और इसी तरह हम बाज़ ज़ालिमों को बाज़ का उनके करतूतों की बदौलत सरपरस्त बनाएँगे
130يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِي وَيُنذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا ۚ قَالُوا شَهِدْنَا عَلَىٰ أَنفُسِنَا ۖ وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ
(फिर हम पूछेंगे कि क्यों) ऐ गिरोह जिन व इन्स क्या तुम्हारे पास तुम ही में के पैग़म्बर नहीं आए जो तुम तुमसे हमारी आयतें बयान करें और तुम्हें तुम्हारे उस रोज़ (क़यामत) के पेश आने से डराएँ वह सब अर्ज करेंगे (बेशक आए थे) हम ख़ुद अपने ऊपर आप अपने (ख़िलाफ) गवाही देते हैं (वाकई) उनको दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी ने उन्हें अंधेरे में डाल रखा और उन लोगों ने अपने ख़िलाफ आप गवाही दीं
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अनुवाद — अल-अनआम 128

सूरा अल-अनआम आयत 128 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल वह दिन याद दिलाओ) जिस दिन ख़ुदा…

सूरा आयत 128/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 126–130. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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